सरकारी स्कूल का नाँवे से लोग बिचुकि जाले

–डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

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सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-20
आइल भोजपुरिया चिट्ठी

सरकारी स्कूल का नाँवे से लोग बिचुकि जाले

 

आज लभेरन के भोरे-भोरे देख के काकी खिल गइली. ऊ उनुका खातिर चाय मङववली आ फेरु त कुशल-मंगल पूछे के शुरुआत हो गइल. काकी का हाथ में अखबार देख के लभेरन पूछ दिहले कि आजु के सबसे ज्वलंत समाचार का बड़ुवे? काकी माथा प हाथ ध लिहली- “सरकारी विद्यालय आ सरकारी शिक्षक त हदे क देले बाड़न. सरकार शिक्षकन के बहाली करत बिया, बीपीएससी का माध्यम से चुन के योग्य शिक्षक आवतारन बाकिर विद्यालय में बच्चा का नामांकन के संख्या कम होत जात बिया. समझ में नइखे आवत कि ई हो का रहल बा! जब अध्यापक बढ़िया बाड़न आ सरकार का लगे बच्चा के पढ़ावे का अलावा दोसरो बहुमूल्य सुविधा बाड़ी सन, तब अभिभावक अपना बच्चा के सरकारी विद्यालय में डाले से काहें कतरा रहल बाड़न?

लभेरन उनुका चिंता में दू शब्द अउरी जोड़ि दिहले- सरकारी विद्यालयन में औसत से कम नामांकन होखे के बात दुखद भर नइखे, बहुते चिंतो के बा. सरकार के सोचे के परी कि आखिर काहें सरकारी विद्यालय (कुछ लोकप्रिय आ सम्मानित विद्यालयन के छोड़ि दिहल जाए त औसतन) आम जनता का तिरस्कार के चीज हो गइल बा. ओहिजा धनिक त धनिक, गरीबो अपना बच्चा के पढ़ावे के नइखे चाहत. साफ बा कि बिहार का सरकारी विद्यालयन में पढ़ाई का संदर्भ में काम करे के संस्कृति अब नीमन नइखे रहि गइल. सरकार के त एह पर सोचहीं के चाहीं.

लभेरन के आपन एगो हीत टीचर याद आ गइले. बोलले- जानऽतानी काकी, हितऊ सरकारिए स्कूल में पढ़ले रहन. उनुका साइंस टीचर पं. नित्यानंद मिश्र आ हिंदी टीचर जगन्नाथ राय जी के नाँव दूर-दूर तक फइलल रहे. सरकारिए स्कूल का पढ़ाई पर ऊ आगे टॉप करत गइले. एम.ए. कइला का तुरत्ते बाद केन्द्रीय विद्यालय में उनुका नोकरी मिल गइल. ओहिजा पढ़ावे में उनुकर अतना मन लागल कि अउर कवनो नोकरी में जाए के सोचबे ना कइले. मिलला पर ऊ बतावत रहन कि उनका विद्यालय में एडमिशन खातिर जवन भकेंसी निकलत रहे, ऊ एडमिशन फॉर्म का तुलना में ‘ऊँट का मुँह में जीरा’ लागत रहे. ओहिजा त कवनो समस्या ना रहे नामांकन के? ऊ बतावसु कि अइसनो ना रहे कि ज्यादा अंक वाला बच्चने के एडमिशन होत रहे. ओहमें तेज से तेज आ गर से गर विद्यार्थी, सभे पढ़त रहे. टीचर के लक्ष्य रही सभकर गुणवत्ता बढ़ावे के अउर ओकरा खातिर टीचर आ प्रशासन रणनीति पर रणनीति बनावत रही. आजुओ विद्यार्थियन का हित में केंद्रीय विद्यालय संगठन के शोध आ प्रशिक्षण के काम लगातार चल रहल बा.

लभेरन उत्साह में बोलत रहन- काकी, आसान नइखे टीचिंग प्रोफेशन. एकरा खातिर बहुत श्रम आ त्याग करेके परेला, खाली एमए-बीएड के डिग्री लिहला से केहूँ सही में टीचर ना हो जाला. डिग्री से ज्यादा ज्ञान त अब मोबाइले पर ऑनलाइन मिल जाता. टीचर बने खातिर ज्ञान का सङे-सङे शिक्षण कौशल अउर पढ़ावे में निष्ठा जरूरी बा.

काकी बोलली- तू त सेंट्रल के नु बात करऽतारऽ? लोग त ईहे मानेला कि सरकारी नौकरी कवनो राज्य के होखो, ओहमें बिना कामे कइले तनखाह मिल जाला. दोसर बात ई कि जवना विद्यालयन में बच्चन के खाना खियावल मुख्य बात होखे आ शिक्षकन के पढ़ाई छोड़ि के दोसरा सरकारी काम में लागल रहल जरूरी हो जाउ, ओहिजा आपन बच्चा पढ़ावे खातिर के भेंजी? साँच त ई बा कि गरीब से गरीबो मनई अपना घर में अपने खाना खाउ भा जनि खाउ बाकिर अपना बच्चा के जरूर खियावेला. अइसना में विद्यालय में खाना खिआवे के का जरूरत बा? पढ़ाई के कवनो समय बाँव ना जाए के चाहीं. जवन पइसा खाना खियावे में खरच कइल जाता, ओहके अभिभावक का अकाउंटो में त डालल जा सकत बा. ईहो त सोचहीं के चाहीं कि आखिर का बात बा कि केंद्रीय विद्यालय आ नवोदय विद्यालय जइसन सरकारी विद्यालय रिजल्ट का मामला में हमेशा नंबर वने पर रहेला. एहिजा नामांकन करावे खातिर लोग तरसत रहेला जबकि एकाध गो राज्य के छोड़ि दीं त अधिकांश राज्यन में सरकारी स्कूल का नाँवे से लोग बिचुकि जाले.

लभेरन जोरले- सरकार के चाहीं कि विद्यालयन का बेसिक स्ट्रक्चर पर ध्यान देउ, विद्यालय में खाना बनावल/खियावल बंद करो आ अध्यापकन के गुणवत्ता बढ़ावे के कोशिश करो. जेकरा में अध्यापकीय कौशल नइखे, ओह लोगन के प्रशासन प्रशिक्षित करे आ जे ओकरा बादो ना सुधरे त ओहके अध्यापक का नौकरी से अलग कर दे. अध्यापक ऊ होला, जे भइँसि पर बइठल बच्चा के भी विद्यालय में खींच ले आवे आ जेकरा पढ़वला से विद्यालय के बच्चा फेल होके फेरु भइँसि पर जाके बइठ जाए, ऊ अध्यापक कइसे कहाई? जो सरकार शिक्षा के प्रति सचमुच चिंतित बिया त विद्यालयी शिक्षा का प्रति ओकर गंभीरता सबसे ज्यादा लउके के चाहीं.

काकी हामी भरत बोलली- जब ले बच्चन के डाँटलो अपराध हो गइल बा, तबसे विद्यार्थी का नजर में शिक्षक के कवनो भेलू नइखे रहि गइल. शिक्षक खातिर सम्मान का सङे डरो होखे के चाहीं लइकन का मन में.
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संपर्क : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल, निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, देवनगर, पोल नं. 28
पो.- मनोहरपुर कछुआरा, पटना-800030 मो. 9831649817
ई मेल : rmishravimal@gmail.com

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