पिछला हफ्ता उत्तरप्रदेश विधानसभा में सरकार घोषणा क दिहलसि कि अबसे विधानसभा में भोजपुरी, अवधी, बुन्देली, आ ब्रज भाषा में विधायक आपन बात कह सकेलें.
सरकार के एह घोषणा के स्वागत हो रहल बा बाकिर कुछ जन्मजात विरोधी लोग के एकरो से शिकायत हो गइल बा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी कहनी कि विरोधियन के सुभाव बन गइल बा कि सरकार के सहियो काम के विरोध करे लागेलें. एकर भर्त्सना होखे के चाहीं.
सरकार के एह फैसला के अनुमोदन विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना क दिहनी आ कहनी कि विधानसभा में एह चारो भाषा – भोजपुरी, अवधी, ब्रज, आ बुन्देलखण्डी – में दिहल संबोधनन के अनुवाद के व्यवस्था क दीहल गइल बा.
बहुत पहिले अंजोरिया पर सांसदन आ विधायकन से निहोरा कइल गइल रहुवे कि ऊ सदन में आपन बाति अपना माई भाषा में कइल करसु. विधायी स्थिति इहे बा कि हिन्दी में आपन बात राखल जा सकेला. सरकार भोजपुरी, राजस्थानी, अवधी वगैरह भाषन के हिन्दी के बोली मानेले आ इहे बहाना बना के भोजपुरी आ राजस्थानी कि संविधान के आठवीं अनुसूची में शामिल करे से कतरा जाले. त ओकरे बात मानत भोजपुरी इलाका के सांसदन आ विधायकन के चाहीं कि सदन में ऊ आपन बात अपना भाषा में कहे के जिद्द ठान लेसु.
यूपी सरकार के एह फैसला का बाद बलिया जनपद के बांसगांव क्षेत्र के विधायिका केतकी सिंह आपन भाषण भोजपुरी में क के इतिहास रच दिहली. उनुकर अभिनन्दन बा.
रउरो सभे केतकी सिंह के ओह भाषण के सुन के खुश होखीं आ मनाईं कि अउरिओ सांसद आ विधायक एह राह पर चलल शुरु कर देसु.
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