Tag: दयानद पांडेय

हत्यारा

हत्यारा तूं अइसे भेंटाइल रहलू जइसे कवनो मछुआरा के बिना जाल डलले मछरी भेंटा गइल होखे। मछुआरा का हाथ...

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साल २०२५ में कहल जाई : एगो लोक भाषा होखत रहुवे

बाजार के दबाव में तिल-तिल कर के मरत भोजपुरी भाषा के दुर्दशा लेके हम कुछ समय पहिले एगो उपन्यास लिखले रहीं “लोक कवि अब गाते नहीं.” इंडिया टुडे में एकर समीक्षा लिखत मशहूर भाषाविद् अरविंद कुमार तारीफ के पुल बान्हत एगो...

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