भोजपुरी संसद : जरूरत आ जानकारी

दू दिन पहिले हम फेसबुक पर एगो नया ग्रुप बनवले बानी जवना के नाम हऽ भोजपुरी संसद । सवाल उठत बा कि एकर जरुरत का रहल? आ एह जरुरत के बतावत हम भोजपुरी संसद का बारे में कुछ जानकारियो साझा करे के कोशिश करब।
भोजपुरी से जुड़ल संस्था समिति सम्मेलन के कवनो कमी नइखे। आ भोजपुरी संसद कवनो तरह से संस्था नइखे बने जा रहल। ई बस एगो मंच रही जहाँ भोजपुरी भाषा का बारे में लोग आपन विचार राखी, दोसरा के विचार जानी आ गँवे-गँवे एगो राय बने लागी।
रउरा सभे जानत बानी कि हर संस्था में कवनो ना कवनो अधिकारी होलें जे ओकर गतिविधि संचालित करेलें आ तय करेलें कि केकरा के सदस्य बनावे के बा, केकरा के पदाधिकारी। केकरा जिम्मे कवन काम रही वगैरह वगैरह। भोजपुरी संसद में ई सब कुछ स्वतंत्र बा। जेकरे मन करे से जुड़ सकेला। जे चाहे से अलग हो सकेला। केहू अधिकारी नइखे केहू के कुछ कहला पर कवनो तरह के अंकुश नइखे।
भोजपुरी संसद कवनो पत्रिको ना ह जहाँ केहू आपन रचना प्रकाशित करी। एहिजा आपन राय देबे के बा, दोसरा के राय सुने के बा। मानल भा ना मानल सब सामने वाला पर निर्भर बा। बढ़िया लागो त मानीं, गलत लागो त विरोध करीं,आपन राय दीं। बस एह मंच पर असंसदीय व्यवहार मत करीं। ग्रुप एडमिन अइसन कवनो पोस्ट के डिलीट कर सकेला जवन असंसदीय मानल जा सकेला। बस कारण बतावे के पड़ी।
एह संसद में भोजपुरी भाषा के विकास खातिर जरुरी वर्तनी, व्याकरण, शब्द-बिटोर पर चरचा होखी। संवैधानिक मान्यता के बात नइखे करे के। एहिजा कवनो मांग भा आन्दोलन नइखे करे के बस उहे करे के बा जवन हमनी से स्वयं हो पाई। दोसरा के कहल माने के कवनो विवशता ना होखी।
शुरू करे खातिर रउरा सभे एही पोस्ट से शुरु कर सकिलें चरचा। ना मन करे त कवनो जबरदस्ती नइखे। अधिक से अधिक विद्वानन के एह संसद का बारे में बतावल आ एहसे जुड़े खातिर निहोरा बा। दिक्कत ई बा कि सभका से हमार संपर्क नइखे। एहसे अगर रउरा फेसबुक पर बानीं आ भोजपुरी भाषा का बारे में कवनो सलाह-विचार बाँटल चाहत बानीं त राउर स्वागत बा।

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