अजीत पवार के उपयोगिता
हर एक दोस्त जरुरी होला. बाकिर भाजपा के बहुते समर्थकन के बुझात ना रहल कि आखिर कवना मजबूरी में भाजपा अजीत पवार के अपना संगे ले लिहलसि जबकि ओकरा लगे शिवसेना का चलते पूरा बहुमत रहुवे. पिछला लोकसभा चुनाव में मिलल हार के ठीकरा अजीते पवार का कपारे फोड़ल जात रहुवे. बाकिर हाल के विधानसभा चुनाव के परिणाम बता दिहलसि कि अजीत पवार के संगे लीहल कतना काम के फैसला रहल. कहीं त भाजपा के मास्टर स्ट्रोक रहुवे.
आईं एक बेर फेरू 23 नवम्बर का दिने आइल चुनाव परिणाम पर नजर डालल जाव. एह चुनाव में महायुति के शानदार बहुमत मिलल आ भाजपा के अबहीं तक महाराष्ट्र में मिलल जीत से बड़का जीत. 288 का विधानसभा मे 230 सीट जीतला का बावजूद आज 28 नवम्बर ले तय नइखे हो पावत कि केकरा के मुख्यमंत्री बनावल जाव. भाजपा हमेशा ब्लैकमेल के शिकार हो जाले जइसन कि आजु लोकसभा में वक्फ बिल पर बनल जेपीसी के रपट जमा करे के तारीख बढ़ा दीहल गइल. असल में खुद भाजपा के हिम्मत ना हो पावे कि ऊ कवनो दमदार फैसला कर लेव. राहुल गाँधी के नागरिकता के सवालो के एही कायरता के नमूना मानल जा सकेला. आखिर जब ई मुद्दा पिछला कई बरीस से लहकत बा त अतना दिन ले मोदी सरकार करत का रहुवे ? का राहुल का साथे मोदी सरकार के कवनो साँठ-गाँठ बा जवना चलते राहुल का खिलाफ कार्रवाई नइखे कर पावत मोदी सरकार. नेशनल हेराल्ड के मुकदमा लटका के राख दीहल गइल बा. आ महतारी बेटा दुनु जमानत पर घूमत बाड़ें. वइसे कुछ लोग के कहना इहो बा कि मोदी के मालूम बा कि राहुल गाँधी उनुकर स्टार-प्रचारक ना त कम से कम भाजपा के जीत के गारंटी त बड़ले बाड़न. अगर राहुल ना रहसु त पता ना के बन जाई विपक्षी गठजोड़ के नेता ? आ ओकरा से पार पावल शायद भाजपा ला ओतना आसान ना रहि पाई.
खैर मुद्दा पर लवटल जाव. महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 सीट बा आ बहुमत खातिर 145 सीट चाहीं. अबहीं महायुति का लगे 230 सीट बा जवना में शिवसेना के 57 सीट आ राकांपा के 41 सीट निकाल दीहल जाव त भाजपा का लगे महज 132 सीट रह जाई जवन बहुमत से कम होखी. दोसरा तरफ महाविकास अघाड़ी के 46 सीट, सपा का लगे 2 सीट आ निर्दलीय भा दोसर गोल का लगे 10 सीट. लोग कहेला कि राजनीति असम्भव के सम्भव बनावे के कला होले. अगर महाविकास अघाड़ी आ सपा के 48 सीट में शिवसेना के 57 सीट आ राकांपा के 41 सीट मिला दीहल जाव त हो जात बा 146. माने कि बहुमत. आ जब सरकार बनावे चलीहें त निर्दलीयन के समर्थन जुटा लीहल कवनो बड़ बात ना होखी. बाकिर धेयान दीं त केहू एह अंकगणित पर धेयान नइखे देत. चाचा भतीजा में त शायद एका होइयो जाव बाकिर शिवसेना आ उद्धव वाली शिवसेना में एका होखे के उमेद बहुते कम, भा कहीं त ना के बराबर बा. शिन्दे उद्धव के मुख्यमंत्री बनावल ना चहीहें आ उद्धव शिन्दे के. आ एही में सगरी खेल बा. भाजपा का सोझा संकट तबहियें आई जब अजित पवार आ एकनाथ शिन्दे दुनु अलग हो जासु. शिन्दे भाव खाए के सोचिहें त अजित पवार के साथ बहते होखी भाजपा ला. कहीं त एही दिन खातिर भाजपा अपना गरदन में ढोल लटकवले रहुवे. आ अगर ई दुनु जाने पाला बदल लेसु त उद्धव के अपना साथे ले आवे में भाजपा इचिको देर ना करी. आखिर जब शिन्दहीं के मुख्यमंत्री बना के राखे के बा त उद्धव में कवन खराबी बा. उनुके के मुख्यमंत्री बनवा दीही भाजपा.
एही गुणा-भाग का चलते मामिला लटकल बा. वइसे हो सकेला कि कुछ घंटा का बाद जब दिल्ली में महयुति के तीनो नेता भाजपा के आलाकमान से भेंट करीहें तब शायद सबकुछ साफ हो जाई.
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