Tag: विजय मिश्र

लईका सयान हो गइल

– विजय मिश्र लइका हनेला जवाब, अब सयान हो गइल बहू अइली घरे, अलगा चुहान हो गइल. पहिला रिस्ता टूटल जाता, नवका रोज धराता ननिअउरा त याद ना आवे, बढ़ल सढ़ुआ नाता. माई बाबू काटे, ससुररिया परान हो गइल बहू अइली घरे, अलगा चुहान हो...

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🤖 अंजोरिया में ChatGPT के सहयोग

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