हे ईश्वर! तनी दया करीं
- मुकेश यादव

हे ईश्वर! तनी दया करीं

कई दिन तक बरसल बदरी,
धानवा गिरल मेड़ के कगरी।

भूख-पियास कुल गइल हेराइ,
जर-जजात डूबल बा सगरी।

बंद भइल अब लोर आखिन से,
कइसे उनुकर हालात अब सम्हरी।

बांझ परल किस्मत के रेखा,
उठी कइसे किसान के पगरी।

हे ईश्वर! तनी दया करीं,
डगरे दीं जीवन के डगरी।

आस रहे कि करजा उतरी,
मुश्किल भइल चलल अब डहरी।

“भावुक” मन ना लागे कतहीं,
गइल नया बिपत बा ऊपरी।

— मुकेश यादव

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(मुकेश यादव ‘भावुक’ बलिया जिला के मूल निवासी मुकेश यादव भावुक डिजिटल भोजपुरी साहित्यिक पोर्टल/मंच ‘पुरवइया’ – पुरवइया डॉट कॉम के संचालक हईं। इनका कवितन में लोकसंस्कृति, माटी के सोंन्ह महक अउरी जनमानस के पीड़ा-वेदना मुख्य स्वर होला।)

 

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