गीत
– रामरक्षा मिश्र विमल खरके मड़इया के सींक रहि रहि टङाला परान. सूरज सुतल बाड़े रतिया उतान परसो होई एक पल के बिहान मन के जवन लागे नीक ओही प मनई के शान. खतरा बा लँघला प आपन सिवान कठवति के गंगा में कउवा नहान बनि जाला जीवन के...
Read More– शिवजी पाण्डेय ‘रसराज’ सावन आइल तूँ ना अइलऽ गइलऽ कवना देस अँगनवा लागेला परदेस! हरियर धरती लगे सुहावन, करिया बदरा डोले, दुअरा पर झिंगुर झँकारे, ताले दादुर बोले, पानी-भरल बदरिया झूमे, उड़ा के करिया केस. अँगनवा...
Read More– रवि कुमार गिरी गुरुजी न सार के जरुरत बा न बिचार के जरुरत बा , कविता लिखत बानी कविता के जरुरत बा , सोच होखे समझ होखे एपर केहू ध्यान ना दी , चटक मटक लिखी समाज के कुछ ज्ञान ना दी , पाहिले लोग खोजत बा कुछ खुला कुछ कसाव ,...
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