आखिर खरीदत के बा?
- टीम अंजोरिया

आखिर खरीदत के बा?

हो सकेला कि ई सवाल रउरो दिमाग में उठत होखे। आ इहो हो सकेला कि माथा अतना खराब हो चुकल बा कि शेयर बाजार का तरफ देखहीं ना चाहत होखब। दुनु हालत में ई सवाल लाजमी बा कि आखिर खरीदत के बा?

ऊपर दिहल चार्ट में छह गो स्टॉक के प्राइस लाइन देखावल गइल बा। कुछ बड़हन चोटी बना के नीचे गिरत बा त कवनो पहाड़ी रास्ता का तरह हिचकोला खा रहल बा। बात सही बा कि – हर दिन रहत न एक समाना। आ शेयर मार्केट में त हर दिन के कहो हर क्षण माहौल बदलत रहेला। जेकरा लागेला कि दाम बढ़े वाला बा ऊ खरीदेला आ जेकरा मन में डर समाइल होखेला ऊ बेच के फारिग होखे का अंदाज में संतोष कर लेला। आ ठीक एकरा उलटा उहो लोग होला जे जब बाजार गिरल शुरु कर देला त किश्तन में खरीदल शुरु कर देलें आ जब बाजार चढ़े लागेला त किश्तन में बेचत जालें। मकसद सभकर एके होला – मुनाफा कमाइल आ आपन नुकसान कम से कम पर रोकल।

शेयर बाजार अइसन जगह जवना के तुलना रउरा ओह बाजार से कर सकिलें जहाँ कुछ लोग पान के गिलौरी मुँह में दबवले शान से आवेला त कुछ लोग मुँह लुकावत। आ एहसे बहुते बेसी लोग बाजार का तरफ देखबो ना करस। इहो सही, उहो सही, आ ऊ अउरो सही। बाकिर बाजार में कुछ लोग, कुछ संस्था अइसनो होली सँ जे बाजार के अपना धुन पर नचावे में महारत हासिल कइले होला। त कुछ लोग बाजार के लय पर आपन धुन रचे-बनावे में लागल रहेलें।

बाजार कबो सपाट ना रहेला। आ अगर कुछ दिन से सपाट रह गइल त समझ लीं कि या त बड़हन उछाल मारी ना त गहिरे कूद जाई। बाजार सपाट रहिये ना सके ठीक ओह नशेड़ी का तरह जे अपना नशा से ढेर दिन ले दूर रहिये ना पावे। एगो कहावत रउरो सुनले होखब – बुड़बक का लगे धन होखे त चाल्हाक खइला बिना ना मरे। शेयर बाजार zero sum game हवे। हारेगा जब कोई बाजी तभी तो होगी किसी की जीत। दोस्त यही दुनिया की रीत! अगर रउरा नुकसान भइल बा त ओह नुकसान के बड़हन हिस्सा केहू कमइले जरुर बा। छोटहन हिस्सा त ब्रोकर आ सरकारन का खाता में जाहीं के बा। रउरा मुनाफा होखे भा नुकसान उनुका त आपन चार्ज आपन टैक्स वसूलहीं के बा।

आजु एही सवाल के खोजत हम कुछ बतियावल चाहत बानी। बाजार में बिकवाल आ लिवाल, bears and bulls, का अलावा एगो अउर प्रजाति होले – market makers के। ई लोग ना त खरीदत होला, ना बेचत होला। एह लोग के काम बस इहे होला कि जबे बाजार थथमत लउके एगो ढेला फेंक के हलचल पैदा कर देबे के बा। ढेर देर ले कवनो सौदा नइखे भइल त ई एगो भा दू गो शेयर खरीद भा बेच देलें। एह लोग के कुछ जाव ना। ई लोग तनखाह पर काम करेला। कमीशनो पर ना। काहे कि कमीशन त फायदा में दीहल जाला आ एह मार्केट बनावे का काम में कवनो मुनाफा ना होखे। कई बेर कम्पनियो अइसन लोग के लगा के राखेली स जे लोग ओह कम्पनी के दाम अपना प्रोमोटर का हिसाब से चलावे के कोशिश करेला।

