खरगे का मुँह में घी शक्कर


जबसे नीतीश ओने से एने आइल बाड़न तबसे ओने से उनका ला अतना बढ़िया-बढ़िया संबोधन आवे लागल बा जवना के देख-सुन के विश्वास ना होखी कि कुछे दिन पहिले ई लोग नीतीश के बड़ाई में का का ना कहत रहुवे. पता ना रउरा कबो देखले बानी कि ना बाकिर हम देखले बानी कि बस अड्डा पर जसहीं मजदूरन के झुण्ड लउके तसहीं सगरी बस वाला ओह झुण्ड के अपना बस के सवारी बनावे ला बेचैन हो जाव. ओह में से जवना बस के खलासी-कंडक्टर जबरदस्त होखसु ऊ मजदूरन के ओह झुण्ड के मेठ के कॉलर पकड़ के अपना बस पर खींच ले आवे आ बाकी के झुण्ड बिना कुछ कहले ओकरा पाछा-पाछा बस में सवार हो जासु.

वइसने कुछ नीतीशो का साथे भइल ई हम नईखीं कहत. बाकिर नीतीश के महागठबन्धन आ इंडी गठबन्धन के साथ छोड़ते ओह तरफ कोहराम मच गइल. अउरी गोल के त तनी कम-बेसी बाकिर कांग्रेस के दिमाग एकदमे से भन्ना गइल बा. नीतीश के आलोचना करत कांग्रेस के अध्यक्ष (कम से कम कुर्सी पर त उहे बइठल बाड़न) मल्लिकार्जुन खड़गे के कहना बा कि अगर 2024 के लोकसभा चुनाव में लोग सम्हरि के वोट ना दीहल त फेर एह देश में कबो चुनाव ना होखी. उनकर कहना बा कि तब देश में एकदलीय व्यवस्था वाला देशन का तरह एके गो पार्टी होखी आ ओकरा तरफ से एके गो उमीदवार. बस रउरा ओकरा के वोट दे देबे के होखी. ना दिहनी त आगा का होखी एकर कल्पनो ना कइल जा सके.

खरगे के बात सही होखी कि ना से त नइखीं जानत बाकिर उनुका मुँह में घी-शक्कर डाले के मन जरूर करत बा. अइसने अइसन लोग चुनौती देत रहल कि जम्मू कश्मीर से धारा 370 के हटावल संभव ना होखी. बकैती त अइसन करत रहुवे लोग कि अगर अइसन हो गइल त जम्मू कश्मीर में तिरंगा उठावे वाला कवनो हाथ ना मिली. धारा 370 खतम हो गइल आ अब शान से लाल चौक पर तिरंगा फहरत करेला.

फेरू श्रीराम मन्दिर ले के बोली बोलल करे लोग कि – मन्दिर वहीं बनायेंगे पर तारीख नहीं बतायेंगे. आ भारते ना पूरा दुनिया देखल कि भगवान श्रीराम के भव्य (अबहीं निर्माणाधीन) मन्दिर में उनुका नूतन विग्रह के प्राण-प्रतिष्ठा कवना शानदार विधि-विधान से हो गइल.

अगिला चुनौती दीहल जात बा कि देश में समान नागरिक कानून ना ले आवल जा सके. आ अब त इहो कहात बा कि अब देश में चुनाव करावे के जरूरते ना पड़ी. विपक्षियन के इतिहास देखत कहल जा सकेला कि इहो चुनौती निपटा दीहल जाई.

आ अतना त हमहूं कहब कि अगर अबकी बेर वोट डाले में गलती कर दिहलसि देश त फेर उद्धार ना हो पाई देश के. काहे कि विपक्षियन के एक सूत्री लक्ष्य बा कि सनातन के खतम कर दीहल जाव, हिन्दूत्व के विनाश क दीहल जाव. एहसे कवनो लोभ लालच, जाति धर्म सम्प्रदाय का झगड़ा में नइखे पड़े के आ चुपचाप फूल छाप पर छाप आवे के बा.

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