एगो नवगीत

Ram Raksha Mishra Vimal

– रामरक्षा मिश्र विमल

फूटल भाग
लोराइल अँखिया
मन पितराइल.

असरा के अङना में
सपनन के आवाजाही
दिन बदलल का
दिल बदलल
मन हो जाला घाही
अलगवला पर मुहर लगल
जियरा छितराइल.

थथमत आवेला बसंत
मन सहमे लागल बा
शीशा के पँजरा जाए में
सोचे लागल बा
शंका हलुक बेमारी के
जब से गर्हुआइल.

करजा ले रोपाइल
सुख मरलसि
जम के पाला
मधि दरियावे
फूले लागल
साँसन के माला
हूक उठे
जिनिगी के चिंता
दिल घबराइल.

1 Comment

  1. omprakash amritanshu

    बहुत नीक लागल विमल जी राउर रचना .
    ओ.पी.अमृतांशु

Recent Posts

🤖 अंजोरिया में ChatGPT के सहयोग

अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

🌐 ChatGPT से खुद बातचीत करीं – आ देखीं ई कइसे रउरो रचना में मदद कर सकेला।