हत्यारा
- - दयानंद पांडेय

हत्यारा

तूं अइसे भेंटाइल रहलू जइसे कवनो मछुआरा के बिना जाल डलले मछरी भेंटा गइल होखे। मछुआरा का हाथ में अइला का बादो तू मरलू ना। काहें कि जइसे एगो पानी से निकल के दोसरा पानी में आ गइल होखो। त मरे कइसे भला। तोहरा शायद जरुरतो रहल ओह पानी से निकल के दोसरा पानी के। अइसे जइसे कवनो बहत नदी दोसरा नदी में मिले आइल होखे। पानी बदलल, मछरी के जिनिगी कइसे बदलेला ई हम तोहरा साथे पानी बन के जननी। तूं त कवनो पोखरी का पानी से निकल के नदी में आ गइल रहलू। ओह पोखरी के जल सड़ाँध मारे लागल रहे आ ओह पानी में तोहार जीयल मुश्किल हो गइल रहुवे। ई तूंही बतावत रहलू। एही चलते छटपटात हमरा से मिलल रहलू। पानी बदले के तोहार ई छटपटाहट, ई बेचैनी अस तेज रहल कि हम एकरा के प्यार समझे लगनी। मरद अइसन धोखा में अकसरहाँ आ जालें। हमहूं तोहरा प्यार में आ गइल रहीं। बाकिर मेहरारू मछरी बन के कवनो मछुआरा के मझदार में छोड़ के फेरु कवनो दोसरा पानी में आपन जिनिगी खोज लेलीं सँ। मछरी खुल के मिलेली सँ, हँस के मिलेली सँ। लोग धोखा खा जाला आ ऊ आहिस्ता पानी बदल लेली सँ।

बाकिर पानी ?

जवन पानी कवनो मछरी के आपम जीवन बना लेले होखो, आपन संसार आ सर्वस्व बदल लेले होखे ओकरा ला बहल बहुत मुश्किल हो जाला। पानी के तलहटिओ ओकरा लहरन के बाँध-बाँध लेली सँ। आगे ना बढ़े द सँ।

तूं हमरो जाल में एही चलते ना रहलू। बहुत बाद ई बुझाइल रहुवे कि मछुअरवे मछरी का जाल में रहुवे। बाकिर ई जाल बहुते बरियार रहल। त का तूं बहेलिया रहलू। प्रेम के दाना बिछा के ऊपर जाल डाल देले रहलू ? प्यार के जाल। कतना त जाल रहली सँ तोहरा लगे। मोह के , देह के , नेह के , आशा , उमंग अउर अभिलाषा के। जनमदिन तोहार होखे, हमार होखे मनावत संगही रहनी सँ। सगरी अड़चन , सगरी जकड़न तूड़ के मिलत रहनी सँ। मिललके जनमदिन मनावल रहत रहुवे। मौका कवनो होखे प्रेम के पान हमनी का खाइए लेत रहनी सँ। ई पानी आ मछरी के रिश्ते रहल कि मिलते हमनी का बहे लागत रहनी सँ। सगरी बहाना पानी में दहा जात रहली सँ। हमनी के प्यार सयान हो जाइल करे। दुनिया जानियो के ना जान पावत रहल। मछरी पाले वाला जानेलें कि पोखरी अगर कवनो रेल पटरी का किनारे होखो त मछरी जल्दी से बड़ हो जाली सँ। रेल गुज़रत रहेली सँ, रेल के आवाज़ सुन के मछरी दिन-रात ना देखत, पँवड़त रहेली सँ, लगातार आ बड़ होखत जाली सँ। हमनियो के प्यार अइसने कवनो रेल का पटरी का किनारे के पोखरी रहल। बढ़ते गइल। अतना बढ़ल कि मछरी बहुते बड़ हो गइल आ अपना पानी से बाहर निकल गइल।

हमनी का जब मिलल रहीं त लागल रहल कि हमनी के भाषा अलग-अलग बा। इच्छा अउर कामना अलग बाड़ी सँ। ना तूं हमार भाषा जानऽ, ना हम तोहार। बिलकुल अनजान आ अजनबी भाषा। तबहियहों मिलत रहनी सँ। शौक़ अउर समझो अलहदा। हाथ में हाथ लिहले एक दिन तूं अचके बोललू, ‘ आज नाव पर घूमल जाव।’ फेर भाड़ा पर नाव लिहनी सँ। दिन भर के पिकनिक मनवनी सँ ओह नाव पर। नाव वाला दाम त भरपूर लिहलस बाकिर हमनी के दिन बना दिहलस। कतना त गाना गवले रहलू तूं।

याद बा ?

