इंडी गठबंधन में राहुल गाँधी के ‘शैव अवतार’: बबुआ सयान त हो गइल बा, बाकिर चाचा-फुआ मानिहें तब नू!
- टीम अंजोरिया

इंडी गठबंधन में राहुल गाँधी के ‘शैव अवतार’: बबुआ सयान त हो गइल बा, बाकिर चाचा-फुआ मानिहें तब नू!

दिल्ली के बइठक आ ‘गोपनीय’ भाषण के अंजोर

पिछला दिने इंडी गठबंधन के एगो बइठक दिल्ली में भइल रहल। जवना में कांग्रेस के अध्यक्ष ना, बाकिर अध्यक्ष ले बेसी ताकतवर राहुल गाँधी एगो भाषण देके बतवलन कि मोदी के हरावे खातिर कवना तरह के रणनीति पर काम करे के जरुरत बा।

गोपनीय बतावल जात बइठक में दीहल अपना भाषण के राहुल गाँधी अपनहीं अंजोर (प्रकाशित) कर दीहलन, जवना के बाद गठबंधन में शामिल दोसरा दलन के कुछ नेता असहज हो गइलें। ओह लोग के कहना बा कि अगर राहुल गाँधी आपन भाषण जगजाहिर कर दीहलन, त बाकियो नेतन के भाषण अंजोर कइल जाए के चाहत रहुवे।

राहुल गाँधी कहलन का, तवना के भोजपुरी में परोसे के कोशिश कर रहल बानी। बाकिर ई ना त शब्दश: अनुवाद होखी, ना ओकर सार। उनुका भाषण के खास-खास बात पर चरचा जरुर होखी।

शैव दर्शन, विषपान आ दोस्ती के कहानी

कहलन कि कई बरिस पहिले उनुका अपना एगो जिगरी दोस्त से विवाद हो गइल, जब राहुल ओह दोस्त के कहला पर आपन आपत्ति जतवले रहलन। दोस्त कहलसि कि दुनिया अइसने बिया, एकर आदत डाल लऽ।कहलन कि कांग्रेस का बारे में एह बइठक में जवन कहाइल तवना के चरचा ऊ ना करीहें। अपना के शैव दर्शन के अनुयायी बतावत दावा कइलन कि सगरी जहर-बात घोंट लेबे के बा। अपना के हिन्दू बतावे वाला राहुल गाँधी (हिन्दूवन में त कवनो अइसन शर्त होखे ना जवना से केहू के हिन्दू भा अहिन्दू कहल जा सके। जे भी चाहे अपना के हिन्दू कह सकेला आ ओकर कतहीं मनाही नइखे हिन्दू आस्था में।) आपन तुलना भगवान शिव से करत कहलन कि सगरी जहर-बात हँसते-हँसते पी लिहें।

गठबंधन के अपना साथियन का बारे में कहलन कि उनुकर काम सभका के खुश राखे के बा, काहे कि उनुकर भूमिका बाकी लोगन से अलगा बा। कहलन कि उनुकर भूमिका प्यार-मुहब्बत से सभका के जोड़े वाला बा। अपना सांसदीय अनुभव ओरी इशारा करत राहुल कहलन कि बरिस 2004 से ऊ सांसद बाड़न।

Image by Gemini representing a young group fighting with a giant size opponent

कांग्रेस के प्रतिरोधी आन्दोलन आ क्षेत्रीय दलन के मतिभरम

बतवलन कि उनुकर दल (पार्टी) मौलिक रूप से देश के बाकी दलन से अलगा चरित्र के हवे। काहे कि कांग्रेस के शुरुआत प्रतिरोध आन्दोलन से भइल रहल, जब आधुनिक भारत वाली व्यवस्था ना रहल। (ई ऊ ना बतवलन कि कांग्रेस के स्थापना कुछ ब्रिटिश अधिकारियन के क्लब का रूप में भइल रहल, जवना के मकसद रहल ब्रिटिश सरकार विरोधी विचारन के बहकावे-भटकावे के।) कहलन कि कांग्रेस का लगे ऊ सुरक्षा ना रहल जवन बाकी दलन के भारत राष्ट्र के संरक्षण आ संसाधनन का चलते मिलल।

राहुल के कहना रहल कि कांग्रेस एगो प्रतिरोधी आन्दोलन हवे, जवना के लक्ष्य बा हर भारतीय के समानता के सुरक्षा। कहलन कि कांग्रेस आरएसएस के विचारधारा से अलग विचार वाली दल हियऽ। कहलन कि जान दे दीहल मंजूर होखी कांग्रेसियन के, बाकिर भाजपा-आरएसएस से समझौता ना हो सकी। कहलन कि ऊ लाखन अइसन कांग्रेसियन के जानेलन जे आपन गरदन कटवा लेइहें, बाकिर आरएसएस का सोझा नवेइहें ना।

