बनारस आ महादेव के आध्यात्मिक महिमा के अनूठा गीत बा – ‘मनवा के हमरा बनारस बना दs’

सावन के पावन अवसर पर भगवान शिव आ काशी के आध्यात्मिक महिमा के समर्पित भोजपुरी भक्ति गीत ‘हे भोले बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs’ Bhojpuri IT Cell के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर रिलीज हो गइल बा। अइसन समय में, जब भोजपुरी संगीत पर सतही मनोरंजन के आरोप लगावल जात बा, ई गीत एह बात के मजबूत सबूत बा कि भोजपुरी में आजुओ गंभीर, सांस्कृतिक आ आध्यात्मिक सरोकार वाला गीत रचल जा रहल बा।
गीत के रचनाकार मनोज भावुक के कहनाम बा कि ई उनका खातिर खाली एगो भक्ति गीत ना, बल्कि बनारस के प्रति उनका श्रद्धा, आस्था आ जीवन-दृष्टि के संगीतमय अभिव्यक्ति ह।
एह गीत में बनारस के खाली एगो शहर ना, बल्कि भक्ति, मुक्ति आ आत्मिक चेतना के प्रतीक के रूप में देखल गइल बा।
गीत के मुखड़ा बा-
“हे भोले बाबा, हे शंभु बाबा, मनवा के हमरा बनारस बना दs,
दुख हो या सुख हो, मस्ती में राखs, जिनगी के नइया पार लगा दs…”
मनोज भावुक के अनुसार, ई महादेव से एगो अइसन प्रार्थना बा कि हमनी के भीतरो एगो ‘बनारस’ बस जाव, जहाँ जीवन के सुख-दुख से ऊपर उठके शिव के मस्ती, करुणा, संतुलन आ आत्मिक शांति के वास होखे।
गीत के अंतरा में काशी विश्वनाथ मंदिर, मणिकर्णिका घाट, धर्म-अर्थ-काम-मोक्ष आ लंका चौराहा जइसन प्रतीकन के माध्यम से जीवन के गहिर आध्यात्मिक आ दार्शनिक सवालन के सहज अभिव्यक्ति मिलत बा-
“काशी विश्वनाथ के मंदिर धर्म के राह धरावत बाटे,
मणिकर्णिका के घाट त मोक्ष के राज बतावत बाटे,
संगही दूगो रस्ता बा जे माया में अझुरावत बाटे,
धर्म-अर्थ आ काम-मोक्ष के राह प बा लंका चौराहा,
केने जाईं, सोचत बाटे, चौराहा पर इक बउराहा…”
मनोज भावुक के इहाँ बनारस खाली एगो भूगोल ना, बल्कि मन के ऊ अवस्था ह, जहाँ भक्ति, करुणा, वैराग्य आ आत्मिक शांति एक साथ निवास करेला। एह गीत के मूल भाव इहे बा। बनारस के आध्यात्मिक महिमा पर भोजपुरी में अपेक्षाकृत कम गीत लिखल गइल बा, आ ई गीत शिवभक्तन के साथे-साथ साहित्य आ संगीत प्रेमियन के हृदयो के छुई।
गीत के स्वर सुप्रसिद्ध गायिका सुरभि कश्यप आ गायक अर्जुन पांडेय दिहले बाड़ें। संगीत भोजपुरी फिल्म जगत के चर्चित संगीतकार रजनीश मिश्रा के बा। गीत के परिकल्पना आस्था द्विवेदी के बा। निर्देशक सुमित तिवारी, छायांकन सुधांशु सिंह, वीडियो निर्माण वन शॉट फिल्म्स आ निर्माता शैलेंद्र द्विवेदी बाड़ें।
गीतकार मनोज भावुक आ संगीतकार रजनीश मिश्रा के जोड़ी एहसे पहिले ‘तोर बउरहवा रे माई’, ‘आपन कहाये वाला के बा’, ‘दुलहिनिया नाच नचावे’ आ ‘मेरे राम’ जइसन चर्चित गीत दे चुकल बा।
मनोज भावुक के कहनाम बा कि आज भले संगीत के दुनिया व्यूज़ के होड़ में लागल बा, बाकिर आजो सबसे बेसी जरूरत अइसन गीतन के बा, जे आपन संस्कृति, आस्था आ आत्मा के प्रतिनिधित्व करे। उनका विश्वास बा कि अगर ई गीत सुनके कवनो श्रोता के मन में बनारस के अनुभूति आ महादेव के प्रति श्रद्धा अउरी गहिर हो जाय, त इहे एह रचना के सबसे बड़ सफलता होई।


0 Comments