दिल्ली में मेहरारुन के दुर्दशा

दिल्ली के भोजपुरी मैथिली अकादमी द्वारा आयोजित नाट्य समारोह में महापंडित राहुल सांस्कृत्यायन के लिखल भोजपुरी नाटक “मेहरारुन के दुर्दशा” के मंचन करावल गइल. नाटक के एगो पात्र के सवाल रहे, “ऐ यशोधरा जानत हऊ, सनातन काल में कितने मेहरारून (स्त्री) सती के नाम पर बलि चढ़ी? कितने? डेढ़ अरब…का…!” हर साल १० लाख मेहरारून के बलि सती का नाम पर डेढ़ हजार साल तक चढ़ावल जात रहल. ई देखावत बा कि समाज में मेहरारुवन के कतना दुर्दशा होत रहल बा.

रंगश्री संस्था के नाटककार महेंद्र प्रताप सिंह आ उनुकर टीम एह नाटक का माध्यम से समाज में औरतन के हालात बयान कइलसि. अकादमी के सचिव प्रोफेसर रविंद्रनाथ श्रीवास्तव कहलन कि आजु से ६०-७० साल पहिले राहुल सांकृत्यायन मेहरारुन के दशा पर जवन लिखले तवन आजुवो बरकरा बा. आजु के राजनीति काल्हु प्रासंगिक ना रही बाकिर काल्हु के साहित्य आजुवो प्रासंगिक बा आ काल्हुओ रही. रामचरित मानस एहकर बेजोड़ उदाहरण बा.

नाट्य उत्सव में विशिष्ट अतिथि का रूप में शामिल भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजीत दुबे के स्वागत मैथिली-भोजपुरी अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. गिरीशचंद्र श्रीवास्तव फूल के गुलदस्ता देके कइले. अजीत दूबे कहले कि ऊ समाज कबहू जिन्दा ना रह सकी जे अपना भाषा आ संस्कृति से प्यार ना करत होखे. कहलन कि मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का सहयोग से मैथिली-भोजपुरी अकादमी के स्थापना भइल रहे आ अब एह समाज के लोगन के कर्तव्य बा कि ऊ लोग अपना भाषा के विकास में महती योगदान देव.


(स्रोत – देवकान्त पाण्डेय)

निर्देशक महेन्द्र प्रताप सिंह के स्वागत करत अजीत दुबे

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