भोजपुरी के सामाजिक-मनोवैज्ञानिक उपन्यास हवे ‘भँवरा’: प्रो.आरडी राय

भोजपुरी के सामाजिक-मनोवैज्ञानिक उपन्यास हवे ‘भँवरा’: प्रो.आरडी राय

नर्वदेश्वर सिंह ‘मास्टर साहब’ के लिखल उपन्यास ‘भँवरा’ भोजपुरी के ‘सामाजिक मनोविज्ञान के उपन्यास’ हवे. एकरा में देसज आ आंचलिक शब्दन के बहुतायत का बावजूद मास्टर साहब अद्भुत ढंग से भँवरा के चरित्र रचले बाड़न. एह उपन्यास के हिंदी समेत अउरिओ भाषा में अनुवाद करवावल जाय त ई अउर बेहतर रही.

ई विचार गोरखपुर विश्वविद्यालय हिंदी विभाग के विभाध्यक्ष रह चुकल प्रो. आरडी राय के हवे. ऊ अतवार का दिने गोरखपुर जर्नलिस्ट प्रेस क्लब सभागार में साहित्यिक सांस्कृतिक संस्था भोजपुरी संगम के तत्वावधान में आयोजित लोकार्पण समारोह में उपस्थित साहित्यकारन के संबोधित करत रहलन. कार्यक्रम के अध्यक्षता विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के अध्यक्ष रहल प्रो. बनारसी त्रिपाठी कइलन. संचालन के दायित्व भोजपुरी के पोढ़ कवि चंदेश्वर परवाना निभवलन.

कार्यक्रम के शुरुआत चंदेश्वर परवाना के सरस्वती वंदना से भइल. एकरा बाद आइल अतिथियन के अंगवस्त्र देके सम्मानित कइल गइल. “भँवरा” के लोकार्पण का बाद फाजिलनगर, कुशीनगर से पधारल पोढ़ कहानीकार सत्य प्रकाश शुक्ल आपन समीक्षा रपट पेश करत कहलन कि लेखक विवाहविच्छेद से उपजे वाली आज के सर्वाधिक ज्वलंत समस्या पर आपन कलम चलवले बाड़न, आ एकर स्वागत होखे के चाहीं. कहलन कि एह रचना में आइल संवादन के अउऱ भावप्रवण बनवला के जरुरत रहल.

अपना संबोधन में प्रो. राजेश मल्ल लेखक नर्वदेश्वर सिंह ‘मास्टर साहब’ के बधाई देत कहलन कि एह उपन्यास में भोजपुरी के करीब करीब बिला चुकल मुहावरन के बहुते सटीक ढंग से प्रयोग भइल बा. प्रो. मल्ल लेखक के एह कृति में जगहे जगह आइल आकस्मिक घटननो से सचेत रहे के सलाह दिहलन.

कुशीनगर से पधारल कवि बृजेश कुमार त्रिपाठी अपना संबोधन में लेखक के भोजपुरी गद्य के विकास यात्रा में दमदार उपस्थिति दर्ज करववला ला बधाई दिहलन.

प्रो. आद्या प्रसाद द्विवेदी एह कृति के भूरि भूरि प्रशंसा करत कहलन कि ई उपन्यास नारी संघर्ष आधारित भोजपुरी उपन्यासन के कडी में शामिल ग्रंथ बावे. एहमें कथारस भरपूर बा.

कार्यक्रम अध्यक्ष प्रो. बनारसी त्रिपाठी के कहना रहल कि “भँवरा” में हमनी के आसेपास के कहानी बा, जवना के अद्भुत ढंग से लेखक पेश कइले बाड़न.

कार्यक्रम के आखीर में “भोजपुरी संगम” के संरक्षक इं. राजेश्वर सिंह सभे ला आपन आभार जतवलन.

कार्यक्रम में उपस्थित साहित्यकारन में डा. जेपी नायक, वीरेंद्र मिश्र दीपक, धर्मेंद्र त्रिपाठी, सृजन गोरखपुरी, चंद्रगुप्त शर्मा अकिंचन, अरविंद अकेला, अवधेश नंद, भीम प्रसाद प्रजापति, आ गोरखपुर प्रलेस के महासचिव भरत शर्मा, रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी, शशिविंदु नारायण मिश्र, अभिमन्यु पांडेय, वागेश्वरी मिश्र वागीश, भोजपुरी संगम के संयोजक कुमार अभिनीत, अरुण ब्रह्मचारी, दिनेश गोरखपुरी, राम सुधार सिंह सैंथवार, राम समुझ सांवरा, सत्यनारायण पथिक समेत छह दर्जन से अधिका लोग प्रमुख रहल.

 

0 Comments

Submit a Comment