यह लै अपनी लकुटि कमरिया यह ले अपनी सोटी
यह लै अपनी लकुटि कमरिया यह ले अपनी सोटी तेरी बहुत चराई गइया खा कर बासी रोटी। वियोगी होगा पहला कवि...
Read Moreयह लै अपनी लकुटि कमरिया यह ले अपनी सोटी तेरी बहुत चराई गइया खा कर बासी रोटी। वियोगी होगा पहला कवि...
Read Moreउपन्यास-सम्राट प्रेमचंद के इयाद में स्व. कवि विजेन्द्र अनिल के लिखल गीत (रिवरहेड, न्यू यॉर्क, अमेरिका में रहे वाला डॉ कमल किशोर सिंह के सौजन्य से ईमेल से मिलल) [तर्ज-विदेसिया] गोरवन के राज रहे, बिगड़ल समाज रहे। मकरी बीनत रहे...
Read Moreरोवे के रहनी तबले अँखिए खोदा गइल Some life changing events रउरा सोचत होखब कि आज हम कवना बात ला एह...
Read Moreसोस्ती सिरी पत्री लिखी पटना से-52 आइल भोजपुरिया चिट्ठी चले त गाड़ी, नाहीं त हाँड़ी आजु काकी...
Read More