साहित्य

गाई गाई लोरिया

September 7, 2010
गाई गाई लोरिया

– ओ.पी. अमृतांशु गाई गाई लोरिया निंदरिया बोलावेली अँगनवा में दादी चान के बोलावेली अँगनवा में. आरे आवऽ बारे आवऽ, नदिया किनारे आवऽ सोने के कटोरवा में दुध भात लेले आवऽ दूध भात मुँहवा में घुट से घुटावेली अँगनवा में दादी चान के बोलावेली अँगनवा में. तेलवा फुलेलवा से अबटि चबटि के नजरि उतारेली...
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आजादी त मिलल, पर केकरा के

September 7, 2010
आजादी त मिलल, पर केकरा के

– अभयकृष्ण त्रिपाठी आजादी त मिलल, पर केकरा के, ई सवाल बा. कइसे कहीं दिल के दरदिया, कहला में बवाल बा. हर केहू देखा रहल बा, सबके आपन-आपन खेला, अपना मतलब के लगा रहल बा आजादी के मेला, का नेता का परेता आ का गुरु अउरी का चेला. आजादी के मतलब लूट बा, चिल्ला...
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गीत

August 28, 2010
गीत

– ओ.पी. अमृतांशु भादो के अन्हरिया रात, हमरो जिनिगिया, दिन पे दिने दिने होता देहिया हरदिया दिन पे दिने दिने ना. कहिलें कुशलवा में, बारहो वियोगवा, दुई टुक होई गईलें, घर के हंडीयवा, नेह-छोह बाँट गईल, ननदी सवतिया, दिन पे दिने दिने होता देहिया हरदिया दिन पे दिने दिने ना. टुटही पलानी मिलल ,...
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कबले अइबऽ पिया

August 21, 2010
कबले अइबऽ पिया

– कन्हैया पाण्डेय लरकल लरहिया बाटे, उजरल पलानी कबले अइबऽ पिया छिलबिल अँगना में पानी. असवों के सेंवतल नइखे चुवेले पलनिया भुरकुस नरियवा-छपुवा, ढहऽता मकनिया उपरा प्लास्टिक कइसो तनले हम बानी कबले अइबऽ पिया छिलबिल अँगना में पानी. भखड़ल दुअरिया पर के बाँस के चँचरवा टुटही केंवड़िया पर ना भइल ह विचारवा. कुकुरा अनेरिहा...
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गीत

August 21, 2010
गीत

- रामरक्षा मिश्र विमल १ जे रोअवला के खुशिया मनाई केहू ओकरा के का समुझाई ? लोर रोकले रोकाला ना कतहीं कहीं पूड़ी आ पूआ छनाला कहीं मरघट में बदलेले बगिया कहीं पाटी में बोतल खोलाला जे जहरिये में जिनिगी के पाई केहू ओकरा के का समुझाई ? नेह के कइसे सीढ़ी चढ़ी ऊ...
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भावुक जी : एगो गजल

August 20, 2010
भावुक जी : एगो गजल

- मनोज भावुक दर्द उबल के जब छलकेला गज़ल कहेलें भावुक जी जब-जब जे महसूस करेलें उहे लिखेलें भावुक जी टुकड़ा-टुकड़ा, किस्त-किस्त में जीये-मुयेलें भावुक जी जिनिगी फाटे रोज -रोज आ रोज सियेलें भावुक जी अपना जाने बड़का-बड़का काम करेलें भावुक जी चलनी में पानी बरिसन से रोज भरेलें भावुक जी एगो मकड़ी जाल...
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तहार सुधि

August 19, 2010
तहार सुधि

- डा॰अशोक द्विवेदी कतना हो जाला मनसायन सुधि का सुगंध से गमक उठेला जब बतास छान्ही पर एकदम ओलरि आवेला अकास सचहूँ कतना हो जाला मनसायन तहरा सुधि से हमरा भीतर कोना-अँतरा ले एक-ब-एक भर उठेला उजास! तहार सुधि अवते लहरे लागेला ताल फूल, टूसा-कोंढ़ी से ले के रंग सँवरे ले कल्पना, बन के...
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लहरे तिरंगा सजि धजि पूरा देशवा में

August 15, 2010
लहरे तिरंगा सजि धजि पूरा देशवा में

- रामरक्षा मिश्र विमल लहरे तिरंगा सजि धजि पूरा देशवा में पसरेले अङना दुअरिया अँजोरिया हरियर धरती चंदनिया पियर बीचे गह गह सगरी बधरिया अँजोरिया. असहीं आजाद हिंदुस्तान रहे जुग-जुग सगरी जहान फइलावे के अँजोरिया. आन बान शान भजपुरिहन के राखे खातिर एके गोड़े खाड़ दिन रात बा अँजोरिया. कतहीं अन्हार के निशान नाहीं...
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दू गो गजल

August 7, 2010
दू गो गजल

- रामरक्षा मिश्र विमल १ जहें नेह लागल दरदिए मिलल बा कबो फूल कँहवा अङनवा खिलल बा ? कबो लहलहाइल ना बिरवा सपन के कतनो नयनवा से पानी ढरल बा कल तक पियावल जे अँजुरी से अमिरित ओकरे अँजुरिया जहर से भरल बा केकरा से आशा बिस्वास के पर गजबे अन्हरिया सगरो जमल बा...
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भिखारी ठाकुर

August 6, 2010
भिखारी ठाकुर

- संतोष कुमार पटेल भिखारी ठाकुर भोजपुरी माई के एगो लाल मनई में कमाल अइसन पूत के पाके धरती हो गइली निहाल. काहे कि अइसन लोग धरती पर बेर बेर न आवेलें सांच सीधा गीत न गावेलें परेम के नेह के सनेह विछोह विराग के हियवा में धधकत आग के. बाकिर उ गवलें इहाँ...
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