तेलचट्टन का बहाने – बतंगड़ 110

आजु का बतंगड़ में हम तेलचट्टन का बहाने चोट्टन के राजनीति रेघरियावे के कोशिश करब। पता ना सफल होखब कि ना? काहे कि रउरा सभे त कुछ बताएब ना!
बाकिर चोट्टा राजनीति के नाम लिहला बिना हम तेलचट्टने के चरचा करब। पहिला त ई कि एहनी के तेलचट्टा काहे कहल गइल? का ई तेलँउस चीझु बतुसे खाले सँ? ना। तेलचट्टा कुछऊ चट्ट कर सकेलें सँ – जूठन, कबाड़, गोंद, मुअल जीव वगैरह। पता ना ई जीप, कोयला, आ तोप खाले सँ कि ना? रउरा का लागत बा कि जब ई कुछऊ खा सकेलें सँ त जीप, कोयला, तोप वगैरह के काहे छोड़ दिहें सँ1
तेलचट्टन कइसनो माहौल में जी सकेले सँ। बिना कुछ खइले, बिना कुछ पियले। ठीक चोट्टा राजनीति का तरह जे दशकन ले सरकार का बहरा रहला का बादो जीयत रहेलें सँ मौका के तलाश में। कबो त कवनो गंदा कोना भा कारनामा मिली जहाँ ई मौज कर सकीहें सँ। आ मौका मिलते एहनी के आबादी अतना तेजी से बढ़ेला कि रउरा अचरज में पड़ जाइलें। महज कुछ घंटा का भितरे एहनी के तादाद करोड़ों में गिनाए लागेला। बस मौका मिले के देर बा। मुख्य न्यायाधीश कुछ तेलचट्टन के शिकायत कइलन त देखते देखत सगरी तेलचट्टा बिलबिलात बाहर निकल अइले सँ। अब मारत रहीं रउरा हिट भा हीट। आ ई तेलचट्टा कवनो स्थाने विशेष पर ना पावल जालें। ई हर कस्बा, हर गाँव, हर शहर, हर राज्य, हर गोल, हर गिरोह में मिल जइहें। बस कतहीं खुलेआम कतहीं लुकाइल मौका के इंतजार में। जानकार बतावेलें कि एहनी के वोट बैंक वाला आवरण अइसन होला जवना पर आणविक विकिरणो के असर ना होखे। अलग बात बा कि तबहियों एहनी के मारे खातिर कवनो ना कवनो हीट निकलिये आवेला।
आ अइसन ना कि तेलचट्टा हर मौसम में जी सकेले सँ। सूखल आ ठंडा जगहन पर एहनी के दिक्कत होखेला। साफ सफाई एहनी ला मुसीबत होखेला। आ तेलचट्टन के लगातार मरत रहला का बादो एहनी के प्रजाति जिन्दा रहेले। काहें कि एहनी के जन्म दर भा फर्टिलिटी दर बहुते बेसी होखेला। चिरई-चुरुंग, बिछकुतिया भा छिपकिली, बेंग, मकड़ी, आ कुछ दोसरो जीव जन्तु एहनी के मार के खा जालें। आ आदमी भा सरकार एहनी के मारे खातिर तरह तरह के कीटनाशक, जाल, भा तौर तरीका निकालत रहेलें जेहसे एहनी के आबादी पर कुछ काबू पावल जा सके।
तेजी से बढ़त शहरी आबादी का चलते कूड़ा निस्तारण में होखत कमी तेलचट्टन के मौका दे देला। गरमी के मौसम के तुलना रउरा जनता के बढ़त शिकायतन से कर सकीलें। बाकिर तलचट्टन के पूरा प्रजातिए खतम कर दिहलो नुकसानदायक साबित हो सकेला। तेलचट्टा गंदगी खा के साफ करत रहेलें आ अगर एहनी के खतमे कर दीहल जाई त रउरा सभे के साफ-सफाई करवावहूं में दिक्कत होखे लागी। एहनी के उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधानो में कइल जाला कि कइसे विपरीत माहौलो में आपन अस्तित्व बचवले राखल जा सकेला।
तेलचट्टा भा चोट्टा राजनीति पर काबू करे खातिर हमेशा सावधान रहे के पड़ी, कतहीं कवनो तापमान बढ़े त ओकर तुरते उपाय करे के होखी, एहनी के दाना पानी पर नियन्त्रण बनवले राखे के पड़ी। तरह तरह के उपाय करत रहे के पड़ी जइसे कि एहनी के आवरण के काट का तौर पर रउरो कवनो दोसर आवरण बनावे के पड़ी। प्रेशर कूकर के सीटी खुला छोड़ के चोट्टा राजनीति पर काबू पावल जा सकेला। जतना मन करे गरिया ल सॅ चोट्टा राजनीति करे वाला। ओहनी के खुला छूट मिलल रही त जनदबाव अइसन ना बन पाई जवना के फायदा चोट्टा राजनीति खातिर उठावल जा सकी। गाँ फा के बात करे वालन के गाँ अपने से फाटल होला। गद्दारी के बात करेवालन के मक्कारी केहू से छिपल ना होखे।
तेलचट्टा का बहाने चोट्टा राजनीति के चरचा अगर नीमन लागल होखे त एकरा के अपना मित्र-मण्डली में साझा कर दीं आ अगर बाउर लागल होखे त anjoria@rediffmail.com पर एगो मेल कर दीं। राउर मेल के बात साझा करे जोग रहल त जरुरे साझा क दीहल जाई बाकिर राउर ई मेल के जानकारी साझा ना कइल जाई। स्पैरन से बाचे खातिर अइसन कइल मजबूरी हो गइल बा। रउरो के एगो बेमांगल सलाह दे देबे में कवनो नुकसान नइखे। एगो अइसन ई मेल बना के राखीं जवना पर रउरा कवनो जरुरी काम भा कवनो बैंकिंग ना करत होखीं। एक त एह ईमेल के रोज रोज देखे जरुरत ना होखी आ दोसरे रउरा कुछ जरुरी ई मेलो कर पाएब। अइसने सलाह यूपीआई करे खातिर एगो अलगे खाता राखे के देबेलेंं जानकार।


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