रोवे के रहनी तबले अँखिए खोदा गइल
Some life changing events

रउरा सोचत होखब कि आज हम कवना बात ला एह लेख के मथैला भोजपुरी के कहावत ‘रोवे के रहनी तबले अँखिए खोदा गइल’। त हमार कहना बा कि कई बेर अचानक कुछ अइसन हो जाला जवना होखत त हमेशा से रहल बाकिर ओकरा पर धेयान आज दोसरा तरह से पड़ गइल। आ रोज होखे वाला घटना एगो नया राह देखा दिहलस। कुछ कुछ अइसने मिलत एगो अउर कहावत हवे कि ‘जे रोगिया के भावे से बैदा फरमावे’। मिलत-जुलत एह से कि अगर आदमी कवनो राह खोजत होखे, कवनो गुत्थी सझुरावे चाहत होखे आ अचके में दैबा – बैदा ना उपर वाला देवता – कवनो राह देखा देव।
पहिले मन में एगो सवाल उठल कि वैराग आ वीतराग में का अन्तर होला। जब माया मोह से मुक्ति मिल जाव त ऊ वैराग होला। आ जब हर तरह के राग – मोह द्वेष वगैरह – से मुक्ति मिल जाव त ऊ वीतराग हो जाला। वीतराग वैराग के चरमोत्कर्ष होला। आ इहे सोचत विचार के दायरा बढ़त गइल आ ई लेख बन गइल।
कई बेर हमनी का देखले बानी कि कवनो मक्खी कोठरी में घुस आवेले आ ओकरा बाद बाहर निकले का कोशिश मे ऊ बेर बेर खिड़की से निकलल चाहेले आ हर बेेर ओकरा बंद कांच से टकरात रहेले। ई उदाहरण हम एगो किताबो में पढ़ले रहनी हालांकि ओह किताब आ ओकरा लेखक के नाम इयाद नइखे पड़त। देखत आइल बा सभे केहू बाकिर किताब में त सभे लिख ना पावल। सेव हमेशा से पेड़ से गिरत आइल बा बाकिर न्यूटन इहे देख के सोचे लगलन कि सेव सीधे नीचे काहे गिरल, एने ओने काहे ना गइल ? आ एही से गुरुत्वाकर्षण के सिद्धान्त निकल गइल। वइसहीं मजिल (शव यात्रा), बारात, भिखारी साधू, आ बीमार सभे देखले बा बाकिर जब युवराज राहुल ओकरा के देखलन त उनुका मन में वैराग पनप आइल आ ऊ घर परिवार छोड़ के निकल गइलन मुक्ति के राह तलाशे खातिर। उहे आगे चल के भगवान गौतम बुद्ब बन गइलन। बरीसन साधना का बादो उनुका ऊ जबाब ना सूझल रहल जवन एगो छोट लइकी उनुका के समझा दिहलस। कहलस कि सब कुछ ‘सम्यक’ होखे के चाहीं। अति कवनो बात के, कवनो चीज के, कवनो भाव के खराबे होला आ एकर समाधान खोजे खातिर सम्यक के सिद्धान्त से बढ़िया कवनो सिद्धान्त ना होखे।
आर्कमीडिज बहुते दिन से एगो सवाल के जबाब खोजे में लागल रहलन कि सोना के शुद्धता के परख कइसे कइल जा सकेला ? एक दिन बाथटब में नहात उनुका मन मे एह सवाल के जबाब मिल गइल जब उनुका घुसला का बाद बाथटब से कुछ पानी छलक के बाहर आ गइल। आ ऊ यूरेका यूरेका – मिल गइल मिल गइल – चिल्लात उघारे देह कूदे लगलन।
आ अइसने एगो घटना घटल रहेे तुलसीदास जी का संगे के बतावे से पहिले ‘हिमकर’ जी के रामबोला से एगो अंश उद्धृत करत बानी –
कुछ रोग जवानी में होला, जब आवेला घर में डोला।
दुलहिनी मास भर मुसकाई, भर जिनिगी दुलहा गम खाई।जब लगी नेह तब ना छूटी, चाहे कतनो गोला फूटी।
पल के बिछोह लागी पहाड़, चिंता में सूखी हाड़-हाड़।छलके जब काम-कलश तन में सिमटे दुनििया अंगूठी नग में।
आँखिन के जोत बढ़ल होला, नहतर पर घाव चढ़ल होला।रतना रतनार भरल मद मे, रंग रूप चढ़ल अपना हद मे।
तुलसी के भइली आध अंग, धइली लगाम तुलसी तुरंग।
आ एही मानसिकता में रमबोला – तब तुलसीदास के इहे नाम रहल – चल पड़लन अपना ससुरारी। बरखा-पानी का बीच ओहिजा चहुँपे में अधरतिया हो गइल आ केंवाड़ खटखटवला का बदले ई एगो रसरी पकड़ के छरदेवाल फान गइलन। उनुका के देखके रतना के बहुते अचरज भइल आ लोकलाज के सोच के ऊ रमबोला के धिक्कार दिहली – कि अइसने मोह अगर रामजी में लगइतीं त मोक्ष मिल गइल रहीत।
ई बात उनुका लाग गइल आ निकल गइलन अलग राह पर। आगे चल के ऊ गोस्वामी तुलसीदास के नाम से जानल जाए लगलन आ हिन्दूवन के धर्मग्रन्थ रामचरितमानस के रचना क दिहलन। उनकर लिखल हनुमान चालीसा आ बजरंगबाण पढ़ के करोड़ो लोग अपना दिन के शुरुआत करेला।
अब न्यूटन, आर्कमीडिज, गौतम बुद्ध, आ गोस्वामी तुलसीदास के परसंग सुनवला का बाद फेर ओही मक्खी पर लवटत बानौ। आदमी कई बेर ओही मक्खी का तरह व्यवहार करे लागेला। राह चलत जब ओकरा सोझा एगो लमहर नाला भेंटा जाला त ऊ ओह नाला के पार करे का जुगत में बेर-बेर आपन डेग बढ़ा के ओकरा के पार करे के कोशिश करे लागेला। ओकरा लागेला कि बस तनिका अउर पसार लीं आपन डेग त नाला पार हो जाई। आ एह कोशिश में ऊ बेर-बेर नाला में गिरत रहेला।
जिनिगी का रह में जब कवनो लमहर नाला आ जाव त ओकरा के डेग बढ़ा के पार करे के कोशिश कइला से बेहतर होला तनिका पीछे लवटल। हो सकेला तब कवनो दोसर राह लउक जाव अगल बगल में। आ अगर ना लउकल त ओतना पीछे जाए के पड़ जाला जहाँ से दउड़त आ के छलांग मार के नाला पार कइल सहजता से हो जाव। पीछे गइल, पीछे लवटल हमेशा पराजय के द्योतक ना होला। युद्ध जीते खातिर एकाध गो झड़प मे हार गइला से अंतिम परिणाम हो सकेला कि युद्ध में जीत के मिल जाव।
का कबो रउरो जिनिगी में अइसन भइल बा जब रोवे के मन करत घरी अचके में आँख खोदा गइल होखे भा जवन रउरा सोचत रहीं तवना के जबाब अचके मे कवनो दोसरा तरीका से मिल गइल होखे?


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