हमार वेलेंटाइन तोहार वेलेंटाइन

हमार वेलेंटाइन तोहार वेलेंटाइन
my valentine your valentine

–डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

#भोजपुरिया चिट्ठी #वेलेंटाइन #डॉ. रामरक्षा-मिश्र-विमल

सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-27
आइल भोजपुरिया चिट्ठी

हमार वेलेंटाइन तोहार वेलेंटाइन

काकी ‘वेलेंटाइन’ शब्द सुनि-सुनि के उबिया गइल रही. जब ऊ लइकन से ओकर माने पूछसु त कवनो बतावे ना, खाली मुस्कराए आ भागि जाइ. तब ऊ लभेरन के बोलवली आ कहली कि हमरा के हिगरा-हिगरा के वेलेंटाइन का बारे में बताव. लभेरन बतावे शुरू कइले- एकरा खातिर रउँवा सबसे पहिले वेलेंटाइन के कहानी सुने के परी.

सबसे प्रचलित कहानी तीसरी शताब्दी का रोम के हटे. ओह घरी क्लॉडियस रोम के सम्राट रहन. क्लॉडियस मानत रहन कि बियहल मरद का मुकाबले कुँआर मरद नीमन सैनिक होलन काहेंकि परिवार ना रहला से उनुकर ध्यान ना भटके. ऊ सैनिकन का बियाह पर प्रतिबंध लगा दिहले. सेंट वेलेंटाइन के ई अन्याय लागल आ ऊ सम्राट का एह आदेश के अनदेखा कइके गुप्त रूप से सैनिकन के बियाह करावे शुरू क दिहलन. सम्राट के जब एह बात के पता चलल त ऊ वेलेंटाइन के गिरफ्तार कराके उनुका के मौत के सजा सुनवलन.

कहल जाला कि जब वेलेंटाइन जेल में रहन त उनुका जेलर का आन्हर बेटी से प्रेम हो गइल. अपना मृत्यु से पहिले, ऊ एगो चिट्ठी लिखले रहलन, जवना में ऊ नीचे लिखले रहन- From Your Valentine माने “तोहार वेलेंटाइन”. मान्यता त ईहे प्रचलित बा कि उनुका के 14 फरवरी का दिने फाँसी दिहल गइल रहे, ओही से उनुका याद में एह दिन के मनावे जाए लागल. मानल जा सकता कि “तोहार वेलेंटाइन” लिखे के शुरुआत ओही घरी से भा ओकरा कुछ बरिस बाद से भइल होई.

भलहीं वेलेंटाइन डे का जऽरि में तीसरी शताब्दी के इतिहास अउर बलिदान हो सकत बा बाकिर आजु हमरा सामने ओकर जवन सरूप लउकत बा ओकरा के त निस्चे बाजारवाद आ कॉरपोरेट जगत गढ़ले बाटे. एकरा के अइसे समुझीं- कंपनियन के मालुम बा कि प्रेम एगो बहुत बरियार मानवीय भावना हटे एहसे बाजारवाद बड़ा चतुराई से ‘प्यार’ के ‘उपहार’ का सङे जोरि दिहलसि. अब त प्यार के अभिव्यक्ति खाली शब्द से नइखे होत, ऊ अब महङा उपहार आ ब्रांडेड चॉकलेट से तउलाए लागल बा. विज्ञापन त अइसे महसूस करावे के कोशिश करतारे सन कि जो रउआँ कुछ खरीदत नइखीं त एकर माने भइल कि रउरा अपना पार्टनर के कवनो परवाहे नइखे.

