दीपांशु शौकीन के शानदार जीत के माने
- टीम अंजोरिया

दीपांशु शौकीन के शानदार जीत के माने

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संगठन के 2026 चुनाव एगो बड़हन संकेत दे रहल बा। सवाल बा कि देश के राजनीतिक दल नवहियन के मूड कब समझिहें। हर बार का तरह काग्रेस से जुड़ल छात्र संगठन नेशनल स्टूडेंट्स एसोसिएशन ऑफ इण्डिया (एनएसयूआई)अपना हार का बाद दावा कइलसि कि ऊ हारल नइखे। ई ओकर नैतिक विजय हवे। शायद ई कि ओकर नैतिकता एहसे जुड़ल नइखे कि ऊ चुनाव जीतबे करे। ऊ त बस एहीसे खुश बावे कि ऊ जोरदार टक्कर दिहलसि आ ओकरा विचारधारा से आवे वाला स्वतंत्र उमीदवार दीपांशु शौकीन रिकार्ड तोड़ जीत हासिल कर देखवलस। दीपांशु 13705 वोट के बड़हन अन्तर से संघ के आनुसांगिक संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) के उमीदवार के हरा दिहलन।

अभाविप दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ के अध्यक्ष, सचिव, आ संयुक्त सचिव पद पर जीत हासिल कइलसि। बाकिर उपाध्यक्ष पद पर ओकर उमीदवार एगो असंबद्ध उमीदवार से हार गइल आ उहो बड़हन अन्तर से।

सवाल बा कि दीपांशु के जीत के माने का निकालल जाव? का ई राहुल गाँधी के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के सफलता मानल जाव। आ ई मानल जाव कि नवहियन में आजाद विचार वाला कवनो राजनीतिक दल से असंबद्ध रहला के एगो अलगे ताकत मौजूद बा। बाकिर का होखीत अगर दीपांशु एनएसयूआई के अधिकृत उमीदवार का तौर पर लड़ल रहतन। का तब उनकरो हाल उहे भइल रहीत जवन एनएसयूआई के बाकी उमीदवारन के भइल?

बतावल जात बा कि दीपांशु के लोकप्रियता अतना रहुवे कि ऊ कांग्रेस के नवही नेता कन्हैया कुमार के हवा बिगाड़ सकत रहलन। कांग्रेस का तरफ से एह चुनाव के जिम्मा कन्हैया कुमार के दिहल रहल कि ऊ अपना छात्र संगठन के जीत दिआवस। आ उनका लागल कि दीपांशु अगर जीत जइहें त पार्टी में उनकर पकड़ कन्हैया से बेसी हो सकेला। ठीक ओही तरह जइसे बिहार चुनाव में लालू प्रसाद खूंटा गाड़ दिहले रहलन कि कवनो कीमत पर कन्हैया कुमार आ पप्पू यादव के जीते ना दिहें। काहे कि उनुका अपना बेटा तेजस्वी का सोझा कवनो दोसर नवही नेता के उभार ना होखे दिहें।

दीपांशु बतौर एनएसयूआई उमीदवार चुनाव लड़ल चाहत रहलन बाकिर जब उनका के उमीदवार ना बनावल गइल त ऊ विद्रोह कर दिहलन आ स्वतंत्र उमीदवार बन के चुनाव लड़लन। ईहे विद्रोह उनकर लोकप्रियता अउर बढ़ा दिहलस आ नवही उनका साथे खड़ा हो गइलन। हाल ही में दिल्ली के एगो हॉस्टल सत्य निकेतन के भरभरा के गिरला का चलते अनेके छात्रन के दर्दनाक मौत हो गइल रहल आ एह मुद्दा पर दीपांशु न्याय सत्याग्रह अभियान चला के नवहियन में आपन पकड़ बना लिहले रहलन।

सवाल इहो बा कि संघ के आनुसांगिक संगठन अभाविप के कवन बीमारी धर लिहले बा। का सत्ताधारी दल से करीबी का चलते अभाविप आलसी हो गइल बावे। हाल ही में छात्रन के अनेके समस्या सामने आइल बाकिर एह समस्यन के लेके अभाविप कवनो अभियान चलवलस त दूर अभियान चलावे के कोशिशो कइलस का? ना। ऊ अब सत्ता के मलाई चाटे में लागल बावे। ना त दुनिया के सबले बड़हन छात्र संगठन होखे के दावा करे वाला अभाविप के अइसन हालत ना होखित।

एगो कहावत ह कि बरियार के साला बने ला लोग आतुर हो जाला बाकिर कमजोर के बहनोइओ बने में अनिच्छा देखा देला। चूंकि एनएसयूआई हार गइल त ओकर पक्ष देखे वाला लोग कम रही आ अभाविप के जीत पर बैंड बजावे में शामिल रहे वालन के कमी ना होखी। बाकिर समय रहते अगर संघ ना चेतल त ओकर पराभव हो सकेला आ ई बात देश समाज राष्ट्र ला घातक साबित होखी।

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