महाराष्ट्र आ झारखण्ड विधानसभा चुनाव 2024 के परिणाम

Screenshot from ECI website
आजु महाराष्ट्र आ झारखण्ड विधानसभा चुनाव 2024 के परिणाम मतगणना का बाद सबका सोझा आ गइल. महाराष्ट्र के परिणाम अतना एकतरफा आइल बा कि सभकर धेयान ओनिए चल गइल बा. यूपी में बाबा से पटखनी खा के सपा आपन घाव सुघरावे में लागल बिया. बिहार में तेजस्वी के तेज कतहीं ना लउकल आ चारों सीट पर भइल उपचुनाव में भाजपा गठबन्हन के जीत हो गइल बा. प्रशान्त किशोर के जन सुराज पार्टी के ई पहिला चुनावी जंग रहल आ नया पार्टी होखला का बावजूद उनुकर ताकत मजगर होखे के सभावना लउकत बा. जीत भलहीं ना मिलल सन सुराज के बाकिर हर जगह ऊ दोसरा के लुटिया डूबोवे में सफल हो गइलन.
बाकिर हमार धेयान झारखण्ड पर अटक गइल बा. बुझात नइखे कि कि जब चारो ओर बँटोगे तो कटोगे के विजयघोष का बीच आखिर का कारण रहल कि झारखण्ड में ई नारा काम ना कर पवलसि. राजनीतिक कारण खोजे वाला लोग के कहना बा कि भाजपा आपन सीएम फेस ले के मैदान में ना उतरल आ एकर नुकसान हो गइल. हालांकि बाबूलाल मराण्डी के नेतृत्व में चुनाव लड़लसि भाजपा बाकिर चम्पई सोरेन के भाजपा में शामिल करवला से भाजपा के पुरान कार्यकर्तन के नाराज होखे के बात बतावल जात बा.
जब हम ई सब लिख रहल बानी तबले चुनाव आयोग के वेबसाइट पर दीहल जानकारी बतावत बावे कि कुल्हि 81 सीट के परिणाम आ गइल बा आ हेमन्त सोरेन के गोल झारखण्ड मुक्ति मोर्चा के 34 सीट, ओकरा सहयोगी कांग्रेस के 16 सीट, राजद के 4 सीट, आ सीपीआई मार्क्ससिस्ट-लेनिनिस्ट के 2 सीट पर जीत मिलल बा. एह तरह कुल मिला के उनुका 55 सीट पर जीत मिलल बा जवन कि कुल्हि सीट के दू तिहाई पार कर गइल बा. एह शानदार जीत खातिर हेमन्त सोेरेन के बधाई मिले के चाहीं.
भाजपा के महज 21 सीट आ ओकरा सहयोगियन में जदयू के 1 सीट, लोजपा रामविलास के 1 सीट आ आजसु के 1 सीट पर जीत भइल बा आ कुल्हि मिला के 24 हो रहल बा. जलकम नाम के गो गोल के 1 सीट मिलल बा बाकिर ई गोल कवनो गठबन्हन में ना रहुवे.
बड़का बड़का चुनावी विशेषज्ञ एह पर आपन शोध करीहें आ तरह तरह के कारण गिनावल जाई. बाकिर “बड़ बड़ जने दहाइल जासु, गदहा थाहे कतना पानी” वाला अंदाज में हमहूं आपन विश्लेषण सभका सोझा राखल चाहत बानी. बटोगे तो कटोगे के नारा झारखण्ड में ना चल पवला के हमरा हिसाब से तीन गो बड़हन कारण बा. सीएम फेस पर उहापोह पहिलका कारण गिनाए के चाहीँ. बाकिर हमरा ओह से कवनो मतलब नइखे. केहू सीएम होखीत ओहसे हमरा का. हम त एगो आम हिन्दू का तरह जानल चाहत बानी कि आखिर एहिजा एकजुट काहे ना हो पवले हिन्दू ?
हमार मानना बा कि एहिजो हिन्दू एकवटे के पूरा कोशिश कइलन बाकिर ओह लोग के आकलन में चूक हो गइल. घुसपैठियन का खिलाफ आवाज बुलंद कइल दुसरका कारण बा. काहे कि बहुते घुसपैठिया झारखण्ड के आदिवासी परिवारन में एन-केन-प्रकारेण दामाद बन के बइठल बाड़ें आ अपना दामाद का खिलाफ ओह परिवार के जाए के सोचलो गलत होखे के चाहीं. तिसरका कारण हमरा हिसाब से आदिवासी जनजातियन के एगो निकहा हिस्सा के हिन्दूवन का साथे समभाव ना होखला का चलते भइल. बहुते आदिवासी आपन सम्प्रदाय बदल चुकल बाड़ें बाकिर आपन पहचान लुका के. जब ले रउरा बहुत करीब से अइसन लोग के नइखीं जानत त रउरा सोचब कि ई आदमी भा औरत हिन्दू हवे. जबकि ऊ बहुत पहिले से आपन सम्प्रदाय बदल चुकल बा. कनियवो के भाई आ दुलहवो के भाई वाला अन्दाज में ई लोग हिन्दू पहचानो के फायदा ले रहल बा आ अल्पसंख्यक आरक्षणो के. इहो एगो बड़ कारण माने के चाहीँ भाजपा के अपेक्षित जीत ना मिलला के. इहो हो सकेला कि सामने वाला के पहचान में भरम रहला का चलते ओहलोग के सगरी रणनीति आसानी से दुश्मन के खेमा मे चहुँपत गइल.
भाजपा के एहू दिसाईं सोचे के चाहीं. हो सकेला कि ओकर आपन कमजोरी नजर आ जाव. बाकिर ओकरा ला जवना हिम्मत आ हिमाकत के जरुरत बा ऊ शायद भाजपा में अबहियों नईखे आ पाइल. हिमन्त बिस्व सरमा के लाख कोशिश का बावजूद भाजपा के परचम झारखण्ड में ना फहरल एकरा ला समूचा हिन्दू समाज के आत्म चिन्तन करे के चाहीं.
आपने तथ्यात्मक विश्लेषण किया है चुनाव परिणाम का। बटेंगे तो कटेंगे एक स्वार्थी नारा है जो भाजपा ने आपने को सत्ता में बनाए रखने के लिए गढ़ा है, लेकिन हमें कोई शिकायत नहीं है क्योंकि और पार्टी भी तो स्वार्थ के लिए ही मैदान में है, भाजपा कम से कम हिंदू का नाम तो लेती है। आपका नजरिया बहुत अच्छा है।