एगो अउर प्रजाति होले operators के। ई लोग अपना हिसाब से बाजार चला के मुनाफा कमाए में लागल रहेला। अइसनका लोगन के पाकिट बहुते गहीर होले आ बरीसन ले इंतजार करे के धीरज। ई लोग ना त बिकवाल होला, ना लिवाल। ई लोग बस मुनाफाखोर होला। आज के लेख में हम चवन्नी छाप शेयरन के बात नइखीं करत जवना में जम के पंप आ डंप करे के काम चलत रहेला। एहिजा हम ओह कंपनियन का बारे में बतियावत बानी जवनन के ब्लू चिप शेयर मानल जाला भा जेकरा प्रोमोटर सरकार होले। सरकार के पाकिट कतना गहीर होले ई सभका मालूम बा। आ ओकरा धीरज के कवनो सीमा ना होखे। काहे कि कवन अपना बाप के धन ह जवना के चिंता कइल जाव।

कुछ ऑपरेटर चुनिंदा स्टॉक मे काम करेलेा। अब एहीजे ई साफ कर दीहल जरुरी बा कि शेयर आ स्टॉक में फरक का होला। शेयर कवनो स्टॉक के हिस्सा होले आ स्टॉक कवनो कंपनी के शेयर भण्डार – स्टॉक। कई बेर हमनी का शेयर आ स्टॉक के एके जइसन मान के आपन बात कहिलें। स्टॉक के शेयर खरीदाला-बेचाला जबकि स्टॉक में शेयर घटत-बढ़त रहेला। ई लोग खास कर के सरकारी कंपनियन के स्टॉक मे काम करेलें। काहे कि सरकारी कंपनियन के बड़हन हिस्सा सरकार का लगे होला आ ऊ बाजार में अइबे ना करे। एगो बहुते छोटहन हिस्सा बाजार में रहेला। आपरेटर अइसनका कंपनियन के शेयर बड़ मात्रा में खरीद के राख लेलें भा कहीं कि हथिया लेलें। आ जब बाजार में एह स्टॉक के मांग बढ़ेला त आपूर्ति ओही तरह से ना बढ़े। एह कारण ओह स्टॉक के दाम तेजी से बढ़े लागेला आ तब आपरेटर एगो ऊँचाई पर चहुँप के आपन शेयर बेच देलें। आ ओकरा बाद हर गिरावट में फेर खरीदे के चक्र शुरु हो जाला।

एहसे ई सवाल कइला से कि ‘आखिर खरीदत के बा’ से बढ़िया सवाल होखी कि का ई समय सही बा खरीदे के? त इहो जान लीं कि कवनो समय सही बा गलत ना होला। जे रोगिया के भावे से बैदा फरमावे का तरह रउरा बाजार का हिसाब से चले के आदत डाले के चाहीं। अगर रउरा निवेशक हईं त छोट छोट टुकड़ा में अपना पसन्द के स्टॉक के शेयर खरीदल शुरु कर सकिलें। शर्त बस इहे होखी कि जवन पूंजी रउरा बाजार में डाले जा रहल बानी तवना के जरुरत रउरा हिसाब से जल्दी नइखे पड़े वाला। हर टुकड़ा के आपन फिक्स्ड डिपॉजिट मान के चलीँ। साल भर के ब्याज दर जबहियें मिल जाव भँजा लीं आ फेर कवनो दोसरा स्टॉक के रुख कर लीं। भा तिकवत रहीं कि फेर कब ओह दाम पर आई जवना पर ओकरा के फेर से खरीदल जा सकेला।

एगो कविता इयाद आवत बा – सिर की कीमत का भान हुआ तब त्याग कहाँ बलिदान कहाँ। गरदन इज्जत पर दिये फिरो तब मजा यहाँ जीने का है। नुकसान के डर आ मुनाफा के लालच के झुलुवा झुले के कोशिश मत करीं। झुलुवा झूले के आनन्द लीहल करीं।

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