– मनोज भावुक

वक्त के ताप सहहीं के बाटे
बर्फ से भाप बनहीं के बाटे

पाप के केतनो तोपी या ढ़ाँपी
एक दिन ओकरा फरहीं के बाटे

जवना ‘घर’ में विभीषण जी बानी
ओह लंका के जरहीं के बाटे

चाँद-सूरज बने के जो मन बा
तब त गरहन के सहहीं के बाटे

चार गो नाव पर जे चढ़ल बा
डूब के ओकरा मरहीं के बाटे

अइसे मुस्का के कनखी से देखबू
तब त परिवार बढ़ही के बाटे

1 Comment

  1. संतोश यादव्

    बेजोर…



अंजोरिया पर खोजीं -

आपन टिप्पणी, लेख, कहानी, कविता, विचार भेजे खातिर -

anjoria@rediffmail.com

अगर राउर रचना पहिला बेर आ रहल बा त आपन एगो रंगीन पासपोर्ट साइज फोटो साथ में जरूर डाल दीं.

Recent Posts

पाठक-पाठिकन के राय विचार प्रतिक्रिया..

🤖 अंजोरिया में ChatGPT के सहयोग

अंजोरिया पर कुछ तकनीकी, लेखन आ सुझाव में ChatGPT के मदद लिहल गइल बा – ई OpenAI के एगो उन्नत भाषा मॉडल ह, जवन विचार, अनुवाद, लेख-संरचना आ रचनात्मकता में मददगार साबित भइल बा।

🌐 ChatGPT से खुद बातचीत करीं – आ देखीं ई कइसे रउरो रचना में मदद कर सकेला।