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Chorwa Banal Damad Nazaiya Tohase Laagi

टटका खबर

सोमार, ८ फरवरी २०१०

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शलभासन

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टटका सरोकार

पाती के नयका अंक

cover page of Paati 57
 

सुष्मिता सान्याल के डायरी

Sushmita Sanyal Ki Diary

भोजपुरी चुटपुटिहा

 

रायशुमारी

गीत गवनई

 

चरचा बा

मजबूरी में किनाइये गइल कार

जयन्ती पाण्डेय

बाबा लस्टमानंद का दुआरे मोटर कार देखि के रामचेला त चकरा गइले. अरे ई बाबा के का भइल कि काल्हु ले दाल के झोंखत रहले आज अचानक कार कीन लिहले. जा के ऊ बाबा से सवचले, अरे ई कार कतना में परलि हिअ ? गइल रहलऽ काकी आ लईकन के ले के मकर संक्रान्त के बाजार करे आ अचानक कार ले के चलि अइलऽ ?

आगा पढ़ीं

 

अन्हार के समाजवाद

आलोक पुराणिक

अन्हार बा, दूर ले अन्हार बा. ना जी ई कवनो कविताई नइखे होत. खाँटी यथार्थवाद बा. बिजली गायब रहे त कवि ना जागे. कविता लिखे क न्यूनतम जरुरतन में से एगो होला बिजली क मौजूदगी. उ त व्यंग्यकारे कड़ेर जान वाला मनई होला जे बिजली गइलो पर चिन्तन कर सकेला. एने बिजली जाए का हालात पर चिंतन कइनी त इहे कुछ सामने आइल -

आगा पढ़ीं


भोजपुरी से गद्दारी

एगो पाठक अपना टिप्पणी में अँजोरिया के एह खातिर गद्दार कहले बाड़े कि अँजोरिया मराठी मानुष के सुझाव दिहले बा कि ओह लोग से मत बिजनेस करऽ जे मराठी ना समुझे बोले. कवनो बात के पूरा संदर्भ से काट के देखल जाव त ओकर मतलब अलग निकालल जा सकेला. आसान रहे कि ओह पाठक के टिप्पणी हम अस्वीकृत कर देतीं बाकिर उनकर आपत्ति जायज बुझायल एहसे सकार लिहनी. निन्दक नियरे राखिये, आँगन कुटी छवाव. ऊ हमार व्यक्तिगत निन्दा नइखन कइले हमरा विचार के विरोध भा निन्दा कइले बाड़े आ हम हमेशा कहीले कि दू गो सभ्य व्यक्ति हमेशा एह बात पर सहमत हो सकेलें कि ओह लोग का बीच कुछ बात पर असहमति बा.

हम भोजपुरी से बहुते प्यार करेनी आ एकरे चलते अँजोरिया के प्रकाशन शुरु कइले रहीं. अपना भाषा से प्यार के मतलब ई ना होला कि हम दोसरा से कहीं कि ऊ अपना भाषा के प्यार मत करे. आज बलिया छपरा आरा देवरिया बनारस गोरखपुर में केहू आपन बिजनेस शुरु करे आ ऊ हमार भाषा ना बोलत भा बुझत होखे त हम ओकरा से कवनो बिजनेस ना कर सकीं. ओह टैक्सी भा रिक्शा पर ना बइठब जे हमार भाषा ना बुझत जानत होखे. अतना हमार अधिकार बा. बाकिर हम ओह दुकानदार भा टैक्सी रिक्शावाला के चहेट ना मारब. ई कइल गलत आ अपराध होखी. आ एह दुनु बात में कवनो विरोधाभास नइखे.

कबो अगर हम मनसे भा शिवसेना के समर्थन में लउकबो करीले त ओकर मतलब होला. जे लोग बढ़ चढ़ के बयानबाजी कर रहल बा मराठी मानुष का खिलाफ ओहमें से संघ भाजपा छोड़ के बकिये लोग एह बात के कबो विरोध ना कइल कि काश्मीर काश्मीरियन के ह ! धारा ३७० का खिलाफ कबो ऊ लोग आवाज ना उठावे. काहे भाई ? मराठी मानुष त अतने कहत बा कि महाराष्ट्र में मराठी बोलीं. अपना घर परिवार में दोसर भाषा बोले पर त रोक नइखे लगावत.

हम हमेशा कहब कि भोजपुरिया लोग भाषा का प्रति तंग नजरिया ना राखे आ अधिकतर भोजपुरिया बहुभाषी होलें. तबहिये ऊ देश दुनिया में हर जगहा पावल जालें. पुरान कहावत ह व्हेन यू आर ईन रोम बिहेव लाइक रोमन्स ! सही बात बा. महाराष्ट्र में रहे वाला लोग के मराठी सीख लेबे के चाहीं. तामिलनाडू मे तमिल, कर्नाटक में कन्नड़, बंगाल मे बंगला, पंजाब में पंजाबी. एहमें कवनो बुराई नइखे. सामने वाला त जब यूपी बिहार में आवेला त हिन्दी खुशी खुशी सीख लेला, भोजपुरी इलाका में भोजपुरियो सीख लेला त हमहू ई काम काहे ना करब जब हम दोसरा जगहा जायब ?

एहसे भइया अपने हमके जवन चाहीं कहीं, हम आपन बात साफ कर दिहनी. हम त ओह बात के समर्थक हईं कि भारत में यदि रहना है तो वन्दे मातरम कहना होगा. एही बात के छोटहन रुप ह महाराष्ट्र में रहना है तो मराठी बोलना होगा, बिहार यूपी में रहना है तो हिन्दी बोलना होगा. संगे संगे इहो कहब कि मुंबई खाली मराठियने के ना ह आ काश्मीरो खाली काश्मिरियन के ना ह. धारा ३७० कवनो प्रदेश खातिर लागे गलत ह. पूरा देश हिन्दुस्तानियन के ह आ रही. रउरा का समुझत बानीं, यूपी बिहार वाले मुंबई से निकल आवस त मुंबई ओहि दिने ठप्प हो जाई. आ मराठा लोग बिजनेस नाहियो करी त यूपी बिहार वाले मुंबई में अतना बाड़े कि ओह लोग के बिजनेस के कमी कबो ना रही. फैसला मराठी मानुष के करे के बा, हमरा रउरा ना !

- संपादक, अँजोरिया




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