राहुल एह बात के अफसोस जतवलन कि एह गठबंधन (इंडी गठबंधन) में मतिभरम भरल बा। जइसे कि समाजवादी, तृणमूल, राजद वगैरह दलन के अबहियों गलतफहमी बा कि जवना राजनीतिक औजारन के सहारे ऊ अबले आपन काम करत आइल बाड़न, वइसहीं आगहूं करत रह सकेलें। कहलन कि मौजूदा माहौल में अब ई संभव नइखे, काहे कि भारत राष्ट्र के दीहल समानता के माहौल अब नइखे रहि गइल।

सगरी संस्थानन पर कब्ज़ा आ ‘चुनाव चोरी’ के दावा

राष्ट्र के हर संस्थान पर भाजपा काबिज हो गइल बिया। न्यायपालिका, कार्यपालिका, गुप्तचर संस्थान, चुनाव आयोग सब कुछ अब भाजपा के नियन्त्रण में आ गइल बा। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जवना तृणमूल के ऊ हर तरह से गरियवलन, तवने का बारे में बोलत राहुल कहलन कि तृणमूल में उनuकर कईएक दोस्त बाड़ें जिनका लागत रहल कि ऊ चुनाव स्वीप करे जात बाड़न। कहलन कि ऊ चितवत (चेतावनी देत) रह गइलन कि अइसन नइखे होखे जात, काहें कि ऊ ई सब कुछ देख चुकल बाड़न – गुजरात में, महाराष्ट्र में, मध्यप्रदेश में, छत्तीसगढ़ में, हरियाणा में, अउर राजस्थान में।

बाकिर एह सब का बावजूद उनुकर दोस्त (गठबंधन के साथी) माने के तइयार नइखन। राहुल के सोच बा कि गठबंधन के साथी दल ऊ ना कर सकेले जवन कांग्रेस कर सकेले, काहें कि कांग्रेस एगो प्रतिरोधी आन्दोलन करे वाली दल हिया। देश के संस्थानन के जतने गला घोंटल जाई, तेतने ताकतवर प्रतिरोध करे के क्षमता राखेले कांग्रेस।

नीति, रणनीति आ सोशल मीडिया के सच

राहुल के कहना बा कि सगरी साथी दल कांग्रेस के नीति साझा करेलें – सत्य, अहिंसा आ दया के। कहलन कि कांग्रेस के कवनो रूचि नइखे अपना साथी दलन से झगड़े के। ऊ पागल ना हवन कि अचके में उठिहें आ एलान कर दिहें कि साथी दलन से लड़ जइहें। कहलन कि ऊ बाकी दलन से प्यार करेलन, दोस्ती राखल चाहेलन।

राहुल दावा कइलन कि 2024 वाला लोकसभा चुनाव ऊ हरलन ना बलुक असल में जीत के देखवलन। कहलन कि ई कहल गलत बा कि नीतीश उनुका चलते इंडी से बाहर चल गइलन। कहलन कि जवने कुछ बाचल बा, तवनो पर भाजपा-आरएसएस आपन कब्जा मजगर कइले जात बाड़ें।

हजार साल पहिलहूं कांग्रेस अइसने दौर देखले रहल। राहुल कहलन कि तब बरिस 1927 में कांग्रेस एगो राजनीतिक दल रहल (कवना तर्क से ई त भगवानो ना बता पइहें सिवाय राहुल के।) बाकिर जसहीं गाँधी जी एलान कइलन कि हमहन के आजादी चाहीं, ओही दिने कांग्रेस एगो प्रतिरोध आन्दोलन बन गइल। जब राजनीति काम ना कर सके, तब प्रतिरोध काम कर जाला। जब-जब प्रतिरोध कइले बाड़न, तब-तब काम बनल बा। चार हजार किलोमीटर के अपना यात्रा के अनुभव से राहुल बतवलन कि प्रतिरोध काम करेला।

कहलन कि तोहरा लोगन के कवनो राजनीतिक संरचना नइखे बनावे के। तोहरा कवनो कार्यपालिका के सहजोग के जरुरत नइखे। तोहरा गुप्तचर एजेन्सियन के जरुरत नइखे। तोहरा बस प्रतिरोध करे के बा। कहलन कि ऊ प्रतिरोध करत रहीहन, अन्याय से लड़त रहीहन। पूर्ण विराम। खतम। ई (गठबंधन) एगो सोच हवे, कवनो संगठन ना हवे, बस एगो विचार हवे, सोचे के तरीका हवे। आ कहलन कि पसन्द करे भा ना, चले के एही तरीका से होखी। सोचे के तरीका बदलहीं के पड़ी। हमनी के आपस में ना लड़े के बा। हमनी के मीडिया के मौका ना देवे के बा कि ऊ हमनी पर हमला कर सके। हमनी के बस प्रतिरोध करे के बा।

‘चुनाव सौ फीसदी चोरा लीहल गइल’

कहलन कि रउआ सभ सोचत होखब कि अगिला चुनाव जीते के चुनौती बा। अरे, अगिला चुनाव त पहिलहीं जीत गइल बानी सँ। लोग मान के बइठल बा। जनता का मन में अतना गुस्सा बा कि अगिला चुनाव त पहिलहीं खतम हो गइल बा। समस्या बा कि राष्ट्र के संसाधनन पर आरएसएस के कब्जा हो चुकल बा। एगो मुक्त आ जायज चुनाव होखे के कवनो उमेद नइखे।

