मिस्की

ऊ जात रहल
मुस्कियात रहल
देखि के
हालत
मोरो ।
सोचि के
कि-
पहिले
कतना में
ऊ का रहल।
मोहूँ के
हँसी आ गइल
सरमा गइल
मुस्किअइनी
आ-
भुला गउवे
मिस्की
ओकर।
(मुस्की प्रसन्नता के भाव प्रदर्शन हवे। मिस्की द्वेष लभेरल तिरछी मुस्कान।)
– कृष्णदेव घायल

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