चइती गीत – सैंया बिना लागे नाहीं मनवा हो रामा
  • लाल बिहारी लाल

सैंया बिना लागे नाहीं मनवा हो रामा,
चइत महिनवा, हो चइत महिनवा.
सुना-सुना लागे ला भवनवा हो रामा,
चइत महिनवा, हो चइत महिनवा.

बगिया में बोलेले, जब जब कोइलिया,
बगिया में बोलेले, जब जब कोइलिया,
जीयरा में हूक उठावे हो रामा,
चइत महिनवा, हो चइत महिनवा.

महुआ बीनन हम, जब जब जाईं,
महुआ बीनन हम, जब जब जाईं,
हमके सतावे मदनवा हो रामा,
चइत महिनवा, हो चइत महिनवा.

कइसे कहीं आपन दिलवा के बतिया,
केसे कहीं आपन दिलवा के बतिया,
तनिको ना कुछुओ, बुझाए हो रामा,
चइत महिनवा, हो चइत महिनवा.

लाल बिहारी पिया, अब घरे आवऽ,
रही रही जीयरा के जनि तड़पावऽ,
आके पुरावऽ दिल के सपनवा हो रामा,
चइत महिनवा, हो चइत महिनवा.

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