केकर नछत्तर खराब चलत बा – जनता के कि नेता के
who is going through a rough phase

आजकाल्ह चैनलन आ रील के अइसन बहुतायत हो गइल बा कि साँच-झूठ के फरक पकड़ल मुश्किल हो गइल बा। मीडिया के हमेशा से आदत रहल बा कि ऊ सुनावे जवन जनता सुनल चाहत बिया। बाकिर ओकरा सोझा सबले बड़ उलझन होखेला कि जनता सुनल का चाहत बिया ! एही चलते तरह तरह के तुक्का चलावल जात रहेला – लाग गइल त तीर ना त तुक्का त रहबे कइल !
टीवी पर आये दिन कवनो ना कवनो मुद्दा ले के कुकुरबझाँव चलत रहेला। लागेला कि चैनल चुन चुन के अइसन बोलतुअन (प्रवक्तन) के बोलावेले जे कुछ अइसन उटपटांग बोले में सकुचास ना जवना के कवनो सिर-पैर ना होखे। आ आजु के हमार लेख एही तरह के कुछ खबरन पर बा। बाकिर एकरा के खबर मानल गलत होखी काहें कि हम या त बतकुचन करीलें ना त बतंगड़। आज के लेख बतंगड़ के श्रेणी के बा।
जब जब चुनाव निजकाला चैनल पर तरह तरह के भविष्यवाणियन के चरचा शुरु हो जाला। कुछ एह पर कि जनता के रुझान का बा आ ओकरा आधार पर का अनुमान लगावल जा सकेला। दोसरका ई कुछ ज्योतिषियन के ले आवल जाव जे कवनो नेता के भविष्यफल बतावे।
भविष्यवाणी आ ज्योतिष पर हमरा ओतने विश्वास बा जतना खरबिरवा इलाज पर। लाग गइल त वाह वाह ना लागल त फेर देखल जाई। भविष्यवाणी ला एगो सबले बड़हन आधार होखेला कवनो मनई के जन्मदिन, जन्मसमय, जन्मस्थान। चूंकि हर स्थान के वास्तविक समय ओहसे अलग होला जवन घड़ी देखावेला। काहे कि घड़ी के समय देशव्यापी आधार पर तय होला। देश के एक छोर से लगवले दोसरा छोर ले एके समय देखावल जाला घड़ियन में बाकिर ज्योतिष गणना में एकरा आधार पर सही समय निकाले के कोशिश कइल जाला। सवाल इहो उठेला कि जब जनम भइल त का ओह घरी केहू घड़ी ले के तइयार रहुवे, आ ओह घड़ी के रफ्तार सही रहुवे। आजकाल्ह त ई काम आपरेशन थियेटर भा लेबर रूम में मौजूद कवनो डाक्टर, नर्स भा दाई वगैरह निभा लेलें। बाकिर तब के जमाना में त शायद पूरा गाँव जवार में केहू का लगे घड़ी ना रहत रहुवे। तब समय के सही मानल कतना जोखिम भरल हो सकेला एकर अन्दाज लगावल जा सकेला।
रउरो सभे जानत बानी कि हमार आदत हवे कि देर ले भूमिके बान्हत रह जाइलें। से अब भूमिका छोड़ के मुद्दा पर लवटल जाव।
नरेंद्र मोदी के कुंडली के आधार बनेला उनकर जन्मतिथि 17 सितम्बर का आधार पर वैदिक गणना में वृश्चिक आ अंगरेजी गणना से कन्या राशि मानल जाला। ज्योतिषियन के कहना होला कि उनका कुण्डली के पहिलका घर में मंगल के मजबूत स्थिति से ‘रूचक योग’ बनेला जवना चलते उनकर भाषण शैली, ऊर्जा आ मुकाबला करे के क्षमता एतना तगड़ा रहेला। गुरु आ चन्द्रमा के मिलाप से बने वाला गजकेसरी योग उनकर लोकप्रियता आ सत्ता में बनल रहे के कारक गिनावल जाला। कुछ ज्योतिषि मानेलें कि उनकर शनि गोचर आ महादशा का चलते आवे वाला कुछ समय उनका पर दबाव आ राजनीतिक चुनौती वाला रही बाकिर उनकर रूचक योग उनुका के हर मुश्किल से पार निकाल ले जाई।
दोसरा तरफ राहुलो गाँधी के कुण्डली ले के ज्योतिष एकमत नइखन। वैदिक आधार पर माने चन्द्रमा का आधार पर उनकर राशि धनु बतावल जाला आ अंगरेजी गणना से मिथुन मानल जाला। एह आधार पर उनका के जुझारू मानल जाला आ कहल जाला कि राहुल के राह एगो लमहर संघर्ष आ बदलाव के हवे। कुछ ज्योतिषियन के कहना बा कि राहुल गाँधी के कुण्डली में हाल फिलहाल में माथ चढे के कवनो संकेत ना लउके।
असल दिक्कत ग्रह नछत्तर में ना होके ओकर भाषा बूझावे वालन में बा। सही समय आ तारीख के दावा गलत होखे के पूरा संभावना बा। पुरनका लोगन में कागजी जन्मदिन आ वास्तविक जन्मदिन एही चलते अलग अलग मिलेला। सर्टिफिकेट में कुछ अउर आ कुण्डली में कुछ अउर। एहसे सवाल भविष्यवाणी के सत्यता का बदले गणना के गलत आधार के माने के चाहीं। आ जइसे बन्दो घड़ी दिन में दू बेर सही समय बता देले वइसहीं गलतो गणना कई बेर सही परिणाम दे देला।
लोकतंत्र के कुंडली तनिका अलगा होला। एह में बारह गो भाव ना, करोड़ों मतदाता होलें। एहिजा शनि से बेसी बेरोजगारी असर डालेले, मंगल से बेसी महँगाई गरम करेले आ राहु से बेसी अफवाह मतदाता के भरमावेले। चुनाव के असली ग्रह बूथ पर बइठल मतदाता हवे। ऊ जवना निशान पर बटन दबा दी, ओही उम्मीदवार के कुंडली चमक जाई।
मोदी जी के ग्रह मजबूत बा कि राहुल गांधी के समय बदलत बा—एकर फैसला ज्योतिषी लोग करत रहे। जनता अपना घर, रोजगार, सुरक्षा, महँगाई आ भविष्य के हिसाब जोड़त रहे। आखिर में दिल्ली के गद्दी आसमान के ग्रह ना, जमीन पर पड़ल मत तय करी।


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