एही चलते हमनी के प्रतिरोध का राहे चले के पड़ी। सीबीएसई प्रतिरोध हवे, नीट (NEET) प्रतिरोध हवे। निकोबार गइल प्रतिरोध हवे। भारत जोड़ो यात्रा प्रतिरोध हवे।

राहुल सलाह दीहलन कि सबेरे ऊठीं त बोलीं कि आजु कइसे प्रतिरोध कर सकीलें? आ प्रतिरोध पर निकल पड़ीं। ई काम कर जाई। राहुल गारंटी देबे के बात करत कहलन कि कवनो कोना से उठे वाली आलोचना के आवाज के ऊ सामना करीहें। उनुका ला ई एगो मजहबी कर्तव्य होखी, आध्यात्मिक कर्तव्य होखी। ई अब राजनीति नइखे रहि गइल। राहुल आगे वचन देत कहलन कि ऊ हर आलोचना सह लीहें, हर अपमान सह लिहें, बस ई गठबंधन बनवले रखीहें आ एकरा के सफलता दिआ के रहीहें।

कइसे आगे बढ़े के बा, से एकदम साफ आ सोझ बा। एगो खास विचार से दूर जाए के पड़ी। ममता जी मानत बाड़ी कि उनुकर जीत चोरा लीहल गइल। उद्धवो जी मानत बाड़न। उनुकर भाई तेजस्विओ मानत बाड़न। बाकिर सुन लीं सभे – राहुल कहलन कि – चुनाव सौ फीसदी चोरा लीहल गइल। अपना मन से कवनो शंका दूर कर लीं सभे।राहुल कहलन कि इहो जान लीं सभे कि बरिसन लाग जाला कवनो सोशल मीडिया मौजूदगी बनावे में। कहलन कि उनुकर 10 करोड़ अनुयायी बाड़न, बाकिर उनुका के पूरा तरह से दबावल जा रहल बा। से इहो सोचल बन्द कर दीं सभे कि सोशल मीडिया आजाद बा। सब कुछ – सगरी संस्था, सगरी संसाधन सरकार का नियन्त्रण में बा, जे सरकार के बनवले राखे में लागल बा।

इ सरकार बांचे नइखे जात

राहुल कहलन कि इ सरकार बांचे नइखे जात, काहे कि ई लोकतंत्र के खतम कर दिहले बिया। आम भारतीय के भविष्य खा गइल बिया। जवन होखे जा रहल बा, तवन पिछला दिने ईरान में हो चुकल बा। ई काबू का बाहर के होखी। आ ई हमनी ला जगहा बनावे के काम करी कि लोग के आन्दोलित कइल जाव।

बाकिर राहुल के लागत बा कि उनुका गठबंधन के ई गलतफहमी दूर करे के होखी कि एहमें बिखराव बा। राहुल एह तरह के बातन के चरचा में ले आइल भाजपा के साजिश बतवलन। ई साँच नइखे। आ राहुल के पक्का विचार बा कि देश बचावे खातिर द्रमुको (DMK) उनुका साथही खड़ा होखी। हर आदमी खड़ा होखी। राहुल कहलन कि हँ, आपस में कुछ झगड़ा जरुर बा। बाकिर अगर केहू कहे, तबहियों ऊ केरल के निवर्तमान मुख्यमंत्री के अँकवारी (गले) बन्हीहें, काहें कि उनुका साथे उनुकर विचारधारा के लड़ाई बा।

अपना भाषण के आखिर में राहुल कहलन कि गठबंधन के विमर्श में अवसाद के कुछ रंग जरुर लउकल। लोग के लागत बा कि भाजपा से कइसे लड़ल जाई? आ राहुल मानलन कि भाजपा के हरावल आसान होखी, बशर्ते गठबंधन मेलजोल से काम करे। पिछला चुनाव का बारे में राहुल कहलन कि उनुका के छोड़ कवनो दोसर नेता ई ना मानत रहल कि भाजपा के हरावल जा सकेला। अब सभे के मान के चले के पड़ी कि भाजपा के हरावल जा सकेला। अगर एह विश्वास का साथे लड़ल जाई, त राहुल दावा कइलन कि राज्य दर राज्य, चुनाव दर चुनाव, ऊ चोरी करस भा ना, उनuका (भाजपा के) हारहीं के बा।

निष्कर्ष: बबुआ सयान त भइलन, बाकिर…

राहुल गाँधी के पूरा भाषण सुनला का बाद कहल जा सकेला कि बबुआ के लागत बा कि ऊ सयान हो गइल बा। गठबंधन के हर दल के राहुल का हिसाब से चले के पड़ी। उनुकर नेतृत्व सकारे के पड़ी। देखल जाव कि तेजस्वी, स्टालिन, ममता के हार का बाद इंडी गठबंधन में केकर चले वाला बा। बबुआ सयान त हो गइल बा, बाकिर चाचा-फुआ मानिहें तब नू!

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