तोहरी बधइया भइया पिंड़िया बरतिया

 

– – डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

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सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-12
आइल भोजपुरिया चिट्ठी

तोहरी बधइया भइया पिंड़िया बरतिया

festival for brothers

 

आजु काकी अपना मोहल्ला का छोट-छोट लइकिन के लेके भोरहीं से बइठल रहली पिंड़िया का बारे में लभेरन से सुने खातिर. लभेरनो आजु उत्साह में रहलन. बतावे शुरू कइले.

पिंड़िया का बारे में ईहो कहल जाला कि ई एक तरह से भगवान शिव के रुद्रव्रत हटे, काहेंकि एहमें गोबर के पिंडी बनाके देवाल पर लगावल जाला. एह ब्रत का माध्यम से बरती अपना भाइअन का खुशहाली, लमहर उमिरि आ सुख-समृद्धि के कामना करेली. गोधन कुँटला आ सरपला का बाद बेटी-बहिन लो केहूँ का घरे समूह में जुटके पिंड़िया लगावेली लो. पहिलका दिन गोधन कुटइलका गोबर से शुरू होला आ फेरु त रोजे साँझी खा आ अनगूते पिंड़िया लगावे के काम शुरू हो जाला.

घर का कवनो देवाल पर गोबर के छोट-छोट ढेर मनुष्य के आकृति बनावल जाले. एकरा सङहीं ओकरा पर आटो से (आटा से भी) चित्र बनावल जाला. एह पूरा प्रक्रिया के ‘पिंड़िया लगावल’ कहाला. पिंड़िया शब्द ‘पिंड’ शब्द से बनल बा, जेकर मतलब होला कवनो गोल चीज. एह तरह से ‘पिड़िया’ गोबर के छोट गोला के नाँव हटे. देवाल पर गोबर के जवन आकृति बनावल जाले, ऊ गोल-गोल होले एही से एह ब्रत के नाँव पिंड़िया परल.

ई ब्रत खाली कुँवारे लइकी अपना भाई का रक्षा आ बढ़ंती खातिर करेली. ऊ लोग रोज भोरे-भोरे पिंड़िया के कथा सुनला का बादे कुछ मुँह में डालेली. जो कहियो कवनो लइकी गलती से खा लिहलसि त दोसरा दिने ओकरा प्रायश्चित करेके परेला.

पिंड़िया के शुरुआत गोधन कुँटइला माने कातिक के अँजोर का दूज (कहीं-कहीं एकम) से हो जाला अउर अगहन के अँजोर का एकम तक लगातार एक महीना चलेला ई व्रत. जवना घर का देवाल पर पिंड़िया लगावल गइल रहेला ओहिजे ब्रत करेवाली सभ लइकी बटुराली सन आ गीत गाइ-गाइ के ब्रत के एगो उत्सव में बदल देली-
कवन मासे पिंड़िया जनम लेली हो, कवना घरे लेली हो बसेर…

ब्रत करेवाली सभ लइकी रोज सबेरे नहा-धोके बासी मुँहे एक जगह बइठि के घर का अनुभवी पुरनिया से पिंड़िया के कथा सुनला का बादे अन्न-जल ग्रहण करेलिन. अइसहीं रातियो खा (रात को भी) कइल जाला. ब्रत के पूर्णाहुति जहिया होला ओह दिने बरती एकांत में रसियाव खाके पारन करेलिन. एकर ध्यान राखेके परेला कि कतहीं से कुक्कुर के आवाज मत आओ. जो कहीं से आवाज मिल गइल त ओतने खाके खाना छोड़ देबे के परेला. एकरा खातिर बरती अपना कान में रुइयो ठूसि लेलिन. एह ब्रत में नवका चावल आ गुड़ के रसियाव (बिना दूध के गुड़-चाउर के खीर) बनावल जाला, जवना के बरती दिन भर उपासे रहला का बाद साँझी खा सोरहिया का सङे खाली लोग. एकरा में एह बात के ध्यान राखेके परेला कि सोरहिया में धान के संख्या भाईयन के संख्या का अनुसार होखेले. माने बरती लइकी के जइ गो भाई होला ओही का हिसाब से प्रति भाई सोरह धान से चावल निकालि के ऊ सोरहिया लीलेली. ओकरा दोसरे दिन भोरे-भोरे देवाल पर से आपन लगावल सभ पिड़िया छोड़ा के एक जगह बटोर के सखी-सहेली का सङे पारंपरिक गीत गावत कवनो नदी भा पोखरा में प्रवाहित क देली.

पिंड़िया का विसर्जन का बाद ‘भूँजा मेलवनी’ सभसे महत्त्वपूर्ण काम मानल जाला. पिंड़िया दहववला का बाद भूँजा मेलवनी होला. मए लइकी ओह घरी आपन-आपन भुजुना आ सूखल मिठाई जइसे, कुटुकी, पटउरा, बतासा- सभ एके में मेराके आपस में बाँटि लेली सन आ ओही से पारन कइके आपन ब्रत तूरेली.

पिंड़िया ब्रत का दौरान जवन लोकगीत गवाला, ओकरा में भाई-बहिन के अटूट प्रेम के वर्णन मिलेला. एगो गीत में बहिन अपना भाई से कहतिया कि हम लड्डू और चिउडरा से पिंड़िया के पूजबि. ए भाई! पिड़िया के ई ब्रत हम तोहरे खातिर करतानी.
कवन भइया उठेले रतिया बिरतिया, अवरू अधिरतिया ए हरि
आरे कवन बहिना उठेली भिनुसार ए हरी
राम उठेले रतिया बिरतिया, अवरू अधिरतिया ए हरि
आरे पारबती बहिना उठेली भिनुसार ए हरी
आरे कवन बहिना लावेली, गोबर के रे पिंड़िया
आरे कवन भइया लावेले, नवरंगिया ए हरि
पारबती बहिना लावेली, गोबर के रे पिंड़िया
आरे राम भइया लावेले, नवरंगिया ए हरि.

दोसरका गीत में भाई-बहिन का बीच पिंड़िया के पुजा का सामान के लेके जवन बातचीत मिलऽता, ऊ व्यावहारिक का सङे बहुत मार्मिको बाटे-

मोरंग देश तूहू जइह ए राम भइया
ले अइह ए भइया मोरंगी लडुइया हो.
मोरंग देश तूहू जइह ए राम भइया
ले अइह ए भइया सुरुका चिउरवा हो.
लडुआ चिउरवा से हम पूजबि पिंड़िअवा हो
तोहरी बधइया भइया पिंड़िया बरतिया हो.
घिवही लडुइया बहिना भइले महङवा हो
छोड़ि देहु ए बहिना पिंड़िया बरतिया हो.
सुरुजा चिउरवा महङ भइले बहिना हो
छोड़ि देहु ए बहिना पिंड़िया बरतिया हो.
अइसन बोली जनि बोल राम भइया हो
तोहरी बधइया भइया पिंड़िया बरतिया हो.

अतना बतावत-बतावत लभेरन उदासो हो गइले. अब कतना दिन चली ई ब्रत-तेवहार ? के अपना पुट्टी-पेंट लागल देवालि पर पिंड़िया लगावे दी आ कवना लइकी-बेटी के मोबाइल आ लैपटप से अब फुरसत मिलेवाला बा ?

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संपर्क : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल, निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, देवनगर, पोल नं. 28
पो.- मनोहरपुर कछुआरा, पटना-800030 मो. 9831649817
ई मेल : rmishravimal@gmail.com

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