चूतिया बनावल आसान होला चूतिया होखल मुश्किल

भोजपुरी आम मनई के भाषा ह। आ आम मनई का भाषा में चूतिया शब्द के इस्तेमाल आम बात होला। रउरा अगर हमार मथैला खराब लागल होखे त चलीं आज एही बात पर बतंगड़ कर लीहल जाव। सबसे पहिले त ई जाने के बा कि ई शब्द आइल कहाँ से, कइसे। श्लील भाषा में कहीं त एह चूतिया शब्द के व्युत्पति कहाँ से भइल? आ इहे सवाल हम गूगल के अतिबुद्धिमता से पूछनी। जवन जबाब मिलल तवना के जस के तस नीचे दे रहल बानी –
‘चूतिया’ शब्द की व्युत्पत्ति और उसके इतिहास को मुख्य रूप से दो अलग-अलग दृष्टिकोणों (भाषाई और ऐतिहासिक) से समझा जा सकता है:
1. भाषाई व्युत्पत्ति (गाली या अपशब्द के रूप में)
हिंदी और उर्दू के बोलचाल (बाज़ारी भाषा) में प्रयुक्त इस शब्द की उत्पत्ति के दो मुख्य सिद्धांत हैं:
• मूल सिद्धांत (स्त्री जननांग से): भाषाविदों और ऐतिहासिक शब्दकोशों (जैसे प्लेट्स डिक्शनरी ऑफ़ उर्दू, क्लासिकल हिंदी एंड इंग्लिश) के अनुसार, यह शब्द ‘चूत’ (स्त्री जननांग) में ‘इया’ प्रत्यय जोड़ने से बना है। 19वीं सदी के शब्दकोशों के मुताबिक, शुरुआत में यह एक अत्यंत अपमानजनक शब्द था जो उस व्यक्ति के लिए इस्तेमाल होता था जो अपनी पत्नी की वेश्यावृत्ति की कमाई पर जीता था या अत्यधिक कामुकता (यौन रोग) के कारण खुद को नष्ट कर लेता था। समय के साथ, यह अर्थ बदल गया और यह किसी “मूर्ख”, “नासमझ” या “बेवकूफ” व्यक्ति के लिए एक सामान्य गाली या अपशब्द बन गया।
• संस्कृत अपभ्रंश सिद्धांत: कुछ विद्वानों का यह भी मानना है कि इसकी उत्पत्ति संस्कृत के शब्द ‘च्युत’ से हुई है। ‘च्युत’ का अर्थ होता है – अपने स्थान से गिरा हुआ, पतित, या जिसकी बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी हो। इसी ‘च्युत’ शब्द का अपभ्रंश होकर बोलचाल में यह ‘चूतिया’ बन गया।
2. ऐतिहासिक और जातीय संदर्भ (बिना किसी गाली के)
इस शब्द का एक पूरी तरह से अलग और सम्मानजनक ऐतिहासिक संदर्भ भी है, जिसका गाली वाले अर्थ से कोई संबंध नहीं है:
• चुटिया/चूतिया जनजाति (असम): भारत के असम और उत्तर-पूर्व क्षेत्र में ‘चुटिया’ (Chutia या Sutiya) एक समृद्ध और ऐतिहासिक समुदाय (जाति) है।
• मध्यकाल में इस समुदाय का अपना एक शक्तिशाली चुटिया साम्राज्य (Sutiya Kingdom) था, जिसने ऊपरी असम पर सदियों तक शासन किया।
• इस जातीय नाम की उत्पत्ति बोडो-कचारी मूल से जुड़ी मानी जाती है और वर्तमान में भारत सरकार द्वारा इन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के रूप में मान्यता प्राप्त है।
निष्कर्ष:
बोलचाल की भाषा में यह शब्द ‘चूत + इया’ या ‘च्युत’ से विकसित होकर एक अपशब्द (मूर्ख के अर्थ में) बना है, जबकि भौगोलिक और ऐतिहासिक रूप से यह असम के एक प्रतिष्ठित राजवंश और समुदाय का नाम है।
अब एह जानकारी का बाद कहल जा सकेला कि हर आदमी च्यूत त हो सकेला बाकिर चूतिया ना। कुछ चूतिया दोसरा के चूतिया बनावे में महारत हासिल कइले रहेलें आ कई बेर ओहनी के बाहरी समर्थन – आर्थिक आ बौद्धिक दुनु – मिल जाला। चूटिया जनजाति से एह चरचा के कवनो संबंध नइखे। ऊ लोग चूटिया हवे चूतिया ना। ई त रोमन लिपि के सीमा हवे जवना का चलते छोड़ गये बालम के रोमन में लिखत घरी रउरा असहज हो जाएब अगर छोड़ के chhod लिखल ध्यान में ना रहल। रोमन लिपि में एक ही वर्ण के उच्चारण अलग अलग तरह से हो सकेला। देवनागरी में जवन लिखल जाला तवने बोलल जाला आ भोजपुरी में जवन बोलल जाला तवने लिखल जाला। अलग बात बा कि एह फेरा में वर्तनी के फेरा लाग जाला कबो-कबो। बाकिर ई विषय बाद में कबो। अबहीं त बस चूतियने के चूतियापा के चरचा करे के बा।
एक बेर सोचीं कि अगर मुख्य न्यायाधीश का मुँह से कोक्रोच का बदले छछून्दर भा चूतिया निकलल रहीत त का एहू पर CJP बनावल जा सकत रहुवे। छछून्दर जनता पार्टी भा चूतिया जनता पार्टी के संक्षिप्त रूप त इहे रहीत – सीजेपी। कोक्रोच जानवर के नाम होला। बाकिर चूतिया त आदमियने में पावल जाला। त हमरा विचार से चूतिया जनता पार्टी सबले नीमन नाम होखीत। काहे कि एह चूतियन से बढ़िया चूतिया बनावे के गुण बहुते कम लोगन का लगे होखेला। हँ एहनी के आदम पुरुष गिरगिटाधीश के त ई शतांशो में नइखन। बापे पूत परापत घोड़ा बहुत नहीं त थोड़ा-थोड़ा वाला अंदाज में एहनी के वल्दियत का बारे में कवनो गलतफहमी ना हो सके।
अब बाकी लोगन के सोचे बा कि एहनी के बनावल चूतिया बने के बा कि एहनी का गोल में शामिल होके खुदे चूतिया बन के दोसरा के चूतिया बनावे में लाग जाए के बा?
सवाल के जवाब रउरा सभे सोचीं।

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