शब्द-संपदा आ वर्तनी के संबंध
- टीम अंजोरिया

शब्द-संपदा आ वर्तनी के संबंध

कवनो भाषा के समृद्धि के चर्चा होला त सबसे पहिले ओकर शब्द-संपदा के बात उठेला। भाषा में जतना अधिक शब्द होइहें, अलग-अलग भाव, विचार, वस्तु आ अनुभव के बतावे खातिर जतना सटीक शब्द उपलब्ध होइहें, भाषा ओतने समृद्ध मानल जाई। बाकिर खाली शब्दन के संख्या बढ़ गइला से भाषा समृद्ध ना हो जाले। ओह शब्दन के लिखे के एगो सहज आ स्वीकार्य तरीका होखल जरूरी बा। इहे जगह ह जहाँ शब्द-संपदा आ वर्तनी एक-दूसरा से जुड़ जाली सँ।

बोलचाल के भाषा में शब्द कान से सुनाई पड़ेला। बोले वाला के लहजा, स्वर, प्रसंग आ हावभाव ओकर अर्थ समझे में सहायता करेला। लिखित भाषा में ई सुविधा नइखे। उहाँ शब्द अपना लिखित रूप में सामने आवेला। एहसे वर्तनी शब्द के खाली लिखे के तरीका ना ह, ओकर पहचानो ह।

एगो शब्द अलग-अलग इलाका में तनिका अलग ढंग से बोलल जा सकेला। भोजपुरी जइसन विस्तृत क्षेत्र में बोलल जाए वाली भाषा में ई स्वाभाविक बा। कहीं स्वर बदल जाला, कहीं व्यंजन; कहीं शब्द के आखिरी हिस्सा बदल जाला त कहीं पूरा शब्दे के रूप कुछ अलग हो जाला। बोलचाल में एहसे कवनो खास परेशानी ना होला। परेशानी तब शुरू होला जब हर उच्चारण के ओही रूप में लिखे के कोशिश होखे।

अगर एगो शब्द पाँच इलाका में पाँच तरीका से बोलल जाला आ पाँचो तरीका से लिखलो जाए लागे, त धीरे-धीरे पाठक खातिर ई तय कइल कठिन हो सकेला कि ई पाँच गो अलग शब्द बाड़ें कि एकही शब्द के पाँच रूप। एहिजा मानक वर्तनी के उपयोगिता सामने आवेला। मानक वर्तनी बोलियन के विविधता मिटावे खातिर ना, लिखित भाषा में शब्द के एगो पहिचान देवे खातिर होला।

एकर उलट संबंधो ओतने महत्त्वपूर्ण बा। वर्तनी के नियम शब्द-संपदा से अलग बइठ के ना बनावल जा सके। नियम बनावे वाला के देखे के पड़ेला कि भाषा में शब्द वास्तव में कइसे बरतल जात बाड़ें। अगर नियम अइसन बन गइल कि भाषा के हजारन सहज शब्द ओकरा अनुकूल ना बइठें, त दोष शब्दन के ना, नियम के मानल जाई। वर्तनी भाषा खातिर ह, भाषा वर्तनी खातिर ना।

शब्द-संपदा खाली अपना मूल शब्दन से ना बने। हर जीवित भाषा दोसरा भाषा से शब्द लेले। भोजपुरी में संस्कृत, हिन्दी, उर्दू, फारसी, अरबी, अंगरेजी आ आसपास के अउरी भाषा से आइल ढेर शब्द मिलिहें। एहमें कुछ शब्द अतना घुलमिल गइल बाड़ें कि अब ऊ भोजपुरी के आपन शब्द जइसन लागेलें। कुछ नया शब्द लगातार आवत रहेलें।

अइसन शब्दन के लिखे में एगो सवाल बार-बार उठेला—ओकर मूल भाषा वाली वर्तनी बचावल जाव कि भोजपुरी उच्चारण के अनुसार लिखल जाव? एकर एगो नियम हर जगह लागू कइल आसान नइखे। बहुत बेर शब्द के प्रचलित रूपे ओकर सही रास्ता बतावेला। जे शब्द भोजपुरी में बरिसन से एगो खास रूप में बोलल आ लिखल जात बा, ओकरा के खाली मूल भाषा से मिलावे खातिर जबरदस्ती बदलल उचित ना होई। दोसरा ओर, जहाँ मूल रूप बचवला से अर्थ साफ रहत होखे आ लिखे-बुझे में कवनो कठिनाई ना होखे, उहाँ ओकरा के बचावल जा सकेला।

एहसे शब्द-संपदा वर्तनी के परीक्षा लेत रहेला। नया शब्द आई त सवाल उठी कि एकरा के कइसे लिखल जाव। पुरान शब्द के अलग-अलग रूप मिली त तय करे के पड़ी कि लिखित भाषा में कवन रूप अधिक सहज, व्यापक आ उपयोगी बा। एह प्रक्रिया में शब्दकोश के भूमिका महत्त्वपूर्ण हो जाले। बाकिर शब्दकोशो आसमान से नियम लेके ना उतरेला। ओकर आधार भाषा के वास्तविक प्रयोगे होला।

मानक वर्तनी के एगो लाभ ईहो बा कि ऊ शब्द-संपदा के सुरक्षित रखेला। अगर शब्द के लिखित रूप स्थिर होखे त ओकरा के शब्दकोश में दर्ज कइल, खोजल, पढ़ावल आ अगिला पीढ़ी तक पहुँचावल आसान होला। आजु डिजिटल जमाना में एकर महत्त्व अउरी बढ़ गइल बा। कंप्यूटर पर खोज, इलेक्ट्रॉनिक शब्दकोश, ऑनलाइन पुस्तकालय आ भाषा से जुड़ल तकनीक खातिर शब्द के अपेक्षाकृत स्थिर लिखित रूप बहुत उपयोगी होला।

बाकिर एह स्थिरता के कठोरता ना समझे के चाहीं। भाषा जिंदा चीज ह। ओकर शब्द-संपदा बदलत रही, नया शब्द जुड़त रही, पुरान शब्द के अर्थ बदलत रही आ कुछ शब्द चलन से बाहरो होत रही। एह बदलाव के साथ वर्तनी के सामने नया सवाल आवत रही। मानक के काम एह बदलाव के रोके के ना, ओकरा के अइसन रास्ता देवे के ह जवना से भाषा के स्वाभाविकता आ लिखित रूप के एकरूपता दुनू बचल रहे।

शब्द-संपदा आ वर्तनी के संबंध आखिरकार देह आ पहिचान जइसन बा। शब्द भाषा के विचार, अनुभव आ भाव के ढोवेला आ वर्तनी ओह शब्द के लिखित पहिचान देला। शब्द-संपदा बिना वर्तनी के नियम सूखल ढाँचा हो जाई आ वर्तनी के व्यवस्था बिना शब्द-संपदा लिखित रूप में बिखर सकेला।

एहसे भोजपुरी के समृद्ध करे के बा त खाली नया शब्द खोजला भा गढ़ला से काम ना चली। पुरान शब्दन के खोजे, ओकर अर्थ आ प्रयोग दर्ज करे, अलग-अलग इलाकाई रूपन के समझे आ लिखित प्रयोग खातिर सहज वर्तनी तय करे के काम साथे-साथ करे के पड़ी। शब्द बटोरल आ वर्तनी सँवारल दू गो अलग काम जरूर बाड़ें, बाकिर भाषा के विकास में दुनू एक-दूसरा के हाथ पकड़ के चलेलें।

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