सरस्वती जी के पूजा माने चेतना के शुद्धीकरण

–डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल

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सोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-24
आइल भोजपुरिया चिट्ठी

सरस्वती जी के पूजा माने चेतना के शुद्धीकरण

लभेरन जब मोबाइल में काकी के चारि गो मिस कॉल देखले त घबड़ाके कॉल कइले. मोबाइल के स्विच ऑफ बुझते ऊ भागल-भागल काकी किहाँ अइले. काकी एकसुरुकिए में आपन कठिनाई बतवली. कहली कि उनुका सामनेवाला  फील्ड में सरस्वती जी के मूर्ति रखाता. कार्यक्रम बड़हन होई आ ओहमें हमरा के मुख्य अतिथि बना दिहल गइल बा. अब बुझाते नइखे कि ओहिजा हम भाषण का देबि. एही से तोहरा के इयादि करत रहलीं हा. हमरा के सरस्वती जी का वंदना खातिर दू गो अइसन श्लोक लिखवा द, जवन अधिकतर पंडीजी लोग के इयादि होखे आ ओकर माने भी.

लभेरन सुनवले-
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनीं
वीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्.
हस्ते स्फाटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितां
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥
‌(उज्जर कांति वाली, ब्रह्म-विचार के परम सार स्वरूप, संपूर्ण जगत में व्याप्त होके विराजमान, वीणा आ पुस्तक धारण करेवाली, डर मिटावेवाली, अज्ञान का अन्हार के दूर भगावेवाली, हाथ में स्फटिक के माला धइले, कमल का आसन पर शोभायमान ओह परमेश्वरी भगवती शारदा के हम वंदना करतानी, जे हमनी का बुद्धि, विवेक आ प्रज्ञा के वरदान देबेवाली हईं. )

या कुन्देन्दु तुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना.
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वंदिता
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥
(जे कुंद फूल, चंद्रमा आ हिम के हार जइसन उज्जर बाड़ी, जे शुभ्र वस्त्र से ढँकल बाड़ी, जे वीणा धारण कइले बाड़ी, जे श्वेत कमल पर आसन जमवले बाड़ी, जे ब्रह्मा, विष्णु आ महेश जइसन देवता लोग द्वारा सदा पूजल जाली, ऊ भगवती सरस्वती हमार रक्षा करीं आ हमरा अज्ञान, जड़ता आ मूर्खता के हमेशा खातिर जरि से खतम करीं. )

काकी एह दूनों श्लोकन के सुनिके बहुत खुश भइली. ऊ पुछली कि सरस्वती जी का हाथ में बीणा बा, उनुकर आसन कमल हटे अउर वाहन हंस आ मोर. एकर का रहस्य बा?

लभेरन के प्रवचन चालू हो गइल. सरस्वती पूजा भारतीय संस्कृति में ज्ञान, विद्या, कला, संगीत आ वाणी का आराधना के पर्व हटे. माँ सरस्वती के विद्या के देवी, वाणी के अधिष्ठात्री, संगीत, नृत्य आ ललित कला के जननी मानल जाला.

पूजा के समय

सब जगह माघ शुक्ल पंचमी (बसंत पंचमी) के दिन सरस्वती पूजा होला. एह दिन के बुद्धि के विकास आ ज्ञान का आरंभ के प्रतीक मानल जाला. एह दिन बच्चन के विद्यारंभ संस्कार भी कइल जाला.

माँ सरस्वती का स्वरूप के दार्शनिक अर्थ

माँ सरस्वती के पूरा स्वरूप प्रतीकात्मक हटे. सरस्वती जी का शुभ्र (सफेद) वस्त्र के प्रतीकात्मक अर्थ हटे- शुद्धता, निर्मलता, सात्त्विक भाव आ निष्काम ज्ञान. सफेद रंग बतावेला कि सच्चा ज्ञान अहंकार, लोभ आ वासना से दूर रहेला.

माँ सरस्वती के आसन हटे शुभ्र कमल. कमल के प्रतीकार्थ हटे कीचड़ में रहियो के निर्मल खिलल, सांसारिक विकार से ऊपर उठल, आत्मिक सौंदर्य आ विवेक. मतलब ई कि विद्या ओकरे के शोभा देले, जे संसार में रहिओ के सांसारिक मोह आदि से अलग रहे.

सरस्वती जी के चार गो हाथ बाटे. चारों हाथ मानव चेतना का चारि गो अवस्था के प्रतीक हटे— मन, बुद्धि, चित्त आ अहंकार. जब ई चारो अवस्था ज्ञान से संयमित हो जाले, तबे विद्या प्रकट होले.

सरस्वती जी का एगो हाथ में वीणा होले. वीणा के प्रतीकार्थ हटे- कला आ संगीत, लय आ संतुलन आ जीवन के सामंजस्यपूर्ण ध्वनि. जइसे वीणा के तार ठीक संतुलन से मधुर स्वर उत्पन्न करेला, ओइसहीं जीवन में संयम आ अनुशासन से ज्ञान फलित होला.

सरस्वती जी का दुसरका हाथ में पुस्तक रहेला. एकर प्रतीकार्थ हटे- शास्त्रीय ज्ञान, अध्ययन आ निरंतर अभ्यास. एकर मतलब ई भइल कि ज्ञान खाली अनुभव से ना होखे, एकरा खातिर पढ़ाई आ चिंतनो  करेके परेला.

सरस्वती जी का तिसरका हाथ में जपमाला रहेले. एकर प्रतीकार्थ हटे- साधना, एकाग्रता आ आत्मसंयम. विद्या तबे पूर्ण होले, जब ओकरा सङे साधना आ अनुशासनो  होला.

माँ सरस्वती के वाहन हंस मानल जाला. हंस नीर-क्षीर विवेक के प्रतीक हटे. मतलब कि सरस्वती के आराधक सही आ गलत में भेद करे में पूरा समर्थ होले. उनुका सामने ई स्पष्ट रहेला कि का करेके चाहीं आ का ना करेके. माँ सरस्वती के एगो वाहन मोरो के मानल जाला. मोर के प्रतीकात्मक अर्थ हटे- सौंदर्य, गर्व आ अहंकार पर नियंत्रण अउर विवेक. मोर जहरीला सर्पन के पचा लेला. एकर मतलब ई भइल कि विद्या अहंकार आ विषो के विवेक में बदल सकेले.

सरस्वती जी का सङे बहत पानिओ लउकेला. एकर प्रतीकार्थ हटे- निरंतर प्रवाह, चेतना के धारा आ ज्ञान के विस्तार. माने, जइसे ठहरल पानी सरि जाला, ओइसहीं ठहरल बुद्धिओ (जड़ बुद्धि) समाज खातिर उपयोगी ना रहि जाले.

एह तरह से कहल जा सकऽता कि सरस्वती पूजा के सांस्कृतिक संदेश बाटे ज्ञान के पूजनीय बनावल, शिक्षा आ कला के संस्कार से जोड़ल अउर विद्या के विनय आ विवेक से युक्त कइल. सरस्वती जी के पूजा का व्याज से व्यक्ति अपना चेतना के शुद्ध करेला. एह तरह से सरस्वती जी के पूजा विशेष अर्थ में चेतना के शुद्धीकरण हटे.


संपर्क : डॉ. रामरक्षा मिश्र विमल, निकट- पिपरा प्राइमरी गवर्नमेंट स्कूल, देवनगर, पोल नं. 28
पो.- मनोहरपुर कछुआरा, पटना-800030 मो. 9831649817
ई मेल : rmishravimal@gmail.com

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