एगो छप्पन इहो – बतंगड़ 107
एगो छप्पन इहो – बतंगड़ 107 छप्पन के कई गो खासियत होला। कतहीं छप्पन भोग के आनन्द लीहल...
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Read Moreकुकुरन के रोटी खियावत रहे के चाहीं – बतंगड़ 106 आ जब हम कहऽतानी कि कुकुरन के रोटी...
Read Moreखेड़ा का बहाने पेड़ा के चरचा – बतंगड़ 105 दुनिया में भोजपुरी भाषा में शुरु होखे वाली पहिल...
Read Moreसोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-40 आइल भोजपुरिया चिट्ठी लागी त लागी, लगवले बानी अन्हरचटकी आजु काकी...
Read Moreके लगवलसि रुपिया आजु ह्वाट्सअप पर एगो पोस्ट मिलल त पढ़ते दिमाग चकराए लागल। बाप रे बाप। ई का होता?...
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