–डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल
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सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-22
आइल भोजपुरिया चिट्ठी
लइका के छुअबि ना जवान हमार भाई

काकी अपना नाति-नातिन का सङे आगि तापि रहल बाड़ी. उनुकर बड़की पतोहि बीच-बीच में कबो गोइँठा त कबो करसी बोरसी में डाल देतारी. कबो धुँआ ढेर हो जाता त लइका छटपटाके आँखि मीसत उठि जातारे सँ आ जइसहीं बजड़ा के पीटल बालि फनफना के जरे लागतिया त फेरु हाला करत, एक दोसरा के बोलावत दउरि के आके आगि तापे लागतारे सन.
एही में पड़ोस के सोतिया फुआ आ गइली. छव बरिस पर ऊ नइहर आइल बाड़ी. कहतारी कि काकी, एहिजा त सब कुछ बदलि गइल बा. ढेर लोग का मकान में पलस्तर-पेंट हो गइल बा आ केहूँ धुँआ-धुकुरि पसन्न नइखे करत. बोरसी आ कउड़ा के त दरसने दूलम हो गइल बा. ठंढा ओइसहीं बढ़त जाता. बिजली के बिल त आसमान छुअता, का केहूँ हीटर आ ब्लोअर चलाई? राउर घर ठीक बा. एहिजा बोरसी आ कउड़ा पर केहूँ छी-मानुख करेवाला नइखे लउकत. जाड़ त अइसन हाड़ छेदता कि मति पूछीं. कहीं ठौर नइखे. कब तक केहूँ रजाई में बइठल रही?
तलके काकी के छोटकी पतोहि आके फुआ के गोड़ छूके गोड़ लगलसि. सोतिया फुआ एकदम गदगद हो गइली. “काकी, रउरा घर के संस्कार अबहिंयो बनल बा. राउर दूनो पतोहि लछनमान बाड़ी सन. ” अतना कहत-कहत में बड़कियो पतोहि हाजिर हो गइली. ऊ फुआ के गोड़ लागिके एगो थरिया में तिलवा आ मेथी दिहली. फुआ के त रोंआ-रोंआ खुश हो गइल. गाँव में अबहिंयो दिल खोलि के निभावेवाला शिष्टाचार बाकी बा…! ऊ त जइसे अपना पहिले का टाइम में खो गइली.
अतने में लभेरनो दाँत कटकटावत पहुँचि गइले. सिसियात हाथ सेंके लगले. असो त ठंढा हदे क देले बा काकी. सभ कहता कि बहुत दिन का बाद अइसन जाड़ आइल बा. अब तक लइकन के दल नहाए-खाए खातिर उठिके चलि गइल रहे. लभेरन फुओ के हाल-चाल पुछले- बड़ा दिन पर लउकलू फुआ, घर में सभ कुशल-मंगल बा नू? फुआ आपन सर-समाचार बतावतते रही कि काकी लभेरन का हाथ में अखबार देख लिहली- देश-दुनिया के कुछ नया समाचार सुनाव लभेरन. राजनीति के समाचार बाद में, पहिले मौसमे के हाल सुनाव.
लभेरन पेपर पढ़े लगले- “मौसम विज्ञान केंद्र त अगिला एक सप्ताह तक कड़ाका के ठंढ आ घना कोहरा के चेतावनी जारी कइले बा. सड़क आ रेल यातायात का सुरक्षा के ध्यान में राखिके वाहन चालक लोग के सावधानी से गाड़ी चलावे आ सुरक्षा निर्देशन के पालन करे के सलाह दिहल जात बा. धुंध का बढ़ला के बरियार असर रेल आ हवाइयो यातायात पर पड़ रहल बा. ट्रेन आ फ्लाइट अक्सर लेट हो रहल बाड़ी सन. लोग-बाग ठिठुरि के घर में दुबकल बाड़न. पहाड़ पर लगातार बर्फबारी हो रहल बाइ, एहसे मैदानी इलाकन में सितलहरी जनजीवन के मुश्किल बना देले बिया. ”
काकी लंबा साँस लेत बोलली- “जाड़ा के ऋतु कवनो आजु नया थोरे बिया? हर साल आवेले आ पति साल हमनी का ओकरा से लड़े खातिर जुकुती निकालि लेलीं जा. बाकिर एक बात त तय बा कि जाड़ नया आदमी के ओतना ना सतावे जतना बुढ़वन के सतावेला. ” अतने में सोतिया फुआ हँसते-हँसत बोलली-
लइका के छुअबि ना, जवान हमार भाई
बुढ़वा के छोड़बि ना, कतनो ओढ़ी रजाई.
काकी कहली- एकदम ठीक कहतारू, ई सही कहाउत बा. लइकन के देखऽ, टन-टन दउरऽतारे सन. उहनी के कहाँ ओइसन ठंढा लागत बा? अङना में दउरा-दउरी कइले बाड़े सन, कहाँ केहूँ के कुछ सुनतारे सन? ठंढा उमिरिदारे लोगन के ढेर सतावेला. ” फुआ हुँकारी भरली.
काकी फेरु बोले शुरू कइली- तीन दिन से घामो त नइखे निकलत आ सुरुज भगवान उगतो बाड़े त घाम टाँठ नइखे होत. ऊपर से सितलहरी त अलगे हाड़ छेदऽतिया. लागता कि गोड़ अङरि के गिरि जाई. ” फुआ सुर में सुर मेरवली- “जानतानी काकी, तनिको खिरिकी खुलल रहि जाता त थरथरी लेसि देता, भलहीं कतनो रजाई आ कमरा ओढ़ले रहीं. भिनसहरा पिछुआरी निकलला प त अइसन साँइ-साँइ हवा मारतिया कि लागता देंहि अकड़ि जाई. ” काकी का मुँह से तुरते एगो कहाउत निकलि गइल-
जेठ के दुपहरिया, भादो के अन्हरिया
माघ के भिनसहरा, बुरबक निकले बहरा.
लभेरन कहले कि जाड़ के असली कारन ठंढा हवा हटे. कहल गइल बा कि –
माघे जाड़ न मेघे जाड़, जबे बयार तब्बे जाड़. बाकिर एहसे बाँचे के उपाइ त हमनी के पुरनिया निकालिए नु बाड़न लोग- रूई कि धुँई कि दुई.
लभेरन तनी गंभीर हो गइले- जानतानी सभे, बाड़ा बाँचे के जरूरत बा. ठंढा में बोरसी का चलते ढेर दुर्घटना हो रहल बाड़ी सन. राति खा कमरा बन्न कइके लोग बोरसी प आगि तापतारन आ आलस में बोरसिया घरे में जरते छोड़ि देतारन. अइसना में आक्सीजन कम भइला का चलते घर में कार्बन मोनोक्साइड भरि जाता आ घुट-घुट के परिवार के परिवारे साफ हो जाता.
काकी चिंतित होके पुछली- “त अइसना में का करेके चाहीं?” लभेरन कहले- एक त बन्न कमरा में आगि सुनगा के जनि तापीं आ जो तापतो बानी त खिड़िकी-केवाड़ तनिका जरूर खोलिके राखीं.
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संपर्क : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल, निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, देवनगर, पोल नं. 28
पो.- मनोहरपुर कछुआरा, पटना-800030 मो. 9831649817
ई मेल : rmishravimal@gmail.com

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