अब त अतने ना, 14 फरवरी का पहिलहीं से ओकर सप्ताहो मनावे शुरू हो गइल. जब बुरुबक का बगली में पइसा रही त गाँव बिना खइले मरी? ईहे बाजारवाद हटे. अपना मोनाफा खातिर बाजार एक दिन से बढ़ाके आठ दिन तक का ‘वेलेंटाइन वीक’ के कॉन्सेप्ट तेआर कइलसि. साते फरवरी से रोज डे, प्रपोज डे, चॉकलेट डे, टेडी डे, प्रॉमिस डे, हग डे, किस डे आ अंत में 14 फरवरी के वेलेंटाइन डे मनावे तक का पीछे फूल, गिफ्ट गैलरी, टेडी वेंडर्स आदि के उद्योगन का बढ़ावा खातिर बनावल गइल बा. ई एगो चेन नियर बा कि एह बजार के फइलावल प्यार का हुले-ले में जे धरा जाई ओकरा एक का बाद दोसरका-तिसरका सामान खरिदहीं के बा.

19वीं सदी में एस्थर हाउलैंड आ बाद में हॉलमार्क जइसन कंपनी एह दिन के व्यवसायीकरण शुरू कइले रही सन. पहिले जवन संदेश हाथ से लिखात रहे, ओकरा खातिर अब ‘रेडीमेड कार्ड’ आवे लागल. आजु कार्ड आ डिजिटल गिफ्ट करोड़न में बिकाता आ अरबों डॉलर के वैश्विक उद्योग बन गइल बा. ई बाजारेवाद के कमाल कहीं कि देखते-देखत ई पश्चिमी त्योहार विश्व का अनेक देसन में फइल गइल. एह घरी रिटेल ऑफर के बाढ़ि आ जाला. रेस्टोरेंट, होटल आ ज्वेलरी स्टोर त ‘कपल्स डिस्काउंट’ देबे तक शुरू क देले स.

एकर दुष्प्रभाव हमनी का लइका-फइकन पर बहुत परल बा. जबसे प्यार कवनो ‘प्रोडक्ट’ का माध्यम से तउलाए लागल बा, रिश्ता के अरथे बदलि गइल बा. एकरा चलते कपल्स पर ई दबाव बनल रहऽता कि ऊ दुनिया के देखावसु कि उनुकर पार्टनर उनुका के कतना प्यार करेला. अब अतना खर्च कइल जेकरा वश में नइखे त ओकरा में हीने भावना नु पैदा होई? बजार ईहो सिखावता कि माफी माङे के होखे भा प्यार जतावे के त बोलऽ–बतियावऽ जनि, बस एगो काड भा गिफ्ट दे द. रिश्तन में गहराई अउर संवाद का बढ़ रहल कमी के ईहो एगो बहुत बड़ कारन लागता. एह घरी बजार खाली ‘जोड़ी’ के टारगेट करेला आ एकरा चलते ‘सिंगल’ लोग अपना के समाज से अलग-थलग भा अधूरा महसूस करे लागेले. एही कारन वेलेंटाइन डे का आसपास डिप्रेशन के मामला ढेर बढ़ि जाला.

बेचारे सेंट वेलेंटाइन त बियाह जइसन पवित्र बंधन का रक्षा खातिर बलिदान देले रहन बाकिर उनुकर पुण्य तिथि आजु ‘कैजुअल डेटिंग’ तक सिमट गइल बा आ एहमें भावना से अधिका ‘ब्रांड्स’ के महत्त्व दिहल जा रहल बा. हो त ईहो सकत रहे कि आजु का दिने सिखावल जाइत कि रिश्ता खाली ‘पावे’ के नाँव ना हटे बलुक एक-दोसरा खातिर ‘त्याग’ के नाँव हटे. वेलेंटाइन जी ईहे नु कइले रहन?

काकी एगो लंबा साँस लिहली. हँ त, अब ईहे नु बाँचि गइल बा- हमार वेलेंटाइन तोहार वेलेंटाइन! लागल रहसु लोग.

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संपर्क : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल, निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, देवनगर, पोल नं. 28</e
पो. – मनोहरपुर कछुआरा, पटना-800030 मो. 9831649817
ई मेल : rmishravimal@gmail. com

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