बदतमीज बदजुबान बददिमाग – बतकुच्चन-225
– टीम अंजोरिया
#बतकुच्चन #बदजुबान #बदतमीज #बददिमाग# भोजपुरी

आजु के मथैला देखि के हो सकेला कि रउरो अंदाजा लाग गइल होखो कि केकरा बारे में बात होखे जा रहल बा. कुछ लोग के अंदाज नाहियो लागल होखी. बाकिर अगर हम सवाल करीं कि कवनो अबोध बालक यदि बदतमीज, बदजुबान, बददिमाग हो जाव त एकर दोस केकरा पर देबे के चाहीं? त सवाल के जबाब से पहिलहीं रउरा ओह अबोध बालक के नाम धेयान में आ जाई. त राउर अंदाज गलत ना होखी!
बाकिर सवाल त तबो रही कि एगो अबोध बालक के अइसनका संस्कार के दीहल? ओकर बाप-महतारी, दादा-दादी, नाना-नानी, ओकर संघतिया, ओकर सलाहकार, भा केहू अउर? इहो हो सकेला कि एह संस्कार का पाछा ई सभे लोग मिल-जुल के रहल होखे.
समाज परिवार में हो सकेला कि रउरो देखले होखब कि कवनो अबोध बालक के कवनो खच्चड़ गारी दीहल सिखा देला आ ऊ लइका बिना कुछ जनले समुझले ऊ गारी केहू के सुनावे लागेला. आजु देशो में एगो अइसने अबोध बालक आ गइल बा. ओकरा मालूम नइखे कि सभा समिति में कइसे बइठल जाला, कइसे बेवहार कइल जाला, कइसे बोलल जाला, का बोले के चाहीं, अपना से बड़-बूढ़ का साथे कइसे पेश होखे के चाहीं. दोसरा के सम्मान दिहला से ओकरो सम्मान बढ़ी ई बाति ना ओकर बाप महतारी सिखवलें, ना ओकर गुरु-संघतिया. आ ऊ आजु देश के सरदार बनल चाहत बा. लुहेड़न के बटोर के देश में बवाल करावल चाहत बा काहें कि ओकरा मनपसन्द कुरसी पर ओकरा के बइठावत नइखे लोग.
कहल जाला कि बद अच्छा बदनाम ना. बाकिर ई अबोध बालक त बदो बन गइल बा आ पूरा बदनामो हो चुकल बा. आ ई बात रउरो माने ला तइयार बानी काहें कि बिना ओकर नाम बतवलो रउरा जानत बानी कि ऊ अबोध बालक के हवे.

0 Comments