ताती ताती पुरिया घीव में चभोरिया

– – डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

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सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-16
आइल भोजपुरिया चिट्ठी

ताती ताती पुरिया घीव में चभोरिया

आजु काकी बहुत उत्साह में लउकली. छोट-छोट बच्चन के अँखमुदउअल का खेल में निर्णायक का भूमिका में रहली. उनुकर काम रहे कि चारू ओर नजर राखसु कि केहूँ बइमानी जनि करो. एही में दू गो लइका झगरि गइले सन कि फलाना आँखि खोलले रहले, एही से हमरा के ध लेले हा. एही बीचे लभेरन पहुँच गइले. ऊहो कहले कि कुछ खेल गीत सुनाव लोग. काकी कहली कि भोजपुरिया लोगन के खेल गीत का बारे में तूहीं कुछु बताव. अब तक सभ लइको आपन खेलल छोड़िके कहानी सुने खातिर बइठि गइल रहलन स.

लभेरन कहले कि खेल-कूद अइसहीं हँसी–मजाक में लेबेवाली चीज ना हटे. ई लोक-संस्कृति के प्रधान अंग हटे. साँच त ई बा कि कवनो देश के खेल-कूद का अध्ययन से ओहिजा के निवासी का सुभाव, साहस आ ताकत के पता चलेला. ओइसे त देश का हर क्षेत्र में खेल गीत लोकप्रिय बा, बाकिर भोजपुरिया लोगन का खेल गीत के का कहे के!

एकर सबसे कम उमिरि का बच्चन खातिर खेले जाएवाला खेल गीत ‘घुघुआ मामा’ आजुओ महतारी लोगन के बहुत प्रिय बाटे.

घुघुआ मामा

एह खेल में बच्चा के केहूँ आत्मीय अभिभावक के संग जरूरी हो जाला. बहुत छोट लइकन के ई खेल ह. खेलावेवाली बिछवना पर चिते लेट जाली आ अपना ठेहुना के, ऊपर का ओर मोरि के लइका के पंजा पर बइठा लेली आ बार-बार अपना ठेहुना के ऊपर-नीचे करेली. एह घरी ऊ सङे-सङे गावत रहेली-

घुघुआ मामा उपजसु धाना
ओही मूकी आवेले बबुआ के मामा
बबुआ के नाक कान दूनो छेदवइबो
सोनरा के देबो भर सूप धाना
सोनरा के पुतवा दीही असीस
बबुआ जीहें लाख बरीस

रेलगाड़ी के खेल

तनी बड़ भइला पर रेलगाड़ी के खेल भी पहिले बहुत लोकप्रिय रहे. ओकर बोल रहे-

माल बाबू माल बाबू, टिकट कटाइ द
पटना से गाड़ी आइल, सिगनल गिराइ द.

ओका बोका

बड़ भइला पर के ‘ओका बोका’ के खेल बड़ा नीक लागेला. एकरा में कुछु लइका एक साथे बइठ के अपना दूनों हाथ के मुठ्ठी बान्हि के जमीन पर राखेले सन. फेरु ओह दल के नेता एक-एक लइका का हाथ के छूअत ई गीत गावेला-

ओका बोका तीन तड़ोका
लउवा लाठी चंदन काठी
बाग में बगउवा डोले
सावन में करइली फूले
ओ करइली के नाँव का?
इजवा बिजवा पानवा फुलवा
ढोंढ़िया पुचुक.

पहिले ई अगुआ बच्चा ‘ओका’ कहिके लइका का एगो हाथ के छूवेला आ फेरु ‘बोका’ कहिके ओकरा दोसरा हाथ के छूवेला. अइसन लागेला जइसे ऊ हाथ के गिनती करत होखो. हर बार ऊ अइसहीं बोलिके गिनती करेला आ ‘पुचुक’ शब्द कहिके ऊ कवनो बच्चा का हाथ के जमीन पर पचका देला.

तार काटो तरकुल काटो

अइसहीं एगो दोसरा खेल में कुछ लइका एक सङे बइठ जाले सन. एगो लइका दोसरका लइका का गोड़ के अंगूठा अपना बाएँ हाथ का मुट्ठी से पकड़ेला. एकरा बाद दोसर लइका ओकरा मुठ्ठी का ऊपर अपना हाथ के मुट्ठी धरेला. फेरु ऊहे लइका अपना दहिना हाथ के तलवार मानिके ओह मुट्ठियन के ई गीत गावत-गावत काटेला-

तार काटो तरकुल काटो, काटो रे बनखाजा
हाथी पर के घुघुरा चमकि चले राजा.
राजा के रजइया अवरू बाबू के दुपाटा
ईचि मारो, खींचि मारो, मूसर अइसन बेटा.

अंत में ऊ मुट्ठिन का कड़ी के तूरि देला. अइसहीं “चिउँटा हो चिउँटा, मामा के गगरिया काहें फोरलऽ हो चिउँटा” खेल त कहीं शुरू हो जात रहे.

कबड्डी

अतना पर काकी कहली कि कबड्डियो में त कुछ बोलल जाला. लभेरन हामी भरले. ऊ बोलले कि ईहो खेले गीत में आई. एकर खेलाड़ी दू भाग में होलन आ दूनों दल का बीच में एगो रेखा खींच दिहल जाले. एक पक्ष के खेलाड़ी दोसरा पक्ष का खेलाड़िन के छूके अपना दल में लवटि जाला. दोसरा दल में पढ़ावे जात खा लइका कवनो छोट-मोट तुकबंदी गावत रहेले सन. जइसे,

1. आव तानी हो, परइह जनि हो
टाँग जाई टूटी, कपार जाई फूटी
लड़िकपन छूटी.

2. ए कबड़िया आईंले, तबला बजाईंले
तबला में पइसा, लाल बगइचा.

3. आम छू, आम छू, कउड़ी झनक छू
आम छू, आम छू कउड़ी बदाम छू. .

ताती ताती पुरिया

एक सङे बइठि के लइकन का खेलेवाला खेल में ईहो खेल बहुत प्रसिद्ध बाटे. एह घरी के गीत बच्चा-बड़ सभ का जुबान पर रहेला.

ताती ताती पुरिया घीव में चभोरिया
हम खाईं कि भउजी खाई
कान धरि ममोरिया.

घुमरी परउआ

बरसात का शुरुआती दिनन में जब चारू ओर से आन्ही-पानी के आगम बुझाए लागी त लइकन के दल अपना दुआर पर भा खेत-बधार में घुमरी परउआ खेले लगिहें सन. ओह घरी ऊ गइहें सन-

आन्ही बूनी आवेले, चिरइयाँ ढोल बजावेले,
बूढ़ी माई हाली-हाली गोइँठा उठावेले,
एक मुठी लाई दमाद फुसिलाई,
बूनी ओनहीं बिलाई, बूनी ओनही बिलाई.

आजु त लइकन के बचपन मोबाइल आ विद्यालयन का नया-नया प्रोजेक्ट में अझुरा के रहि गइल बा, उहनी के एह खेल गीतन के आनंद कहाँ से मिली? लभेरन का सङे-सङे काकियो के मन उतर गइल रहे.
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संपर्क : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल, निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, देवनगर, पोल नं. 28
पो.- मनोहरपुर कछुआरा, पटना-800030 मो. 9831649817
ई मेल : rmishravimal@gmail.com

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अइसने एगो रचना अंजोरिया डॉटकॉम पर ई जनवरी 2004 में अंजोर भइल रहल. ओकरो के देख पढ़ लीं सभे –
बालापन के छन्द

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