– टीम अंजोरिया
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मानक बनाम एकरूपता

बिर्हनी का छत्ता पर ढेेला मारल ना त हमार शौक ह ना सुभाव। बाकिर मजबूरी जरुर हवे। आ मजबूरिओ एगो जरुरी कारण से। आजु का दिन में भोजपुरी में चले वाली पहिलके ना सबले पुरानो वेबसाइट होखला का चलते हमार हमेशा से कोशिश रहल बा कि भोजपुरी के एगो मानक तईयार कइल जाव। बाकिर साहित्य आ व्याकरण से भवहि-भसुर वाला नाता रहला का चलते हम ई काम करिए ना सकीं। हमरा बस में बस अतने बा कि बड़का विद्वानन से निहोरा करत रहीं आ करतो रहिलें. बाकिर बड़का विद्वानन का लगे समय नइखे भा समय निकाले के कारण नइखे। तबहियों हम बेर-कुबेर चिरौरी करे से बाज ना आईं। आजु फेरू ई कीड़ा कुलबुलात बा त आजु के बतकुच्चन एकरे पर।
आ मथैला बनि गइल – मानक बनाम एकरुपता। मानक ऊ जे सभही माने आ सभका के एक लाइन पर ले आवे के ना त हमार औकात बा, ना बेंवत। बाकिर एकरूपता त हर मनई का बस में होला कि ऊ अपना लेखनी में, अपना विचारन में, अपना बतकही में एकरूपता बनवले राखे। इहां ले कि पप्पू का नाम से मशहूर हो चुकल एगो नेता अपना एकरूपता से बाज ना आवसु। मुद्दा चाहे रोज बदलि लेसु बाकिर एकरूपता ना छोड़सु!
त भोजपुरी भाषा में शुरु होखे वाला दुनिया के पहिलका वेबसाइट के प्रकाशक होखला का चलते ई हमरो जिम्मेदारी रहल कि अंजोरिया पर एकरूपता बनावल राखे के भरपूर कोशिश कइल जाव। एह क्रम में कई गो महान साहित्यकारन से मनभिन्नतो हो गइल त कुछेक लोग से ई मतभिन्नते ले सीमित रहल। जेकरा अंजोरिया के एकरूपता से मनभेद हो गइल ऊ आपन रचना अंजोरिया ला भेजल बन्द कर दिहलें। जिनका से मतभेद रहल उनुकर रचना आजुओ आवत रहेला आ हम ओकरा में कहीं कहीं कुछ बदलाव करे से बाजहूं ना आईं।
आदत का चलते आजुओ लिखत-लिखत मुख्य विषय से बहकिए गइनी। से अब लवटल जाव मानक आ एकरूपता पर। जइसे कि पहिलहूं लिख चुकल बानी कि मानक बनावल हमरा बस के बाहर के बाति बा बाकिर एकरूपता राखल त हमरा बस में बड़ले बा। बाकिर हम बेमतलब के जिद्द ना धरीं। अबहीं ले रउरा एगो बदलाव नजर ना आइल होखो त बतला देत बानी। हाल-फिलहाल ले हम पूर्ण विराम चिह्न अंगरेजी वाला बिन्दु लगावत रहीं। बाकिर जब से मानक हिन्दी के वर्तनी पढ़ लिहनी त दू दिन से संस्कृत वाला पूर्ण विराम चिह्न लगावल शुरु कर दिहले बानी।
भोजपुरी वर्तनी पर अबहीं तक के सबले आधिकारिक स्वर बा आचार्य विश्वनाथ सिंह जी के. अंजोरिया पर उहां के लिखल एगो लेख भोजपुरी दिशा बोध के पत्रिका पाती का सौजन्य से अंजोर कइले रहीं – भोजपुरी-वर्तनी के आधार। अगर अबहीं ले पढ़ले नइखीं ओह लेख के त आजु पढ़ लीं।
भोजपुरी लिखे पढ़े के कठिनाई आ काट लेख में डॉ प्रकाश उदय एह विषय के कुछ अलगे बाकिर प्रभावी तरीका से परोसले बानी। ओकरो के पढ़ लीं। आ सब कुछ पढ़ लिहला का बाद उनुके लिखल – हिन्दी के ‘खाता’ आ हिन्दी के ‘त्राता’ से रार पर मनुहार लेख रउरा के आनन्दित कर दी।
आ चलत चलत इहो बतावल जरुरी लागत बा कि भोजपुरी के बहुते शब्दन पर सैकड़न बार बतकुच्चन कर चुकल बानी। ओहनियो के पढ़े के समय निकालत रहीं बीच-बीच में।
आखिर में भोजपुरी के विद्वानन से एक बेर फेरु निहोरा कइल चाहत बानी के भोजपुरी के मानक बनावे ला जतने कोशिश हो सके करीं सभे।

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