बुड़बक बुझावे से मरद

भउजी हो !

का बबुआ ?

बोलला आ कहला में का अन्तर होला ?

उहे जवन पढ़ला आ समुझला में होला !

तोहरा एही आदत से हम परेशान रहिलें, सवाल पूछब त ओकरा जवाब में एगो दोसरे सवाल टाँक देबेलू.

हम त सवाल पूछनी हऽ ना. हम त रउरा बात के जवाबे दिहनी ह कि बोलला आ कहला में उहे फरक होला जवन पढ़ला आ समुझला में होला. बाकिर रउरा के समुझावे खातिर हमरा तनिका आसान तरीका से समुझावे के पड़ी. त जान लीं कि जवन बोलल जाला तवना में आवाज होला आ आवाज सुने खातिर कवनो खास योग्यता के जरुरत ना पड़े. बाकिर जवन कहल जाला तवना में कुछ कहानी होला, ओकर कुछ मतलब होला, आ कहलका समुझे खातिर दिमाग लगावे के पड़ेला. ठीक एही तरह बोले में दिमाग खरच ना होखे बाकिर कहे में दिमाग लगावे के पड़ेला. पढ़े खातिर त लिखलका भा छपलका के सभे पढ़ लेला जेकरा वर्णज्ञान होखे. बाकिर ओकरा के समुझे में दिमाग लगावे के पड़ेला.

अगर एकरा के राजनीतिक भाषा में बतावल जाव त पप्पू के बोले त आवेला बाकिर कहे ना आवे. जवने मुँह पर आ जाव तवना के ऊ उलटी कर देलें. अपना बोले के कहे में बदले के योग्यता उनुका लगे हइए नइखे. जवन लिखल होला तवना के पढ़ल त ऊ बढ़िया से जानेलें बाकिर ओकरा के समुझे के कोशिश करबे ना करसु. आ केहू उनुका के एह बात के समुझावे के हिम्मते ना राखे.

ठीके कहत बाड़ू भउजी. बाकिर सुनले त तुँहू होखबू कि बुड़बक बुझावे से मरद ! आ उनुका गोल में अइसन मरद शायद केहू नइखे.

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