जबरा मारबो करे आ रोवहूं ना देव
- टीम अंजोरिया

जबरा मारबो करे आ रोवहूं ना देव

Source : ChatGPT

आजु देश के सुप्रीम कोर्ट मतदाता सूचियन के गहन पुनरीक्षण का मुद्दा पर आपन फैसला सुना दिहलसि आ एह फैसला से सगरी विपक्ष सन्न रह गइल बाड़न।

सुप्रीम कोर्ट साफ क दिहलसि कि चुनाव आयोग के पूरा अधिकार बा कि ऊ समय समय पर मतदाता सूचियन के सफाई आ व्यवस्थित करत रहे। चुनाव आयोग नागरिकता के फैसला ना कर सके बाकिर नागरिकता का बारे में जानकारी हासिल कर सकेला। अगर चुनाव आयोग के लागल बा कि कवनो आदमी देश के नागरिक ना हवे त ऊ केन्द्र सरकार के संबंधित मंत्रालय के एकर जानकारी दे सकेला।

एह अदालती फैसला का बाद अब एनआरसी – राष्ट्रीय नागरिकता पंजी- का राह में आवे वाला बाधनो के हटा दीहल गइल बा। अब अगर मतदाता सूची में केहू के नाम शामिल करे जोग ना पावल जाई त ओकरा कवनो तरह के सरकारी सुविधा पावे में बहुते परेशानी के सामना करे के पड़ी।

सुप्रीम कोर्ट के फैसला के बिन्दुवार विवरण :

1. चुनाव आयोग का लगे मतदाता सूचियन के गहन पुनरीक्षण के संवैधानिक अधिकार बा। आ संविधान के धारा 324 आ नागरिक प्रतिनिधित्व कानून का तहत ई संवैधानिक अधिकार चुनाव आयोग के दीहल गइल बा। ई ओकर उत्तरदायित्वो बा कि मतदाता सूची अधिक से अधिक शुद्ध आ दोष रहित होखे।

2. स्वतंत्र आ निष्पक्ष चुनाव ला ई जरुरी बा कि मतदाता सूची सही तरीका से बनावल जाव। अगर कवनो मतदाता के नाम दू भा अधिका जगहा मौजूद बा त ई चुनाव के गलत तरीका से प्रभावित कर सकेला। जे मर गइल, जे इलाका छोड़ के कतहीं अउर चल गइल ओकर नाम ओह इलाका के मतदाता सूची में ना होखे के चाहीं।

3. चुनाव आयोग मतदाता के नागरिकता के पुष्टि करे खातिर प्रमाण मांगे आ देखे के अधिकारी बा बाकिर ऊ केहू के नागरिकता तय ना कर सके। मतदाता सूची में नाम होखे खातिर ओह आदमी के देश के नागरिक होखल जरुरी बा बाकिर अगर मतदाता सूची में नाम शामिल नाहियो होखो त ओकर नागरिकता अप्रभावित रही।

4. पुनरीक्षण बेलगाम घोड़ा का तरह अश्वमेध यज्ञ पर ना निकल सके। ओकरा पर समुचित प्रावधान आ शिकायत निवारण के निकहा व्यवस्था होखल जरुरी बा।

5. संविधान के धारा 324 से चुनाव आयोग के अधिकार मिलल बा कि ऊ जब चाहे मतदाता सूचियन के सही करे के काम कर सकेला।

एसआईआर पर सिर पकड़ के बइठल विपक्ष आसानी से एह मुद्दा के जाए ना दी। अब ऊ हर जगह बूथवार मतदाता सूचियन पर नजर राखे ला मजबूर बा। ओकरा अइसन व्यवस्था करे के पड़ी कि ओकर समर्थक के नाम मतदाता सूची में शामिल रहे। अपना इलाका में रहे वाला हर गरीब प्रवासी मजदूर के नाम मतदाता सूची में चढ़वावल ओकर एगो नया काम होखे जा रहल बा। अब ऊ कोशिश करी कि चुनाव आयोग एह पुनरीक्षण के प्रक्रिया विधिसम्मत तरीका से चलावे आ एह प्रक्रिया के सही तरीका से लिपिबद्धो राखल जाव जेहसे बाद में गलती आ शिकायतन के निवारण कइल जा सके।

हर राजनीतिक गोल के वोटबैंक पर आश्रित रहे के दिन खतम हो गइल। अब ओकरा पूरा समाज खातिर काम करे के पड़ी कवनो वर्ग विशेष के तुष्टिकरण कर के अब ऊ राजनीति ना कर पाई।

अब चुने के अधिकार से बेसी महत्व हो गइल कि केकरा लगे ई अधिकार होखे के चाहीं। मौजूद हालात कई जगहा अतना खराब हो गइल बा कि ओहिजा घुसपैठियन के तादात अधिका हो गइला का चलते कुछ गोल विशेष के एकर फायदा हो रहल बा जे अपना विशेष मतदाता समूह के तुष्टिकरण के काम कर रहल बा। अब एकरा पर रोक लगावल संभव हो पाई।

आ अब ई जरुरी हो जाई कि पूरा देश में चुनाव एकही साथ करावल जाव। ना त बिहार के चुनाव में बिहार के मतदाता, दिल्ली चुनाव में दिल्ली के, महाराष्ट्र चुनाव का बेरा महाराष्ट्र के मतदाता बने-बनावे के होड़ लाग जाई आ जवन गोल ई काम आसानी से करा पाई ओकर जीतलो आसान हो जाई। एक देश में एक चुनाव खातिर सहमत होखल अब देश के विपक्ष के मजबूरी होखे जा रहल बा।

 

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