मुसलमान मुसलमान हउवें माइनोरिटी ना – बतंगड़ 111
हालही में कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के एगो बइठकी में कांग्रेस के सबले बड़का नेता राहुल गाँधी सलाह दिहलन कि मुसलमानन के मसला मुसलमानन का नाम पर उठावल जाव, माइनोरिटी कहि के ना।
एक तरह से राहुल गाँधी के ई सलाह घुमा-फिरा के उहे बात कहत बा जवन आजु देश में बहुते लोग माने आ बोले लागल बा। एह धारणा का हिसाब से मुसलमान एह देश में माइनोरिटी ना होके दुसरका बहुसंख्यक समाज हउवें आ एही चलते मुसलमानन के अल्पसंख्यकन ला निर्धारित सुविधा आ लाभ ना मिले के चाहीं। आ अब राहुलो गान्धी मुसलमानन के माइनोरिटी से अलगा राखि के बोले बतावे के सलाह कांग्रेस के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के दिहले बाड़न। उनुका कहना ई रहल कि जब मुसलमानन के समस्या भा शिकायत माइनोरिटी के समस्या भा शिकायत का तौर पर राखल जाला त ऊ बात मुसलमानन तक ओह अंदाज में ना चहुँपे जवना अंदाज में चहुँपे के चाहीं। शायद ऊ इहे कहल चाहत रहलन कि देश के बाकी अल्पसंख्यकन के चिन्ता ना करि के मुसलमानन के चिन्ता कइला के जरुरत बा आ अधिक से अधिक मौका पर कांग्रेसियन का भाषण आ बयान में मुसलमान शब्द आवे के चाहीं।
राहुल गाधी के एह सलाह से जुड़ल एगो यूट्यूब वीडियो रउरा सभे से साझा करत बानी जेहसे कि रउरो उनुका सलाह के गंभीरता समुझ लीं। हालांकि एकर विस्तार से चर्चा हमार पसन्दीदा चैनल “राष्ट्रवाणी” पर अमिताभ अग्निहोत्री कइले बाड़न।
अमिताभ अग्निहोत्री के ई वीडियो देख-सुन लिहला का बाद बहुत कुछ बाकी नइखे रहि जात जवना के हम अलग से चरचा करीं।
बाकिर हमरो मानना इहे बा कि मुसलमान एह देश में अल्पसंख्यक हइले नइखन। मुसलमानन के गिनिती देश के कवनो संप्रदाय के माने वाला लोग से बेसी बावे। हिन्दू संप्रदाय ना हवे। एकरा में अनेको संप्रदाय समाहित बाड़न – शैव, वैष्णव, सेकूलर, एकेश्वरवादी, अनेकेश्वरवादी वगैरह। सिख, जैन, बौद्ध संप्रदाय वालन के हिन्दू धर्म में मान के देखल जाला जबकि उनुकर संप्रदाय अलग हवे। हँ सभे हिन्दू हवे काहे कि हिन्दू संप्रदाय ना होके जीवन शैली हवे जवना के आधार सनातन में बावे। ई सगरी संप्रदाय भारत भूमि के संतान हईं सँ, कवनो विदेशी धरती से आइल ना हईं सँ। पारसी आ यहूदी संप्रदाय वाले सचहूं अल्पसंख्यक हउवें आ ओह लोग के संरक्षण मिले के चाहीं। ई बात हिन्दू विचारधारा का हिसाबो से उचित बा। सिख, बौद्ध, आ जैन संप्रदायन के त हिन्दू धर्म से अलगा मान के देखले ना जा सके। धर्म आ सप्रदाय के स्पष्ट परिभाषा ना होखला का चलते एह तरह के गलतफहमी होखे लागेला। धर्म विचारधारा होखेला, जीवन जिये के पद्धति होखेला जबकि संप्रदाय, मजहब, भा रिलीजन एगो सीमा रेखा होला जवना के बाहर ना जाइल जा सके।


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