हम चाहत रहनी कि नाव वाला शहर के सरहद छोड़ कतहीं दूर देहात ओर चले। पहिले त तूं चुप रहलु। अचके बोलली, ‘ आज ना। कहियो दोसरा दिने। ‘ तोहार ख़ासियत रहल , कम में बोलल। कम बोले वाली नेहरारू बहुते नीक लागेली सँ हमरा। तोहार इहे एक बात हमरा ला बहुते नीमन लागे कि तूं कबो कवनो बात पर लड़त ना रहलू। सिर्फ़ फ़ैसला दे दिहत रहलू कवनो न्यायाधीश का तरह।

तूं अतना रूपवती रहलू, अतना गोर, अतना अबोध कि तोहरा के निरखे त ना बाकिर छुए में तनी डर लागत रहल। तोहरा रूप के अतना जोर रहल करे कि तोहरा के देख के आइना टूट जाव। चांद के अँजोरिआ में नदी के धार में तोहार गोराई जइसे हमरा के बोला लेव कि आवऽ हमरा से लपटा जा। लिपट के लागे कि कवनो गुनाह त ना कर दिहनी। हमनी के प्यार के धार पर नदी के धार न्यौछावर हो जाइल करे। हवा का तरह हमनी के गुनाहो लुका जात रहल। बाकिर प्यार के दीया बुताव ना। जलते रहे। मद्धिम – मद्धिम।

एह सेल्फी युग में तूं कबो हमरा साथ के कवनो फोटो अपना मोबाइल में ना राखत रहलू। फ़ोटो खींचतू, देखतू , हमरा के देखवतू आ चट से मिटा देत रहलू। ई हमरा बहुते बाउर लागे। तूं हमरा बाउर लगला के कवनो परवाह ना करत रहलू। ई डर रहल कि एहतियात ? वाट्सअप चैटो मिटा आ मिटवा देत रहलू। कवनो रिकार्ड ना रहे देत रहलू। गजबे के प्यार रहल ई। टूट के मिलल आ अचके चल दीहल। कई बेर शको होखे कि सिजोफ्रेनिया के मरीज त ना हऊ। ना रहली। बाकिर रहलू त अइसने। हीं थी। पर थी ऐसी ही।

हमरा जनमदिन पर एक बेर तूं हमरा के एगो कलाई घड़ी दिहले रहलू। कहलू कि ई तोहफा ना ह,प्यार हवे। हमरा सिगरेट पीयला पर तोहरा बहुते एतराज रहल। बाकि जब तोहरा पता चलल कि पाइप पीये के हमार मन करत बा त तूं एगो ना, दू गो पाइप हमरा के बतौर प्यार दिहले रहलू। कहलू कि जब-जब तूं एहनी के अपना होंठ से लगईबऽ. समझब कि हमार होंठ, तोहरा होंठ से मिलत बाड़ी सँ। आ हम तोहरा ला सुनगे लागब। तूं हमरा लगे दउड़त चल अइबऽ। गजबे के तलब रहुवे ई तोहार। अजबे रहल तोहार इसरारो। बाकिर कुबूल त रहबे कइल हमरा। तोहरा एकदिन लागल कि हमार नौकरी छोटहन बा त तूं एगो बड़हन कंपनी के चेयरमैन से कह के हमरा के बढ़िया नौकरी पर लगवा दिहलू। बढ़िया सेलरी का साथे कंपनी का तरफ से हमरा कार वगैरह के सुविधो हो गइल। हमरा से बेसी खूश तूं हो गइलू। अइसने अनेके छोट-मोट सुविधन से तूं हमरा के लादत गइलू। कहे ला त हम बहेलिया रहनी, तूं चिड़िया। अइसन तूंही कहत रहलू। बाकिर अब चिरई के जाल में बहेलिया रहुवे। कवनो बहेलिया का जाल से चिरई त तबहियों निकल सकेले। केहू निकाल सकेला। बाकिर चिरई के जाल से निकालल ?

नामुमकिन।

केही मानिये ना सके कि चिरइओ जाल बिछा सकेले त भला निकली कइसे। निकले के सोचबो कइसे करी ? बाकिर तूं जाल रहलू। पानी का निचहीं, पानी का ऊपरो।

तोहरा अफ़सर पति का लगे तोहरा ला समये ना रहल। बेटा कहीं बाहर पढ़त रहुवे। त तोहरा कवनो मरद का साथे समय बितावे के तलब लागल। हमरा जइसन मछुआरा से बढ़िया के भेंटाइत तोहरा । बेक़रारी में पहिले इसरार करतू। क़रार आवे लागल त आहिस्ता-आहिस्ता तूं हुकुम देबे लगलू। एहिजा आवऽ। ओहिजा आवऽ। त कबो घरहीं आ जा। हमरो नीक लागत रहल तोहार ई बोलहटा। लागे जइसे तोहरे ला जनमल होखीं हम। तूंही हमार जिनिगी हऊ। तूंं ही हमार मकसद। तूं ही हमार सब कुछ। सर्वस्व तूंही। नितांत निजी मौकनो पर तूं हमरा के अइसे दुलरावत रहलू जइसे हमार तोहार दूध पिअना बेटा होखीं। तूं हमार महतारी। तोहरा गोदी में पटाइल, खेलल आ तोहरा के पावल हमार सौभाग्य बन गइल रहल जइसे। मन ही मन भगवान के पूजल करीं हम। लाख-लाख शुक्रिया दिहल करीं। तूं अतना खिआवत-पिआवत रहलू कि हमरा ख़ुद अपने से जरतवाही होखे लागल रहुवे।

