गोरखपुर के भोजपुरी संगम के 193वीं बइठकी

– कुमार अभिनीत

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गोरखपुर के भोजपुरी संगम के 193वीं बइठकी

भोजपुरी संगम के 193 वीं ‘बइठकी’, बशारतपुर, गोरखपुर में, संस्था कार्यालय पर सार्जेंट अभिमन्यु पाण्डेय ‘मन्नू’ के अध्यक्षता आ अवधेश शर्मा ‘नंद’ के संचालन में करावल गइल।

पहिलका सत्र में अरविंद ‘अकेला’ के लिखल भोजपुरी कहानी ‘हम तरि गइलीं’ के पाठ का बाद ओकर समीक्षा कइल गइल। समीक्षा करते हुए नर्वदेश्वर सिंह ‘ मास्टर साहब’ एह कहानी के सामाजिक सरोकारन के सहेजत किस्सागोई बतवलन। कृष्ण कुमार श्रीवास्तव के कहना रहल कि ई कहानी पारिवारिक आ सामाजिक संबंधन के निभावे के संदेश देत दहेज जइसन समस्या के निदान के कहानी हवे। अउरी समीक्षकन जइसे कि सत्य प्रकाश शुक्ल ‘बाबा’, ब्रजेश कुमार त्रिपाठी, रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी आ राम समुझ साँवरा का विचार से ई कहानी असरदार आ सुखान्त बावे।

‘बइठकी’ के दूसरका सत्र में भोजपुरी संगम के संस्थापक स्व.सत्य नारायण मिश्र ‘सत्तन’ जी के लिखल वाणी वंदना ‘हे जननी सुरसती सारदा, अब ना देर लगाईं’ के प्रस्तुति सत्तन जी के अभिनीत कइलन। राम समुझ ‘सांवरा’ आपन कविता ‘महुआ के बरिया में महुआ बीनै, चलिहऽ बड़े भिनुसार हो’ अउर ‘हमरे सिवनवां में अइहा हो गोरी, बाटै सिन्होरै कै पेड़’ सुना के वाहवाही लूटलन। कृष्ण कुमार श्रीवास्तव आपन भोजपुरी ग़ज़ल ‘गीत जिनगी कै गाके सुनावल करऽ, ग़म के मारल बा दुनियां हंँसावल करऽ’ पर खूबे ताली बटोरलन. संयोजक कुमार अभिनीत बेटी पर आपन कविता अस धन पाइके घर मोरा महके, चहँकेला घर परिवार’ सुनाके सभका के भाव विभोर क दिहलन। शुकदेव त्रिपाठी महाविद्यालय के प्रबंधक आ युवा कवि ब्रजेश कुमार त्रिपाठी ‘ऊँखी कै बोझा मूंड़ी पर धराइल, छठी कै पहरा कपारे पर आइल’ जइसन सुन्दर रचना से छठ पर्व के गहमागहमी के अनुपम शब्द चित्रण कइलन आ ‘दुख तऽ केतना बा कि सहत बानी, बाति पर बाति आइल ह तऽ कहऽतानी’ कविता में परित्यक्त बूढ़ पिता के दुखन के वर्णन क के सुनेवालन के भावुक बना दिहलन। साहित्यिक संस्था ‘अग्रहार’ के सचिव कवि सत्य प्रकाश शुक्ल ‘बाबा’ अपना रचना में लड़की के बिदाई पर उपजल भावन के ‘अंगुरी पर दिन बाकी बाटै बेटी के ससुरा गइला में ‘ अउर बाप के तोष देत बेटी के मार्मिक वर्णन सुनवलन। अवधेश ‘नन्द’ बेटी पर केंद्रित छंद का बाद अपना उपदेशपूर्ण भोजपुरी दोहन ‘बहुरंगी जिनगी बनल,किसिम-किसिम कै रंग। लालच इरखा क्रोध से, सब कुछ बा बदरंग’ सुनवलन। कार्यक्रम के अध्यक्षता करत ‘अग्रहार’अध्यक्ष अभिमन्यु पाण्डेय ‘मन्नू’ सभका कवितन पर अपना टिप्पणी का साथे आपन मौसमी रचना ‘ई फागुन कै दिन आइ गइल,मौसम में खुमारी छाइ गइल’ के मोहक प्रस्तुति दिहलन। राम सुधार सिंह ‘सैंथवार’, विनोद यादव ‘निर्भय’ , दिनेश गोरखपुरी, अरविंद ‘अकेला ‘, नर्वदेश्वर सिंह वगैरह कवियनो के कविता पाठ भइल।

बइठकी के मुख्य अतिथि सत्य प्रकाश शुक्ल ‘बाबा’ के उनुका रचनाधर्मिता खातिर अभिमन्यु पाण्डेय ‘मन्नू’, इं. राजेश्वर सिंह, ब्रजेश कुमार त्रिपाठी आ कुमार अभिनीत अंगवस्त्र, डायरी, पेन इत्यादि से सम्मानित कइलन। बईठकी में डॉ.फूलचंद प्रसाद गुप्त, डॉ.विनीत मिश्र, कार्तिक आ कुशाग्र के सहभागितो खआस रहल।

आखिर में भोजपुरी संगम के अध्यक्ष इं.राजेश्वर सिंह कवियन आ अतिथियन ला आपन आभार जतवलन।

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(हमेशा का तरह हिन्दी में आइल एह विज्ञप्ति के भोजपुरी अनुवाद हवे ई – टीम अंजोरिया)

1 Comment

  1. Editor

    अगर रउरा आपन विचार एहिजा लिख देब त गलत ना होखी। 😉

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