हंगामा काहे बरपल बा?
- टीम अंजोरिया

हंगामा काहे बरपल बा?
Why the cacophony over CAS?

हंगामा है क्यूं बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है,
चोरी तो नहीं की है, डाका तो नहीं डाला?

मथैला देख के ई मत सोचीं कि आजु हम शराब पर, भा राजनीति पर चरचा करे चलल बानी। हम आज शेयर बाजार में मचल कुकुरबझाँव पर बात करे बइठल बानी। कई गो बिजनेस चैनल, बिजनेस अखबार, आ यू ट्यूब चैनलन पर शेयर बाजार में एह सोमार से शुरु भइल बंद भाव तय करे के नया तरीका पर मचल हंगामा सुननीं बाकिर कतहीं ई तर्क ना त देखनी ना सुननी जवन हम आज रउरा सभे का सोझा भोजपुरी में बतियावे आइल बानी।

मुद्दा ई बा कि सोमार 3 अगस्त से शेयर बाजार में कुछ स्टॉक्स आ इंडेक्सन के बंद भाव (closing price) तय करे ला करीब करीब वइसने तरीका ले आवल गइल बा जवना तरीका से पिछला कई दशक से बाजार के खुला भाव (open price) तय होखत आइल बा। तब त केहू के दिक्कत ना होखत रहुवे कि बाजार अतना गैपअप भा गैपडाउन काहे खुलत बा? अब जब गैपअप बन्द होखे लागल बा त हाहाकार मचा दिहले बा लोग। जरुरी नइखे कि रोज गैपअपे बन्द होखल करी। कबो गैप डाउनो बंद होखी जइसे खुला भाव तय करत घरी होखेला।

विद्वान लोग बतावे के खुला भाव तय करे आ बंद भाव तय करे का तरीका में कवन अन्तर बा। जस रहलऽ हो कुटुम्ब, तस पवलऽ हो कुटुम्ब! जइसन रहलऽ वइसने हीत-नात भेंटा गइल त चिचियाये काहे लगलऽ ?

असल कारण बा कि आप्शन बेच के बरीसन से कमाई करत आइल आप्शन बेचेवालनो के अब आप्शन के अनिश्चितता परेशान करे लागल बा। जब ले आप्शन खरीदे वाला नुकसान उठावत रहलें तबले ई लोग मजा काटत रहुवे। अब तनिका दिक्कत का आ गइल कि हंगामा मच गइल बा। एहिजा इहो साफ क दीहल जरुरी बा पुट आप्शन बेचल आ कॉल आप्शन खरीदल करीब करीब एके जइसन होखेला। विस्तार में गइला पर कई तरह के अन्तर मिली बाकिर एहिजा हम संक्षेप में कहे के कोशिश करत बानी।

पहिलहीं दसियन साल से शेयर के खुला भाव अइसने तरीका से तय होखत रहुवे। नौ बजे प्रीओपन मार्केट में लोग आपन आपन बोली लगावत रहुवे। नौ बज के सात मिनट से आठ मिनट का बचे अचके में ई बन्द हो जाला आ ओकरा बाद तय होला कि कवना भाव में ई शेयर खुलल। बंद करे का बेरा बंद भाव वीवैप (Volume Weighted Average Price) होखत रहुवे। एह तरीका में भारी कारोबार करे वाला खिलाड़ी बंद भाव पर अपेक्षाकृत अधिक असर डाल सकत रहलें। बाकिर खुला भाव में ई सहूलियत ना त कबो रहल बा ना आज बावे। अब बंद भाव करे ला उहे भा वइसने तरीका लगा दीहल गइल बा जवन खुला भाव खातिर अपनावल जाला। CAS पर बवाल मचावे वाला कबो प्री-ओपन मार्केट पर सवाल ना उठवलन।

शेयर के चालू भाव (traded price) हमेशा खरीदे वाला आ बेचे वालन का बीच होखत आइल बा। खुला भाव आ बंद भावो एही दू फरीकन का बीच तय होखेला। सवाल बड़का खिलाड़ी आ छोटका खिलाड़ी के बीच के नइखे। असल खेल त बड़का खिलाड़ियन से तय होखल करेला। केहू कॉल आप्शन सेल करत बा त पुट आप्शन सेल करे वाला उनुका से कवनो मामला में अनइस ना होखस। बड़का खिलाड़ी हमेशा से बीन बजावेलें आ छोटका खिलाड़ी ओह धुन पर नाचल करलें। पहिले का तरीका में आप्शन बेचे वाला फायदा में रहत रहलन। अब उनहूँ का मन में संशय हो गइल बा कि बाजार कहँवा बंद होखी? पलक भर में लाखन के सौदा सिफर बन जात बा त हाहाकार मचा दिहले बा लोग। बेचारा छोटका खिलाड़ियन के हजारन के नुकसान पर सबका सवाद आवत रहुवे।

उमेद करत बानी कि एक्सचेंज आ सेबी एह हंगामा का दबाव में ना अइहें आ CAS प्रणाली बंद ना कइल जाई भा एकरा में कवनो बदलाव ना कइल जाई। अगर करहीं के बा त खुला भावो ओही तरीका से तय होखे के चाहीं जवना तरीका से बंद भाव तय होखे। आज बाजार जहाँ बंद भइल अगर काल्हुवो ओहिजे से खुले तब का होखी एह पर सोच के देखीं। ना त शेयर बाजार लगातार खुला राखल जाव। ना त बंद भाव होखे ना खुला भाव। बस चालू भाव रहल करे। बाकिर हमहूं जानत बानी कि ई दुनु तरीका व्यावहारिक ना होखी।

बाजार के चाल अनिश्चित हो सकेला, बाकिर भाव तय करे के व्यवस्था साफ, निष्पक्ष आ भरोसा जोग होखे के चाहीं। CAS अगर ई काम पहिले से नीमन ढंग से करत बा त खाली कुछ खिलाड़ियन के पुरान सुविधा बचावे खातिर एकरा के हटावल ठीक ना होखी।

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