तूं शायद शहर के गिनल-चुनल सुन्नर मेहरारुवन में रहलू। धनवानो रहलू। सलीक़ेदारो। एहू ले बड़ बात रहल कि हमार सौभाग्य बन के हमरा जिनिगी में हाजिर रहलू। तोहरा जतना सुख हमरा कवनो दोसर मेहरारू ना दिहलस। कबो उहो दिन रहल कि तोहरा के देखिये के खुश रहल करीं। तोहरा के छूए से डर लागल करे। बाकिर ऊ कहल जाला नू कि, सरकती जाए है रुख़ से नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता। हमरो डर आहिस्ता-आहिस्ता सरकत गइल। एक दिन तोहरा के सहसे छू लिहनी। अइसे जइसे कवनो अँजोरिआ के छू लिहले होखीं। कवनो बहत वेगवती धारा के थाम लिहले होखीं। समय के शिला बना दिहले होखीं। समय जइसे थथम गइल होखो। मन में एगो नया मिठास जस घोरा गइल। अइसन स्वाद मिलल जइसन पहिले कबो ना मिलल रहुवे। सोना-चांदी जइसन दिन हो गइल। बाकिर ऊ कहाला नू कि इश्क़ आ मुश्क लुकवले ना लुकाव। ऊपर से तोहरा सुन्दरता के सुगंध वइसहीं केहू से लुकाइल ना रहल। इश्क़ के सुगंधो ना छुपल। इश्क़ रहल कि कुछ अउर, ई तब ना तोहरा पता रहल, ना हमरा। बाकिर लोग-बाग के बहुते कुछ मालूम हो गइल रहल।

हमार तोहार आशिकि के खबर तोहरा मरदो ले चहुँपल। अइसन एक बेर तूंही बतवले रहलू। हमार लागल कि तूं अब हमरा से बिलग हो जइबू। दूर हो जइबू, ई डर लागे लागल रहल। बाकिर देखनी कि अब तूं हमरा के लेके बहुते पजेसिव रहे लागल रहलू। अतना कि हमहीं परेशान होखे लगनी। कई बेर कवनो ड्रोन कैमरा का तरह काम करत रहलू तूं। हमार अतना कुछ तोहरा जानकरी में रहल करे। जाने कतना जासूस रहलें तोहरा लगे। खास कर अगर शहर में कवनो मेहरारू से हमार भेंट हो जाव त तोहार जासूसी देखल बने। बुझाव जइसे केहू तोहार द्वारिका लूट ले गइल होखे। बुझइबे ना करे कि तूं अतना पजेसिव काहे रहलू ?

हम रहनी के तोहार ?

तोहरा प्यार के साम्राज्य के एगो मामूली नागरिक ?

तोहार प्यार हमरा मे उछाल मारल करे। बाकिर तोहार साम्रज्यवादी रवैया काट खात रहुवे। तोहार ज़रूरत से अधिका पजेसिव रहल हमरा बाउर लागे रहल। कवनो किडनैपर जइसन व्यवहार हो गइल रहुवे तोहार। खुल के त ना बाकिर चुपचाप तोहरा हुकुम के तामील करे से बाचे लगनी। नतीजा भइल कि आफिस में हमरा बेवजह के नोटिस मिले लागल। अचानके इंक्वायरी शुरू हो गइल। एगो दोस्त से तूं खबर पेठवलू कि कि आ के हमरा से मिलऽ। सब ठीक हो जाई। दोस्त ई सब हमरा से कहलसि आ बतवलस कि, ‘भाभी जी से जा के भेंट काहें नइखऽ कर लेत? शायद ठीक करवा देस।’ हम ओकरा के बतवनी कि, ‘भाभिए जी ई सब करवा रहल बाड़ी।’ त ओकर माथा ठनकल। बोलल, ‘ का कहत बाड़ऽ ? ‘ हम कहनी , ‘ ठीके कहत बानी।’ कह के फ़ोन रख दिहनी। शहर में अधिकतर लोग तोहरा पति के प्रतिष्ठा आ तोहार सुंदरता देखत तोहरा के भाभी जी कहल करे। हमहूं सबका सोझा तोहरा के भाभिए जी कहल करीं। बाकिर कहल जाला नू कि हुस्नो इश्क़ के संगम कहिया ले ? बुझाए लागल कि अब हमार सफर खतम होखे वाला बा। एहू चलते कि तूं बिसरा दिहले रहलू कि जुल्म आ जबर से काम ना चले। तोहार नइखीं जानत बाकिर हम एह राह के नया मुसाफिर रहनी। चाहत का चोट से अब बचाव के तरकीब खोजे लागल रहनी। कुछ दूर साथ चल के हमनी का बिछड़े वाला मोड़ पर खड़ा हो गइल रहनी सँ। तोहार एगो वाट्सअप संदेश के जवाब भेज दिहले रहनी : ‘ सगरी भाव , सगरी भावना , भंगिमा आ सगरी संभावना गोमती में विसर्जित कर के तोहरा के आजाद कर के अपनो के आजाद कर लिहले बानी। बहुते जी लिहलू तूं हमरा के।’ तुम्हारा रिप्लाई आइल रहे , ‘ सब भूला द। लव यू ! प्लीज आ जा !’

