खिचड़ी के ह चार इयार, दही पापड़ घीव अँचार

सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-23
आइल भोजपुरिया चिट्ठी

खिचड़ी के ह चार इयार, दही पापड़ घीव अँचार

–डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

#भोजपुरिया-चिट्ठी #भोजपुरी # खिचड़ी #पापड़ #दही #अँचार #मकर-संक्रान्ति #डॉ.रामरक्षा-मिश्र-विमल

आजु बेरि गिरला का बाद लभेरन काकी किहाँ पहुँचले. काकी के बतावे लगले कि दुपहरिये से चट्टी पर गइल रहलीं हा. सकराति का खरीदारी में बड़ा टाइम लागि गइल हा. काकी उनुका मजबूरी के समुझली. बरिस दिन के बात हटे, तइयारी में त टाइम लगबे नु करेला! ओहू प हमनी के खिंचड़ी त सभसे ऊपर वाला परब हटे. जे सालो भरि ना नहाला, ऊहो खिंचड़ी के दिन जरूर नहाला.

काकी पुछली- “ई सकराति असल में हटे का? हमनी का स्नान-दान का बाद दही-चूड़ा, तिलकुट आ खिंचड़ी ओगैरह खाके उत्सव त मनाईंले जा बाकिर एकरा पीछे के कहानी का बा?”

लभेरन बोलले- मकर संक्रांति एगो महत्त्वपूर्ण हिंदू तेवहार हटे. ई तेवहार पूरा भारत में मनावल जाला बाकिर अलग-अलग जगहन पर एकरा के अलग नाँव दे दिहल गइल बा. बिहार आ उत्तर प्रदेश में एकरा के खिचड़ी का नाँव से जानल जाला.

मकर संक्रांति का दिने सूर्य देव दक्षिणायन से उत्तरायण (उत्तरी गोलार्ध) का ओर आपन यात्रा शुरू करेलन. एह दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेले, खरवाँस उतरेला आ गृहप्रवेश, तिलक, बियाह आदि शुभ परोजन के शुरुआत हो जाला. मकर संक्रांति का पुण्यकाल में गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी आ सरयू जइसन पवित्र नदियन में स्नान आ दान के बहुत महत्त्व बाटे. ई मानल जाला कि एह दिन पुण्यकाल में स्नान कइला से सभ संचित पापन के नाश होला. बारह बरिस प हिंदू लोग मकर संक्रांति के कुंभ मेला का रूप में मनावेलन, जे विश्व के सबसे बड़हन सामूहिक तीर्थयात्रा मानल जाला.

सकराति का दिने तिल आ गुड़ के सेवन, तिल-गुड़ के लड्डू बनावल आ दान करे के शुभ मानल जाला. तिल शरीर के ऊर्जा आ गर्मी देला. ई खिंचड़ी के तेवहार नया फसल के कटाई आ सरदी का अंत के प्रतीक हटे. एह दिन खिचड़ी खाए आ दान करहूं के रिवाज बा.

एह अवसर पर सूर्य देव आ शनि देव के कथा के बहुत चर्चा होला. सकराति का अवसर पर लोग सूर्य देव आ शनि देव के कथा अक्सर सुनावेलन. सूर्य देव के दू गो पत्नी रहली- संज्ञा आ छाया. संज्ञा से सूर्य देव के दू गो संतान भइली- यम आ यमी अउर छाया से उनकर एगो बेटा भइल, जेकरा के शनिदेव का नाँव से जानल जाला. शनिदेव जनमे से करिया रहलन, जेकरा चलते खिसिया के सूर्य देव शनिदेव आ उनका महतारी छाया के छोड़ि दिहले. अतने ना ऊ शनिदेव का घर (कुंभ) के जराइयो दिहले. बाद में यमराज दूनो जाना में सुलह करवले. एकरा बाद शनिदेव करिया तिल से पिता के स्वागत कइले, जवना से खुश हो के सूर्य देव उनुका के वरदान दिहले कि जब ऊ मकर राशि में (मकर राशि के मालिक शनि ग्रह हवें) अइहें आ मकर संक्रांति के दिन जेही सूर्य देव के करिया तिल अर्पित करी, ओकरा जीवन में सुख-समृद्धि के कमी ना होई. एही चलते सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश के मकर संक्रांति का रूप में मनावल जाला.

कहल जाला कि मकरे संक्रांति के गंगा जी पृथ्वी पर आइल रहली. राजा सगर का साठ हजार पुत्रन के मोक्ष दिआवे खातिर, भगीरथ का तपस्या से गंगा जी कपिल मुनि के आश्रम होत सागर में मिलली. ई घटना मकर संक्रांति पर भइल, एहसे एह दिन गंगा स्नान के विशेष महत्त्व बा, खासकर गंगासागर में. कहल जाला कि –
सब तीरथ बार-बार,
गंगासागर एक बार.

महाभारत में त एगो ईहो कथा आइल बा कि महाभारत का युद्ध के बाद, इच्छा मृत्यु के वरदानप्राप्त भीष्म पितामह सूर्य का उत्तरायण भइला का कारन मकर संक्रांतिए का दिन आपन परान तेजले रहन, जवना से ऊ मोक्ष प्राप्त कर सकसु.

काकी बहुत खुश भइली अतना जानिके आ हँसते हँसत पुछली कि लोग सकराति के खिचड़ी काहें कहेलन.

लभेरन बतावे लगलन. सकराति के एगो नाँव खिंचड़ी एहसे परल कि दिन में त दही-चूड़ा, तिलकुट आदि खाइल जाला, बाकिर राति खा खिंचड़ी खाइल जरूरी मानल जाला. खिचड़ी बनला के मतलब, आलू-कोबी के तरकारी बनहीं के बा. अइसना में खिंचड़ी के इयार कइसे बाकी रहिहें?
खिचड़ी के ह चार इयार,
दही पापड़ घीव अँचार

एह कहाउत से पता चलता कि एगो साधारन व्यंजन खिचड़ी एह चीजन का सङे मिल के एगो संपूर्ण आ संतोषजनक भोजन बन जाला, जवन स्वाद, बनावट आ पोषण के एगो बढ़िया संतुलन प्रदान करेला, खास करके जाड़ा का मौसम आ तेवहारन में. कहल त ईहो जाला कि अंग्रेजो भारत से एह पोषक आहार के ब्रिटेन ले गइले, जहाँ आजुओ ई नाश्ता में शौक से खाइल जाला.

अतने ना ज्योतिषी लोग त नवो ग्रह से खिचड़ी के कनेक्शन बतावेलन. मसूर दाल मंगल के, करिया दाल (उड़द) शनि आ राहु-केतु के, हरदी बृहस्पति के, चावल-पानी चंद्रमा-शुक्र के, घीव सूर्य के आ हरियर तरकारी बुध के आकर्षित करेले अउर ई सभ मिल के नवो ग्रह के संतुलित करेले. अब बताईं, अइसन अमिरित नियन भोजन का नाँव पर तेवहार के नाँव काहें ना रखाई?
———————————————

संपर्क : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल, निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, देवनगर, पोल नं. 28
पो.- मनोहरपुर कछुआरा, पटना-800030 मो. 9831649817
ई मेल : rmishravimal@gmail.com

0 Comments

Recent Posts

🤖 अंजोरिया में ChatGPT के सहयोग

अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

🌐 ChatGPT से खुद बातचीत करीं – आ देखीं ई कइसे रउरो रचना में मदद कर सकेला।