इडियट, बूड़बक आ संसद – बतंगड़ 118
- टीम अंजोरिया

इडियट, बूड़बक आ संसद

एने दू दिन से संसद से ले के सगरी समाचार चैनलन तक इडियटे के चर्चा बा। इडियट त अपना आनन्द में बा, बाकिर देश परेशान बा। हमरा त ई समझ में नइखे आवत कि आखिर इडियट पर अतना बवाल काहे मचल बा!

चलीं, मान लेत बानी कि संसद के प्रतिबंधित शब्दन के सूची में “इडियट” शामिल बा। एहसे कवनो सांसद दोसरा सांसद के इडियट ना कह सके, चाहे ऊ इडियटी के सगरी सीमा लाँघ चुकल होखे। अंग्रेजी शब्दकोश एह शब्द के कइसे परिभाषित करेला, ओकरा से हमार कवनो लेना-देना नइखे। हम त भोजपुरी में लिखत बानी, आ भोजपुरी में पाठक इशारा समझे में देर नइखन लगावत।

भोजपुरी के एगो खासियत बा कि ऊ नया शब्द आ नया अर्थ गढ़े खातिर कवनो ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी के मुहर के इंतजार नइखे करत। जवन शब्द जनता के जुबान पर चढ़ गइल, ऊ शब्द हो गइल। भोजपुरिया समाज भाषा के सरकारी आदेश से ना, अपना व्यवहार से चलावेला।

बाकिर आज के बतंगड़ इडियट शब्द पर नइखे। हमरा मन में त कुछ अउरे सवाल कुलबुलात बा। का कवनो इडियट सांसद बन सकेला? अगर बन सकेला, त दोसरा के इडियट कहे पर ओकरा नाराज होखे के हक बा कि ना? अगर कवनो आदमी बदतमीज, बदजुबान आ बदहवास कहल जा सकेला, त इडियट कहला पर एतना कोहराम काहे?

फेर एगो सवाल ई भी बा कि अगर एहिजा अंग्रेजी के “इडियट” बोलल मना बा, त ओकर भोजपुरी, मैथिली, मगही, अवधी, हरियाणवी भा दोसरका भाषा वाला समानार्थी शब्दो मना माने जइहें कि खाली अंग्रेजी शब्दे दोषी बा? आ अगर कवनो सांसद संविधान के आठवीं अनुसूची से बाहर के भाषा में ऊ बात कह दे, त ओकर फैसला के करी?

लिखत-लिखत हमरा मन में एगो अउर सवाल उठल—आखिर भोजपुरी में “इडियट” के सही शब्द का होखी?

हमरा बुझाता, सबसे नजदीकी शब्द बा—बूड़बक।

भोजपुरी में पुरनकी कहावत बा—

“बूड़बक बुझावे से मरद।”

एहिजा “मरद” के मतलब कवनो लिंग से ना, बलुक क्षमता से बा। पुरनका समाज जवन शब्द इस्तेमाल करत रहे, ओकर अर्थ ओही संदर्भ में समझे के चाहीं। आज एह बात के अलग अर्थ निकाल के नाराज होखे वाला लोगन के कमी नइखे, एहसे पहिले से ई सफाई देवे के पड़त बा।

बाकिर असली सवाल अबहियो बाकी बा।

अगर बूड़बक के बुझावे खातिर मरद चाहीं, त का संसद में अइसन कवनो क्षमतावान आदमी बा जे बुझा सको? आ अगर बा, त ऊ बुझाई केकरा के?

काहे कि बुझावल त ओकरे के जाला जे बुझे लायक होखे। बाकिर अगर संसद में केहू के बुझावल जरूरी पड़ रहल बा, त पहिले ई माने के पड़ी कि उहाँ कम से कम एगो बूड़बक त मौजूद बा।

अब मुश्किल ई बा कि संसद में बूड़बक खोजल जाव कि बूड़बक कहे वाला शब्द?

लागता, आजुकाल शब्द अपराधी हो गइल बा, काम ना।

इडियट, बूड़बक आ संसद—तीनो के लड़ाई में सबसे बेसी परेशान जनता बा, जे रोज सोचत रहेला कि देश आखिर शब्द से चली कि समझदारी से।

 

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