
आज कल फिर वही माहौल बनाया जा रहा है. माता सीता निर्दोष थी मगर एक नागरिक के आरोप मात्र से राजा राम ने अपने रामराज्य की छवि बनाए रखने के लिए माता सीता को निर्वासित कर दिया था. लक्ष्मण सहमत नहीं होने के बावजूद अपने बड़े भाई के निर्णय का पालन करते हैं और माता सीता को वन में निर्वासित छोड़ आते हैं.
राजा राम की छवि पर लगा यह ऐसा कलंंक है जिसको आज तक मिटाया नहीं जा सका है. अगर सीता दोषी होतीं, उनुका दोष सिद्ध हो जाता, तब उनको मिली हर सजा न्याय मानी जा सकती थी मगर राजा राम अपने कर्तव्य का पालन नहीं कर पाए.
पिछले दो दिन से सेबी प्रमुख माधवी पुरी बुच को कुछ ऐसे ही आरोपों का सामना कर पड़ रहा है. बिना मतलब बवाल करने वालों को यह स्पष्ट कर देना जरुरी है कि मैं माधवी बुच की तुलना माता सीता से नहीं कर रहा. बस उनकी समस्या में साम्य रहने के कारण ऐसा उदाहरण देना पड़ा.
आईआईएम अहमदाबाद से स्नातकोत्तर ऊपाधि रखने वाली माधवी बुच अप्रैल 2017 से सेबी से जुड़ी हुई हैं. पहले उन्होंने तात्कालीन अध्यक्ष अजय त्यागी के साथ काम किया और बाद में उन्हें सेबी प्रमुख पद पर नियुक्त कर दिया गया. 1 मार्च 2022 को उन्हें यह पद भार मिला.
अपने कार्यकाल में माधवी पुरी बुच ने कई महत्वपूर्ण फैसले लिए, बहुतों को नाराज किया. सहारा समूह पर निवेशकों के 14000 करोड़ रुपये लौटाने का आदेश उन्हीं ने दिया था. उनके ही कार्यकाल में शेयर बाजार में निवेशकों के हित में बहुत सारे फैसले लिए गये. पहले सौदा निपटान होने में तीन दिन लग जाते थे, अब अगले दिन ही नहीं कई मामलों में उसी दिन सौदों का निपटान हो जाता है. माधवी बुच ने कई ऐसे फैसले लिये जो निवेशकों के हित में होने के बावजूद रिटेलरों के हित में नहीं माने गए. फ्यूचर और आप्शन ट्रेडिंग से आम निवेशकों, या खुदरा निवेशकों, या छोटे निवेशकों को सावधान करना बहुत मगरमच्छों को पसन्द नहीं आ रहा. टीवी चैनलों पर निवेश सलाह देने वालेे कुछ सलाहकारों पर आर्थिक दण्ड लगाना बड़े चैनलों को पसन्द नहीं आए. मौका देख ढके छिपे तरीके से वे चैनल अपना गुबार निकाल भी रहे हैं.
एक विदेशी निवेशक है जो शेयरों के मूल्य में गिरावट के हालात बना कर अपना लाभ कमाता है उसे माध्यम बना कर देश विरोधी ताकतें भारत की अर्थव्यवस्था को पलीता लगाने में व्यस्त हैं. पिछले साल उसने अडानी समूह पर गलत तरीके से व्यापार गतिविधि चलाने का आरोप लगा कर अच्छी खासी कमाई की या अपने गिरोह में शामिल लोगों को कमाई करवाई. उसी की सलाह के बाद एक चाइनीज कंपनी ने अडाणी समूह के शेयरों में आई गिरावट का भरपूर फायदा उठाया था.
दुर्भाग्य यह है कि अपने देश के भी कुछ लुच्चे-लफंगे उसी का सहारा ले कर देश को बरबाद करने की साजिश में शामिल हैं. नेता प्रतिपक्ष ने भी मांग की है कि माधवी बुच को पद से हटाया जाय. मगर इन विघ्नसंतोषियों का दुर्भाग्य कि देश के समझदार निवेशकों ने आज इस साजिश को नाकाम कर दिया. जो मामूली गिरावट आज दर्ज हुई वह आम दिनों की तरह की ही रही.
मुझे दुख इस बात का भी है कि कुछ सही सोच वाले लोग भी आदर्श पालन करने की मिथ्या धारणा बना कर माधवी बुच के त्यागपत्र की मांग कर रहे हैँ. कौरव सभा में जब द्रौपदी का चीरहरण करने का कुत्सित प्रयास हो रहा था तो भीष्म पितामह जैसेे लोगों की चुप्पी से इसकी तुलना करना गलत नहीं होगा.
पर संतोष की बात है कि आज निवेशकों की समझदारी नें इस साजिश को नाकाम कर दिया. मोदी सरकार भी इस झाँसे से बची हुई है अबतक. अबतक इस लिए लिखना पड़ रहा है कि मोदी सरकार में इतना साहस आज तक नहीं आ पाया कि राहुल गाँधी की नागरिकता के प्रश्न का उत्तर दे सके. अगर नागरिकता सही है तो वही एलान कर दे, अगर नागरिकता गलत है तो उस हिसाब से फैसला कर दे. मगर इस कायर सरकार से इसकी अपेक्षा रखना अपनी बेवकूफी होगी.
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