हमनी के सऽमत बदलेला चइत में

–डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

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सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-21
आइल भोजपुरिया चिट्ठी

हमनी के सऽमत बदलेला चइत में

नया साल…नया साल सुनि-सुनिके काकी पाकि गइल रही. लाख समुझावसु, केहू सुने खातिर तेआरे ना रहे. आजु-काल्हु पता ना कइसन पढ़ाई-लिखाई चलि गइल बा कि लइका-फइका माने में नइखन स. अइसहूँ बूढ़-पुरनिया तनी जल्दिए खिझिया जालन लोग बाकिर जिनिगी भर का अनुभव के केहूँ अनदेखा कइ के निकलि जाई त अनस त बरबे नु करी. काकी घर परिवार का सभे लोग से अनराज रही. आपन माटी जब अनगराहित लागी आ अनका के माटी सोना त कवनो जिमवार मनई कइसे चुप रही भला?

काकी लभेरन के सनेस पठाके बोलवली. आवते पुछली – का हो लभेरन, तूहूँ पहिल जनवरी वाला नया साल मनावेलऽ?

लभेरन आपन चद्दरि सम्हरले, कउड़ा में आँच कड़ा हो गइल रहे. बोलले – ना काकी, ई त अङरेज लोग के उत्सव हटे. हमनी किहाँ त देखादेखी नू चलेला! एहिजा उत्सव से अधिका फैशन ढेर धुमगाजर मनावेला. पहिल जनवरी के अंतर्राष्ट्रीय बरिस मानिके खूब कूदे-फानेला लोग आ पइसा उड़ावेला लोग आ आपन परब-तेवहार आवेला त नाकि-भउँ सिकोरे लागेला लोग, मीन-मेख निकाले लागेला लोग. जानऽतानी काकी, ई कुल्हि दुरगुन हिंदिए बेल्ट में बा. दक्षिण भारत से बंगाल तक चलि जाईं, ओहिजा अपना क्षेत्रीय संस्कृति के नया साल पहिल जनवरी से बहुत अधिका धूमधाम से मनावल जाला. बंगाल का लोगन के त हम देखले बानी कि कतना निष्ठा से ‘पोइला बइसाख’ (नया साल) मनावेला लोग. ओह दिन त अगल-बगल का दोकानिए का परसाद से पेट भरि जाई आ आस-परोस का घर से जवन थारी आई तवन त अलगे बा. हमनी के उत्सव मुख्य रूप से खाहीं-पिए के नु हटे! हमनी का उत्सव में वर्जित खान-पान के त सख्त मनाही होला बाकिर अंगरेजी नया साल के शुरू होखते देखब, अंगरेजी पी-पी के जगहे जगह घुलटल लउकी लोग. जहाँ पिकनिक स्पॉट होई, ओइजा चारू ओरि मुर्गा के नोचाइल पाँखि मिली. ईहे फरक हटे संस्कृति के. ओहिजा के संस्कृति हमनी का संस्कारे पर वार करेले, जबकि हमनी के संस्कृति हमनी का संस्कार के बँचावे के काम करेले.

काकी टुभुकली – हमरा आजु ले ई ना बुझाइल कि राति सूते खातिर बनल बिया. आधा राति का बाद भूत-प्रेत आ राछछ के बेरा मानल जाला, हमनी का सुतते ई लोग जागि जाला आ फजीर भइला से पहिलहीं पटा जाला. हमनी के मए परब-तेवहार दिन में मनावल जाला, नीमन-नीमन पकवान बनेला आ लोग अपना किहाँ भा अनका किहाँ छूटिके खालन. मानऽतानी कि अङरेजी कलेंडर बारह बजे रातिए खा बदलि जाला, बाकिर हमनी किहाँ लोग अधरतिये नया साल मनावे खातिर काहें बेयाकुल हो जाला? सनातन धर्म का खास परब में खिचड़ी आ फगुआ के मानल जाला बाकिर राति खा तिथि अइला का बादो उपयोगिता आ सुविधा के ध्यान में राखिके भोर भइला का बादे शास्त्र मनावे के आदेश देला.

लभेरन ‘हूँ’ करत मूड़ी हिलवले. कउड़ा में धुँआ ढेर होखे लागल रहे. एहसे आपन जगहि बदलत बोलले – एकदम ठीक कहऽतानी काकी! आजु-काल्हु बर्थ डे मनावतो खा लोग राति भर उल्लू नियन जागऽतारन. जेकर बर्थडे दिन में मनावे के पलान कइल गइल होला, ओकरो के राति भर फोन क कके पगला देला लोग, दिन में त बेचारा के दिन भर जागहीं के बा. अतना परेशान भइला का बादो लोग काहें पछिमे वाला संस्कृति का पीछे भागेलन, ई समझ से बाहर के बात बा.

काकी बोलली – आच्छा ई बतावऽ कि जब हमनी किहाँ आधा रात होले त अङरेजन किहाँ भोर होला का?
लभेरन बोलले – ना त! ओह घरी इंग्लैंड में साँझि होले आ अमेरिका में दुपहरिया. ओह घरी भोर होला त जापान आ रूस में, जहाँ अङरेजी ना बोलल जाव.

काकी मुसकइली – अब बुझलऽ? ओह घरी इंग्लैंड आ अमेरिका का नया साल मनावे में कवनो परेशानी कइसे होई, सभ जागले रहेला, एकदम टनाटन. आ हमनी किहाँ…देखा-देखी गोहि बिअइली पाड़ा. तूँ भलहीं जगला में मनावऽ, हम सुतबे ना करबि, हमहूँ मनाइबि, भलहीं टोला-परोस के लोग उफर परो. बाँचल-खुँचल लोगन के जगावे खातिर टीवी-मोबाइल त बड़ले बा.

काकी के मन अब ले मुरझा गइल रहे. हमनी के सऽमत बदलेला चइत में. हमनी किहाँ त सऽमत जरला का अगिले दिन से उत्सव के शुरुआत हो जात रहे. होलिका दहन का बिहाने होरी माने फगुआ. पूरा एक पख (पंद्रह दिन) के उत्सव नया साल का अगवानी में होखत रहे. होली में मए बैर भाव भुलाके रंग लगवला से गीत-गवनई तक के सकारात्मक भाव के प्रबल करे वाला सभ काम सामाजिक एकता का सुरक्षा खातिर कइल जात रहे. ई एहसे होखत रहे ताकि हर तरह के नकारात्मक भाव पहिलहीं खतम हो जाउ आ नवरात्र से शुरू होखेवाला नया साल में पूजा-पाठ कइके, शक्ति के आराधना कइके बरिस भर खातिर शक्ति अर्जित कइल जा सके.

लभेरन जोरले – नया बरिस के सुभारंभे उपवास, फलाहार आ सात्विक भोजन से होला. घर-घर चंडीपाठ होला, चारू ओर दुर्गापूजा के माहौल! ‘शांति आ न्याय का प्रतिष्ठा खातिर अन्याय का वध के आदर्श मानल’ सनातनी लोग के वीरता वाला स्थायी भाव हटे, जवन उनकर चरित्र आ सुभावो हटे.

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संपर्क : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल, निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, देवनगर, पोल नं. 28
पो.- मनोहरपुर कछुआरा, पटना-800030 मो. 9831649817
ई मेल : rmishravimal@gmail.com

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