गली गली फुलवा बिछाय दियो रे मइया मोरी अइहें

नवरात आवे वाला बा आ ओकरा साथही भजन गावे-सुने के दौरो आवे वाला बा। एहीसे सोचनी कि आज एगो नया आवाज में भजन सुनावल जाव। खोजे चलनी त लखनऊ निवासी डॉ रश्मि उपाध्याय जी के गावल ई गीत यूट्यूब पर मिल गइल। गीत अवधी में बा बाकिर गोस्वामी तुलसीदास जी रचित श्रीरामचरितमानस के कृपा से चहुँ ओर एकर पसार हो गइल आ भोजपुरी इलाकनो में अवधी से अपने माईभाषा का तरह छोह राखल जाला।
एह गीत में आवज रश्मिजी के, ढोलक पर संगत राजकुमार जी के, हारमोनियम पर विमला कठेरिया जी के संगत बावे। गीतकार हईं उर्मिला सिंह जी। एह लोकगीत के पूरा सुन के भजन आ संगीत के आनन्द लीं सभे। सुविधा खातिर गाना के बोल एहिजा दे दीहल गइल बा। दोहराव बिना।
गली गली फुलवा बिछाय दियो रे मइया मोरी अइहें
मइया मोरी अइहें जगदंबा मोरी अइहें
गली गली फुलवा बिछाय दियो रे मइया मोरी अइहें
कारी कारी खेत की माटी मंगवायो
चौक और बेदी छपाए दियो रे मइया मोरी अइहें
गली गली फुलवा बिछाय दियो रे मइया मोरी अइहें
सुरभी गाय का गोबरा मंगाए लियो
ढंग धरी अंगना लिपाय लियो रे मइया मोरी अइहें
गली गली फुलवा बिछाय दियो रे मइया मोरी अइहें
बेला चमेली के हारवा बनाए लियो
मइया के गले पहनाय दियो रे मइया मोरी अइहें
गली गली फुलवा बिछाय दियो रे मइया मोरी अइहें
गइया के जेवना कपूर के बाती
चौमुख दियना जराय दियो रे मइया मोरी अइहें
गली गली फुलवा बिछाय दियो रे मइया मोरी अइहें
जयपुर का लहंगा बनारस की साड़ी
लाल लाल चुनरी मंगाय लियो रे मइया मोरी अइहें
गली गली फुलवा बिछाय दियो रे मइया मोरी अइहें
फल मेवा पकवान मिठाई
भोग और भोग प्रसादी बनाय लियो रे मइया मोरी अइहें
गली गली फुलवा बिछाय दियो रे मइया मोरी अइहें
मइया मोरी अइहें जगदंबा मोरी अइहें
गली गली फुलवा बिछाय दियो रे मइया मोरी अइहें

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