भोजपुरी संगम के 194वीं बइठकी मेंं – ई का होता…..

– कुमार अभिनीत

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भोजपुरी संगम के 194वीं बइठकी मेंं – ई का होता…..

पिछला दिने गोरखपुर के भोजपुरी साहित्यिक संस्था ‘भोजपुरी संगम’ के 194 वीं ‘बइठकी’ महानगर के खरैया पोखरा मोहल्ला में आयोजित भइल। एह बइठकी के कवितई सत्र में बहार गोरखपुरी का नाम से जानल जाए वाला मशहूर शायर डॉ मशरुल हसन आपन गजल सुनवलें जवना के रेघरियावे जोग लाइन रहल –

गैरत आ सम्मान बिकाता,
ई का होता?
खुलेआम ईमान बिकाता,
ई का होता?

पुरनयिा कवि आचार्य मुकेश श्रीवास्तव के अध्यक्षता में आयोजित एह बईठकी के संचालन अवधेश शर्मा ‘नंद’ सम्हरलन।

कार्यक्रम के शुभारंभ अरविंद ‘अकेला’ के सरस्वती वंदना से कइल गइल।

एकरा बाद चंद्रगुप्त शर्मा ‘अकिंचन’, नंद कुमार त्रिपाठी, चंदेश्वर ‘परवाना’, बागेश्वरी प्रसाद मिश्र ‘वागीश’, नर्वदेश्वर सिंह, राम समुझ सांवरा, निर्मल कुमार गुप्त, राम सुधार सिंह सैंथवार, कुमार अभिनीत, संतोष ‘संगम’, शम्भू ‘सजल’, कृष्ण कुमार श्रीवास्तव, आ श्रीमती कमलेश मिश्रा आपन आपन प्रतिनिधि कवितन के काव्यपाठ से बइठकी के पुरहर बनावल।

एह मौका पर वरिष्ठ कवि धर्मेंद्र त्रिपाठी, रवीन्द्र मोहन त्रिपाठी, डॉ. विनीत मिश्र, अमरनाथ पांडेय, एस.के.टामसन समेत कई दर्जन लोग उपस्थित रहल। कार्यक्रम के समापन ‘भोजपुरी संगम’ संस्था के संरक्षक ई. राजेश्वर सिंह सभका ला आभार जता के कइलन.

(भोजपुरी संगम के संयोजक कुमार अभिनीत के भेजल विज्ञप्ति के भोजपुरी उल्था)

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