श्रेणी: कविता

गज़ल

– शशि प्रेमदेव जेकरा पर इलजाम रहल कि गाँछी इहे उजरले बा! फल का आस में सबसे पहिले ऊहे फाँड़ पसरले बा! दूर से ऊ अँखियन के एतना रसगर लगल, लुभा गइलीं हाथ में जब आइल त देखलीं कउवा ठोढ़ रगड़ले बा. प्यार से बढ़ि के दोसर कवनो ताकत...

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तोंहे गीत कऽ कसम

– अक्षय कुमार पाण्डेय आन्हीं में, पानी में, जरत रहे दिया, हिया माने ना हार, जिया ठाने ना रार – तोंहे गीत कऽ कसम. धीरे धीरे जमल अन्हार कुल्ह पघिल जाई सोन किरिन आके जब धरती से मिल जाई. चढ़ ऊपर, ऊपर चढ़, थाके ना जोर...

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गज़ल

– मिथिलेश गहमरी जरूर चाँदनी बिहँसी सुतार होखे दीं, उदास चान के गरहन से पार होखे दीं. बन्हाई काँहे ना जिनगी क पीर मूट्ठी में, हिया के पीर त अउरी सयार होखे दीं. इहे बा साँच कि, ओहारो बेच के खइहन, हुजूर, डोलीके उनके कहाँर...

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हम अइना हर आँगन क

– डा॰ कमलेश राय हम अइना हर आँगन क हर चेहरा के रखवार हईं राख सहेज त एगो हम, तोरऽ त कई हजार हईं. हिय में सनेह से राखी लां दुख के पीड़ा सुख के उछाह निरखी ला रोज थिर रहि के, जिनिगी के सगरी धूप छाँह. छन में अधरन के मीठ हँसी, खन...

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वाणी वन्दना

– शिवजी पाण्डेय “रसराज” हाथ जोरि करतानी बिनति तहार, मईया शारदा. सुनी लिहितू हमरी पुकार, मईया शारदा.. गरे कुंड हार शोभे, श्वेत रंग सारी, नीर क्षीर जाँचे वाला हंस बा सवारी, बीनवा बजाई के जगइतू संसार, मईया शारदा....

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