एक्सपायरी डेट खातिर टटका आ बासी से काम ना चली – बतंगड़ -116
- टीम अंजोरिया

एक्सपायरी डेट खातिर टटका आ बासी से काम ना चली – बतंगड़ -116

expiry date is beyond fresh and stale

सबसे पहिले एगो खबर :

दिल्ली पुलिस एगो अइसन गैरकानूनी कृत्य करे वाला बिजनेस मैन आ ओकरा कर्मचारियन के गिरफ्तार कइले बिया जे विदेश से एक्सपायर्ड उत्पाद मँगा के ओकरा पर नया लेबल आ एक्सपायरी डेट लगा के ऊँच दाम पर बेचत रहलें। अबहीं एह अपराधियन का पीछे कवनो राजनीतिक संबंध उजागर नइखे भइल बाकिर आगहूं उजागर ना होखी एह बात के दावा नइखे कइल जा सकत।


हमरा बारे में एगो टिप्पणी पढै के मिलल कि खलिहर दिमाग के आदमी अल-बल लिखत रहेला आ ओकर लिखलका से खुन्नस हो जाला। अरे भाई अगर हम अलबल लिखत बानी त रउरा कवन मजबूरी बा कि ओकरा के पढ़बे करीं। जे आवेला हो सकेला कि ओकरा हमार अलबले नीमन लागत होखे !

एक्सपायरी डेट के चरचा करे चलनी त सबले पहिले त ई जाने के कोशिश कइनी कि एकरा के भोजपुरी में का कहीं? बसिया त सुनले बानी बाकिर एक्सपायरी डेट का बारे में नइखीं जानत। हर बात में गूगल करे के आदत बतवलसि कि एकरा के अवसान तिथि भा समाप्ति तिथि कहल जा सकेला। आ हमरा ईयाद आ गइलन हिन्दी के एगो प्राध्यापक जिनका द्विचक्र के अगिला चक्र वक्र हो गइल रहुवे आ ओकरा के सुचक्र करवावल चाहत रहलन। भा जे रेलगाड़ी के लौहपंथगामिनी कहल करसु। अइसनके कवनो विद्वान के अनुवाद बहुत पहिले आकाशवाणी के समाचार में सुने के मिलल रहुवे – ‘निशाचरों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रात्रिकालीन गाड़ियों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही है रेलवे।’

से हम एक्सपायरी डेट के जस के तस राखत चरचा आगे बढ़ावे जात बानी। एक्सपायरी डेट के निर्धारण कई तरह से कइल जाला। कुछ उत्पादन पर, जइसे कि दवाई, बाल आहार वगैरह, पर संस्थागत नजर राखल जाला आ बहुत कड़ाई से तय कइल जाला कि एह उत्पाद के कतना अवधि का भीतर इस्तेमाल कर लेबे के चाहीं। बाकिर बहुते कुछ उत्पाद अइसनों होलें जवना के एक्सपायरी डेट कंपनी अपना विचार से तय करेले। जइसे कि कवनो जरुरी नइखे कि जवन बसिया बा तवन बसियाइए गइल बा। हमनी के इलाका में बहुते लोग बसिया लिट्टी बहुते चाव से खालें। बाकिर बसिया आ सड़ल में अन्तर त राखहीं के होला।

एक्सपायरी डेट मूल रुप से इहे बतावेला कि कतना दिन ले ई उत्पाद आपन गुणवत्ता बनवले राख सकेला खास कर के अगर एकरा के सम्हार के राखल जाव। अचार के एक्सपायरी डेट अगर बता सकीं त बता देब। काहें कि हम कबो नइखीं सुनले कि ई अचार के एक्सपायरी डेट बीत गइल बा। हालांकि बाजार में मिले वाला अचारन का शीशी पर एक्सपायरी डेट लिखल जरुर मिल जाला। एक्सपायरी के मतलब ई ना होखे कि ई दवा अब जहर हो जाई। फलां तारीख ले त ई दवाई के काम करी आ ओकरा बाद ई जहर हो जाई! ना, अइसन ना होखे। बस ओकर असर कुछ भा बहुते कम हो जाए के अनेसा जरुर रहेला।

सवाल बा कि जे लोग देश के सरकार चलावेला, नीति निर्धारित करेला ओह लोग के कबो एक्सपायरी डेट आवेला कि ना? सत्तासीन अपना सुविधा से कुछ लोग के एक्सपायरी डेट पार कइला का बाद मार्गदर्शक मण्डल में डाल देबे के काम कर लेलें। अइसनो नेता आजु का तारीख पर धरती के भार बन के मौजूद बाड़ें जिनका आपन नामांकनो करे खातिर सदन में गइल मुश्किल रहेला। आ तब उनुका से उनुका घरे पर परचा भरवा लीहल जाला। बहुते लोग के उमेद रहुवे कि शायद मोदी पचहत्तर पार कइला का बाद सन्यास ले लीहें आ छप्पन साल वाला बबुआ के मौका मिल सकेला तब सरकार में आवे के। ऊ लोग भुला जाला कि – सरकती जाए है नकाब आहिस्ता आहिस्ता। बबुआ का बारे में कहल ना जा सके कि ऊ मार्गदर्शक मण्डल में जाए जोग उमिरो का बाद मार्गदर्शक बन पइहन कि ना।

त रउरा एह खलिहर के लिखल ई अल-बल कइसन लागल? बता देब त हमरो उत्साह बढ़ी। आ अगर रउरा खुन्नस खा के खुनखुनाए लागब त तय मानीं कि हम राउर प्रतिक्रिया छापे वाला नइखीं। कबो ओकरा पर कवनो नया बतंगड़ लिख दीं त अलग बात होखी।

 

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