भोजपुरी ला मिलल आश्वासन पर भोजपुरी समाज दिल्ली आभार जतवलसि

बियफे का दिने लोकसभा में गृहमंत्री पी चिदंबरम के दिहल बयान कि भोजपुरी के संविधान के अठवीं अनुसूची में शामिल के के बिल मानसून सत्र में आई से भोजपुरी समाज दिल्ली के अध्यक्ष अजीत दुबे खुशी जाहिर करत कहले बाड़न … पढ़त रहीं

पी चिदंबरम भोजपुरी में कहलें, हम रउरा सभ के भावना समुझत बानी

आजु जब लोकसभा में भोजपुरी के संविधान के अठवीं अनुसूची में शामिल करे के सवाल उठावल गइल त गृह मंत्री पी चिदंबरम एह बारे में सहानुभूति से विचार करे के भरोसा दिआवत भोजपुरी में कहलें कि “हम राँवा सब के … पढ़त रहीं

बतकुच्चन – ५८

भाषा संस्कार से बनेला कि भाषा से संस्कार बनेला एह बाति पर ढेरहन बतकुच्चन कइल जा सकेला. बाकिर एह बाति पर ना कि साहित्य समाज के दर्पण होले. साहित्य के रूप हर समय बदलत रहेला आ आजु के साहित्य में … पढ़त रहीं

आपन तऽ कवनो स्टैंडर्ड ना दोसरा के ‘पुअर’ बतावत बाड़े

– जयंती पांडेय रामचेला दुपहरिया में बाबा लस्टमानंद के दुअरा मुंह लटकवले अइले आ कहले, अमरीका के एगो कम्पनी बा ऊ तऽ हमनी के देश के कंगाल बता के कहि देता कि ओकर कवनो साख नइखे. ई खबर से भारत … पढ़त रहीं

भोजपुरी उपन्यास “जुगेसर” – 2

- हरेन्द्र कुमार पाण्डेय अबले जवन पढ़नी ओकरा आगे …) -’अरे योगेश्वर, कहां घुम तार?’ ऊ कहलन. -’सर प्रणाम. हम समस्तीपुर जैन स्कूल में ज्वाइन कइले बानी. महीना भर भइल. रउरा कब से हईं इहां?’ -’हम त रिजल्ट का बादे … पढ़त रहीं

आवऽ लवटि चलीं जा – (1)

- डा॰अशोक द्विवेदी भाई का डंटला आ झिरिकला से गंगाजी के सिवान छूटल त बीरा बेचैन होके अनासो गांव चौगोठत फिरसु. एने ओने डँउड़िआइ के बगइचा में फेंड़ा तर बइठि जासु आ सोचल करसु. सोचसु का, खाली उड़सु. कल्पना का … पढ़त रहीं

गुदगुदी कि बेहयाई

- पाण्डेय हरिराम फिल्म अभिनेत्री रेखा के नाम राज्य सभा खातिर सरकार मनोनीत कइले बिया आ जया बच्चन ओहिजा पहिले से चुना के आइल बाड़ी. एकरा के लेके मीडिया में बहुते चरचा बा. रसगर मजगर कहानी गढ़ाए लागल बा. ऊ … पढ़त रहीं

बसन्त फागुन

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से आखिरी प्रस्तुति) – डा॰अशोक द्विवेदी धुन से सुनगुन मिलल बा भँवरन के रंग सातों खिलल तितलियन के लौट आइल चहक, चिरइयन के! फिर बगइचन के मन, मोजरियाइल अउर फसलन के देह गदराइल … पढ़त रहीं

गीत

(पाती के अंक 62-63 (जनवरी 2012 अंक) से – 23वी प्रस्तुति) – रिपुसूदन श्रीवास्तव जिन्दगी हऽ कि रूई के बादर हवे, एगो ओढ़े बिछावे के चादर हवे. जवना घर में ना पहुँचे किरिन भोर के जवना आँखिन से टूटे ना … पढ़त रहीं

गीत

- मनोज भावुक बोल रे मन बोल जिन्दगी का ह … जिन्दगी का ह . आरजू मूअल, लोर बन के गम आँख से चूअल आस के उपवन बन गइल पतझड़, फूल -पतई सब डाल से टूटल … साध- सपना के … पढ़त रहीं