धुरंधर से नाराज बॉलीवुड

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आपन इस्लामी संस्कार देश के जनता पर लादे के साजिश करेवाला बॉलीवुड एह घरी परेशान बा। ओकरा बुझात नइखे कि देश में उठत राष्ट्रीय सांस्कृतिक पुनर्जागण के ऊफान कइसे रोकल जाव। पिछला दिने आइल हिन्दी फिलिम धुरंधर बॉलीवुड के धूरा उड़ा दिहले बावे। ओकरा सपनो में कबो अइसन ना लागल रहुवे कि कवनो अइसनो फिलिम बनी जवना के कथानक ओकरा सोच से अलगा होखी। गाहे बगाहे पाकिस्तानीयन से भाईचाारा बनावे के सनेस देबे वाला बॉलीवुड सिनेमा सदमा में पड़ गइल बा कि कइसे कवनो अइसनो फिलिम बन जाई जवन पाकिस्तानी गढ़ में घुस के भारतीय लक्ष्य हासिल करे के गौरवान्वित करी।
धुरंधर के नायक के किरदार निभावे वाला रनबीर सिंह के, (रनबीर कपूर आ रनबीर सिंह के नाम से कई बेर आदमी कन्फ्यूजिया जाला। बाकिर रनबीर कपूर बॉलीवुडिया लाइन पर चले खातिर जानल जालें।) एगो हिन्दी फिलिम डॉन-3 में डॉन के किरदार करे खातिर चुनल गइल रहुवे। शायद ई चुनाव धुरंधर के अपार सफलता का पहिले कइल गइल रहुवे आ शायद एही चलते रनबीर सिंह ऊ किरदार करे ला तईयार हो गइल रहलन। बॉलीवुड सिनेमा हमेशा कवनो मुस्लिम के नायक बना के देखावे के काम करत रहेला। डॉनो एगो अइसने मुस्लिम खलनायक के प्रतीक हवे जे हिन्दूवन के देश पर राज करे के कोशिश करत रहेला। एक जमाना में सचहूं बॉलीवुड में इहे होत रहुवे। दाउद इब्राहिम का इशारा पर नाचे ला बॉलीवुड के कलाकार मजबूर रहलन।
सबसे पहिले तथाकथित सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के डॉन के किरदर मिलल रहुवे। उनुका बाद डॉन के दुसरका संस्करण में शा..शा..शा..शाहरूख खान के डॉन बनावल गइल रहल। अब डॉन के तिसरका संस्करण डॉन-3 में डॉन के किरदार करे खातिर रनबीर सिंह के चुनल गइल रहल। निर्माता द्वय फरहान अख्तर आ रीतेश सिधवानी के फिलिम डॉन-3 के प्री प्रोडक्शन पर बतावल जात बा कि नाहियो त पैँतालीस करोड़ खरच हो चुकल बा आ अब धुंरधर से आपन डंका बजवा चुकल रनबीर सिंह डॉन-3 मे डॉन बनके उतरल नइखन चाहत। निर्माता एह बात के शिकायत बॉलीवुड के कई संगठनन से कइलें। एहीमें से एगो मजगर संगठन फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इन्डिया सिने इम्प्लाइज (फेवेइसिइ) एगो निर्देश जारी कर दिहलसि कि रनबीर सिंह के बहिष्कार कइल जाई आ उनुका फिलिमन में संगठन के सदस्य कवनो तरह से काम ना करीहें। एह संगठन के सदस्य फिलिमन के तकनीकी पक्ष सम्हारेलें आ अभिनय से अलग वाला सगरी कामन में ओह लोग के खास भूमिका रहेला। एह तकनीशियन का बिना कवनो फिलिम बनावल ना जा सके आ एही चलते एह तरह के संगठन दबाव के राजनीति करत रहेलें। एह दबाव का चलते अधिकतर अभिनेता झुक जालें।
फेवेइसिइ के इहे वहिष्कार मीडिया में रनबीर सिंह पर प्रतिबन्ध लगावे का रूप में अंजोर होत चल गइल। आ स्वाभाविक बा कि एह पर मीडिया मे भरपूर चरचा हो रहल बा। राजनीतिक पक्षन का तरह मीडियो दू फाँक हो चुकल बा। एक पक्ष एह वहिष्कार के सही ठहरावे में लागल बा त दोसर पक्ष एकरा पर गरदा मचा दिहले बा। फेवेइसिइ के कवनो कानूनी अधिकार नइखे कि ऊ एह तरह के कवनो प्रतिबन्ध लगा सके। ई केहू के अछूत ना बना के ओकरा के छंटुआ बनावे के काम करेलें। ई विवाद फिलिमन पर कवनो तरह के वैचारिक अंकुश नइखे लगावत। ई बस इहे ला दबाव बनावे के कोशिश बा कि जवन वादा कइल गइल रहल तवना के निभावल जाव।
बाकिर रनबीर सिंह के शायद ई लागल कि उनुकर छवि के चोट चहुँपी अगर ऊ डॉन के किरदार करीहें। एक तरह से ई किरदार कइला का बाद बेवजह उनुकर लगातार तुलना अमिताभ बच्चन आ शाहरुख खान से होखे लागी। रनबीर सिंह के समर्थक पक्ष चाहत बा कि एह विवाद के निपटारा या त कानूनी लड़ाई लड़ के होखे भा आपसी समझौता कर के। एह तरह से दबाव डाले के कोशिश सही नइखे। आ एह कोशिश के एन केन प्रकारेण हिन्दू सांस्कृतिक जागरण का खिलाफ साजिश बतावे के कोशिश बनावल जा रहल बा। कहल जा रहल बा कि एकर वित्तीय समाधान के कोशिश एहले परवान ना चढ़ल कि निर्माता लोगन के मांंग से कलाकार सहमत नइखन।
आशा बा कि एह विवाद के सहज समाधान निकाल लीहल जाई। फेवेइसिइ के अतना औकात नइखे कि ओकरा डर से हर निर्माता डेरा जाई। इहो संभव बा कि कुछ निर्माता फेवेइसिइ के वहिष्कार भा असहयोग करे के धमकी के अनसुना कर के रनबीर सिंह के अपना फिलिमन में ले लीहे काहें कि रनबीर सिंह आजु के खर्रा सौदा बन गइल बाड़न।


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