बाकिर हम ना गइनी तोहरा से मिले। तूं कुछ अउर लोग से सनेसा पठवलू। हम खामोशे रहनी। तूंं हमरा के फोन पर, वाट्सअप पर वाट्सअप संदेश भेजल करऽ कि एक बेर त आ के मिल ल। हमरा घरहू गइल रहलू एक दिन। संजोग से हम रहनी ना तब। घरे चहुँपला पत तोहरा अइला के खबर मिलल रहल आ मिल लेबे के सनेशो। ना गइल रहनी तोहरा से मिले। कड़ेर हो गइल रहनी। कह सकेलू निर्मोही। आख़िर हम रहनी के तोहार?

प्रेमी ? सेक्सटीशियन ? जिगोलो ?

ना जानत रहनी कि तोहरा से, तोहरा प्यार से बगावत अतना भारी पड़ जाई। दोसरा दिने पता चलल कि तूं अपना हाथ के नस काट लिहले बाड़ू। अस्पताल ले गइल लोग। डॉक्टर मरल घोषित कर दिहलें। तोहरा मरद के रूआबो कुछ कामे ना आइल। तूं आत्म हत्या करे से पहिले लिख गइल रहलू कि हम तोहरा से मिले ना अइनी, एहसे तूं दुनिया से जात बाड़ू। तोहार मरद फोन कर के हमरा के बतवलस आ डपटत कहलस, ‘ अतना बिजी रहलऽ कि अइलऽ ना ? ‘ जोड़ले रहस, ‘ तूं हमरा पत्नी के हत्यारा हउवऽ ! ‘

हम घर छोड़ के ना गइनी कहीं। पुलिस के आवे के इन्तजार कइनी। पुलिस ना आइल। वाट्सअप पर तोहरा अंत्येष्टि के समय के जानकारी आइल। गइनी। लोग बाग हमरा के घूरलन। बाकिर हम एकर परवाह ना कइनी। तोहरा मरद के अँकवारी में भरत तोस दिहनी। पुक्का फाड़ के रोवनी। उहो रोवलस। एक दोसरा के ढाढस बधवनी जा। तोहरा पार्थिव शरीर पर फूल चढ़ा के तोहरा के अंतिम प्रणाम कइनी। राखल चाहत रहनी फूल से तोपाइल तोहरा गाल पर आपन गाल आ रोवल चाहत रहनी तोहरा देह से लिपट के। बाकिर लोग के आँख धधकत रहुवे। मसानघाट पर प्यार से बड़ होला लोकलाज। से रुक गइली। तोहरा गोड़ पर माथ रख के अपना लोर के जलअर्पण कइनी। जइसे सूरज के अरघ दिहले होखीं। तू हमरा प्रेम के सूरजे त रहलू। हमरा के प्यार के चांदनी में नहावत हमार चंद्रमो रहलूी तूं। लागल जइसे तोहरा धधकत चिता में हमहूं जरत बानी। तूं त अग्नि आ पानी मे समा गइलू। तोहार अस्थियो बहा दिहल गइल कवनो दोसरा पानी में समाए ला। का पता बहत-बहत सागर के पानी मे मिल जा। गंगासागर में। पानी बदले के अभ्यास बा तोहरा। बाकिर तोहरा मन के ई मछुआरा अब कहवाँ जाव। तोहरा प्रेम जाल से कइसे निकलीं ? कतना अभागा बानी, अपराधी बानी कि तोहरा प्यार, तोहरा चाहत के कद्र ना कर पवनी। अपना के समर्पित ना कर पवनी। तोहार मरद ठीके कहलन कि हम तोहार हत्यारा हईं।

(हिन्दी कहानी के भोजपुरी अनुवाद)

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